Thursday, June 30, 2016

नही चेती सरकार तो हो सकती है1974 के बाद देश में सबसे बड़ी हड़ताल?

30 जून16 नई दिल्ली,केंद्र सरकार भले ही 7 वें वेतन आयोग की सिपारिशों को लागू कर केंद्रीय
कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने का दावा कर रही हो लेकिन आयोग की सिफारिशों से तकरीबन 16 लाख कर्मचारियों समेत अन्य 32 लाख कर्मचारी नाराज है इसीलिए रेलवे के कर्मचारियों ने 11जुलाई को हड़ताल पे जाने का एलान कर दिया है अगर इस बीच सरकार का रेल यूनियनों के साथ समझोता नही हो पाया तो
1974 के बाद देश में बड़े पैमाने पे हड़ताल हो सकती है

प्लाट में निर्माण रुकवाने गए लोगो की जमकर धुनाई

प्लाट में निर्माण रूकवाने गए लोगो की दबंगो ने जमकर धुनाई की मारपीट में लाठी डंडे कुल्हाड़ी चली तीन लोग घायल मामला थाने के बगल का।थाने के बगल में खाली पड़े प्लाट पर पाही थाना बीघापुर निवासी राम बिलास निर्माण कराने लगे निर्माण को बीघापुर निवासी सुनीन्द्र,विजय सिंह,विनोद कुमार रुकवाने गए ।प्लाट पर पहले से ही राम बिलास के सहयोगी चार लोग मौजूद तीनो पर हमला बोल दिया हमले में सुनिंद्र के सर पर कुल्हाड़ी लग जाने से सर में गहरी चोट तथा विनोद कुमार का हाथ टूट गया पी एच सी से प्रमोद को उन्नाव भेजा  गया है विजय सिंह को भी चोट है ।पीडितो ने थाने में तहरीर दी है।

कार में ऐसी, तो ध्यान रखें कुछ बात??

यह सन्देश सभी व्यक्ति, जो 'ए सी कार' का उपयोग करते हैं के लिये अति आवश्यक और महत्वपूर्ण है।क्योंकि, यह उनके स्वास्थ्य से सीधा सम्बन्ध रखता है।

*"कार की उपयोग पुस्तिका"* कार  स्टार्ट करने और 'ए सी' चलाने से पहले समस्त शीशों को खोलने का निर्देश देती है जिससे गर्म हवा बाहर निकल जाये। क्यों ?

इसमें कोई भी आश्चर्य की बात नहीं है कि आज कैंसर के कारण पहले की अपेक्षा बहुत मौतें हो रही हैं। अत्यन्त आश्चर्य होता है कि कैंसर की उत्पत्ति किन पदार्थों से हो रही है। एक ऐसा उदाहरण है जो कैंसर की उत्पत्ति के कारणों को बहुत हद तक स्पष्ट करता है।

प्रतिदिन अधिकांश व्यक्ति सर्वप्रथम  'सुबह के समय' और 'अंतिम बार रात' को अपनी कारों का उपयोग करते हैं।

कृपया कार में बैठते ही 'ए सी' को न चलायें। कार में प्रवेश करते ही, *"सबसे पहले शीशों को खोलें"* और कुछ मिनटों के बाद ही 'ए सी' चालू करें।

इसका "कारण", अनुसंधानों से यह पता चला है कि कार का डैश बोर्ड, सीट,'ए सी' की डक्ट्स, वस्तुतः गाड़ी की प्रत्येक पलास्टिक की बनी वस्तुएँ 'विषैली गैस' *"बैन्जीन"* छोड़ती हैं जो कि 'कैंसर' उत्पत्ति का एक बहुत बड़ा तत्व है।

जब भी आप कार खोलें तो कार को स्टार्ट करने से पहले कुछ क्षण के लिये गर्म पलास्टिक की गंध को स्वयम् अनुभव करेंगे।

बैन्जीन, कैंसर कारक होने के साथ - साथ हड्डियों पर विषैला प्रभाव, एनीमिया और स्वास्थय रक्षक सफ़ेद रक्त कणों (यह रोग कारक विषाणुओं को नष्ट करते हैं) में कमी लाती है।अधिक समय के सम्पर्क से ल्युकेमिया और कुछ अन्य प्रकार के कैंसर बढ़ने का पूर्ण ख़तरा है। इसके कारण गर्भवती महिलाओं में गर्भपात हो सकता है।

बन्द स्थान में बैन्ज़ीन का "स्वीकृत" स्तर 50 मिलीग्राम प्रति वर्ग फ़ीट है।

एक कार जोकि एक बन्द जगह पार्क की गई हो और जिसके शीशे बन्द हों में 400-800 मिलीग्राम बैन्ज़ीन का स्तर होगा - *स्वीकृत मात्रा से 8 गुणा अधिक*।

यदि इसको बाहर खुले में पार्क किया गया हो जहाँ पर तापमान 30 अंश सेन्टीग्रेड से अधिक हो तो, बैन्ज़ीन का स्तर 2000-4000 मिलीग्राम होगा, अर्थात *स्वीकृत स्तर से कम से कम 40 गुणा अधिक*।

जो व्यक्ति शीशे बन्द हुई कार में बैठ जाते हैं वस्तुतः वह अत्याधिक मात्रा में विद्यमान विषैली बैन्ज़ीन को साँस के द्वारा अपने शरीर में लेंगे।

बैन्ज़ीन एक विषैला तत्व है जोकि गुर्दे और लीवर पर दुष्प्रभाव डालता है।सबसे ख़तरनाक बात है कि हमारा शरीर इस विषैले तत्व को बाहर करने में नितान्त असमर्थ है।

*अतः कार में बैठने से पहले कुछ समय के लिये इसके दरवाज़े व खिड़कियाँ खोल दें* जिससे  बैठने से पहले ही अन्दर की हवा बाहर निकल जाये (अर्थात हानिकारक विषैली गैसीय तत्व बाहर निकल जाये)

*शिक्षा:* जब कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण  तथ्य जिससे आपको लाभ हो बताता है, तो आपकी भी यह नैतिक फ़र्ज़ है कि आप भी इस अमूल्य जानकारी औरों को भी बतायें।

बच्चों को अगर दोस्त बनाओ तो करेंगे बेहतरीन प्रदर्सन?

*बच्चों को दोस्त बनाओ..उनकी जान बचाओ*
कल उज्जैन में एक दुखद घटना हो गई..15 साल के बच्चे ने हॉस्टल में फांसी लगा ली..इतनी कम उम्र और इतना बड़ा कदम..
..याद करो..हम 15 के थे तब इधर-उधर की बातों में ही उलझे होते थे..न दुनिया की परवाह..न दुनियादारी की चिंता..आखिर हो क्या गया आज की पीढ़ी को..?
..असल में हम सब इसके जिम्मेदार हैं..बच्चों पर नंबर 1 बनने का दबाव..टॉप लाने भूख..किताबी कीड़ा बनाने का फितूर..
..स्कूल का बढ़ता बोझ..सारे वक्त बस पढाई..पढ़ाई..और पढाई..
..बचपन तो जैसे छीन ही लिया हमने..न दोस्ती..न खेल..न मस्ती..
..सुबह उठकर स्कूल..वंहा से आकर खाना और ट्यूशन..फिर आकर होम वर्क..फिर सो जाओ..और हर दिन वही..रविवार की छुट्टी में प्रोजेक्ट..
..बच्चे के पास खुद के लिए टाइम नहीं..माँ-बाप के पास बच्चों के लिए टाइम नहीं..बाकी कसर मोबाइल ने पूरी कर दी..
..सरकार ही नहीं हमे भी सोंचना होगा..बच्चों के तनाव को हमे दूर करना होगा..बेहतर होगा अपने बच्चों से बात करें..पूछें की क्या और कँहा दबाव है..खुलके उनसे बात करें..मन में बैठे डर को दूर करें..उन्हें समझाएं..दोस्त बनें..तभी हम अपने कलेजे के टुकड़ों को बचा पाएंगे..
..अब जा रिया मैं..जय राम जी की..
🖋 सुनील परमार

विचारों की पहेली है हमारे ज्ञान की दुनियां?

विचारों की पहेली है हमारे ज्ञान की दुनियां।
विचारों से ही सद्गुण का सदा संचार होता है।।
किताबें सिर्फ रट लेने से कोई ज्ञान ना मिलता।
जो उनके भाव को समझे वो भव से पार होता है।।1।।
खुदी में खुद खुदा फंसकरके बन्दा बन गया यारों।
खुदी में फंसने वाला खुद से ही गद्दार होता है।।
मिलान होगा खुद से तब खुदी जब छोड़ पाओगे।
खुदी जिसकी है मिट जाती मिलन उसका ही होता है।।2।।
है जब तक बूँद वो सागर का हिस्सा हो नही सकती।
प्रकृति मानव भी है ये सत्य ना स्वीकार करता है।।
स्वयं का ही विनाशक बन गया मानव इसी कारण।
अजन्मा और अविनाशी है पर मरने से डरता है।।3।।
खुदा का न धर्म कोई धर्म बन्दों के होते हैं।
खुदा तो मस्त रहता है बन्दे दिन रात रोते हैं।।
जो भाई भाई को बांटे उसे कैसे धर्म मानूँ।
जो सबको कर सके धारण उसी को धर्म कहते हैं।।4।। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
प्रताप मिश्रा सीतापुर
उत्तर प्रदेश भारत।।
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2013 के जल प्रलय से केदार नाथ की दीवार हुई थोड़ी कमजोर??

उत्तराखंड । वर्ष 2013 की जलप्रलय झेलने के बाद भी ज्यों के त्यों खड़े रहे केदारनाथ मंदिर की मजबूती को लेकर पहली बार शंका खड़ी हुई आईआईटी चेनई की रिपोर्ट में बताया गया हैं की । मंदिर की नीव कमजोर हैं इससे मंदिर के अगले हिस्से की दीवार में सूक्ष्म झुकाव आ गया हैं रिपोर्ट में मंदिर के सभामंडप की छत के कमजोर होने का भी जिक्र किया गया हैं मंदिर का संरक्षण कर रहे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई ने मंदिर की नीव को सुरक्षित बनाने के लिए मंदिर परिसर के फर्श को बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया गया हैं
एएसआई के देहरादून स्थित छेत्रीय कार्यालय की अधीक्षण पुरातत्वविद लिली धस्माना ने बताया की मंदिर की नीव को पानी से बचाने का सुझाव एएसआई को आईआई चेन्नई ने ही दिया हैं और एएसआई ने इस दिशा में प्रयास भी शुरू कर दिए हैं मंदिर परिसर के फर्श के पत्थरो को रेट…सुर्खी..उर्द की दाल…गुड़ और बेलगिरी के मसाले से जोड़ा जा रहा हैं मंदिर के फर्श को चारो तरफ से इस तरह बनाया जा रहा हैं की पानी किसी भी सूरत में टिक न पाए फर्श के करीव 90 वर्ग मीटर तक के हिस्से को वाटररफ्रूफ बनाया जा रहा हैं हलाकि अभी 500 वर्ग मीटर हिस्से पर कार्य होना बाकी हैं इस शेष कार्य को अगले सीजन में पूरा कर लिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है
साथ ही उन्होंने बताया की… मंदिर के दक्षिणी हिस्से के प्रथम तल के पत्थरो में आपसी दूरी भी बढ़ रही हैं इस दिशा में भी उपचार कार्य किया जा रहा हैं वही सभा मंडप की छत के पत्थर भी उखड़ रहे हैं फिलहाल इन्हें लकड़ी की स्पोट दी जा रही हैं कुछ समय बाद स्थाई प्रकृति का उपचार कार्य किया जायेगा और विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर को आकाशीय बिजली से भी महफूज बनाने के लिए लाइटिंग कन्डक्टर यानि तड़ित चालक लगाने का भी निर्णय लिया गया हैं इससे ताम्बे की पट्टी को भूमि तक लाया जायेगा इसके ऊपर नमक और कोयले की परत बनाई जायेगी ताकि मंदिर को आकाशीय बिजली से बचाया जा सके.

घर खरीदारों को राहत,देरी पर बिल्डर देंगे 11 फीसदी व्याज

नई दिल्‍ली। सरकार द्वारा ड्राफ्ट किए गए नियमों के अनुसार, अपार्टमेंट्स व घरों को देने में होने वाली देरी के लिए डेवलपर्स को 11.2 फीसद ब्‍याज का भुगतान करना होगा। इससे उन घर खरीदनेवालों के लिए राहत मिलने की संभावना है जो परियोजनाओं में होने वाली देरी की वजह से बढ़ते लोन के बोझ तले दबे हैं।

नए कानून के अनुसार, कंप्लीशन सर्टिफिकेट रहित प्रॉजेक्ट रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी में रजिस्टर होंगे जो नया कानून नोटिफाइड होने के तीन महीने के अंदर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित होने हैं। बनाए गए नये नियमों में यह भी कहा गया है कि बिल्डरों को प्रोजेक्‍ट के पूरा होने की तारीख, फ्लैट की साइज और उनमें जो सुविधाएं दिए जाने के वादे किए गए, उन सबकी जानकारी देनी होगी। इन नियमों पर 8 जुलाई तक आम लोगों के सुझावों को मांगा गया है।

टाइम्‍स ऑफ इंडिया के अनुसार, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने रियल एस्टेट नियमों का मसौदा रियल एस्टेट (डिवेलपमेंट ऐंड रेग्युलेशन) एक्ट, 2016 के 1 मई से लागू होने के महज दो महीने के अंदर ही तैयार कर दिया है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्राइम लेंडिंग रेट या उससे ज्यादा पर दो फीसद प्‍वाइंट्स इंट्रेस्ट रेट हर्जाने का प्रस्ताव किया गया है। सामान्यतः एसबीआई का होमलोन एमसीएलआर (मार्जिलन कॉस्ट ऑफ फंडबेस्ड लेंडिंग रेट) या उससे ज्यादा पर 0.20 से 0.80 फीसद प्‍वाइंट्स का होता है। इसका मतलब यह है कि 9.35 फीसद से 9.95 फीसद के होम लोन के मद्देनजर हर्जाने का दर 11.2 फीसद होगा।

पजेशन देने, अपार्टमेंट्स की साइज बढ़ाने, कुल अलॉटीज के 70 प्रतिशत से सहमति लिए बिना प्रॉजेक्ट के अडिशनल टावर्स के लेआउट या कंस्ट्रक्शन में बदलाव किए जाने आदि जैसे कानून के किसी तरह के उल्लंघन से रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है। ऐसी परिस्थिति में अथॉरिटी कोई फैसला ले सकता है जिसमें बायर्स असोसिएशन की रजामंदी से किसी भी बाहरी एजेंसी से प्रोजेक्‍ट पूरा करवाने का निर्णय भी शामिल है।

राजस्थान में कांग्रेस के प्रतिनिधि उम्मेद सिंह लड़ रहे है जनता की लड़ाई?

नेतृत्व के अभाव में जार-जार हो रहे बालेसर गांव तथा बेरोज़गार हुए मज़दूरो के लिए क्षेत्रीय कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि उम्मेदसिंह जी राठौड़ ने आज राजस्थान सरकार के खिलाफ दमनकारी नीतियों को रोकने तथा खाने शुरू की पैरवी और जल्द बी2 केटेगरी में डाल के जिलास्तर पे ईसी जारी करने को लेकर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन रखा गया।बाद में बालेसर उपखंड अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम से ज्ञापन सौंपा गया। धरने के दौरान करीब पांच से छः हज़ार की  तादाद में जनता एकत्रित हुई तथा इस मौके पर जोधपुर जिले के वरिष्ट कांग्रेस नेता राजेन्द्र जी सोलंकी,सुनील परिहार,राजेश जी गहलोत,विक्रमसिंह इन्दा, नारायण जी डाबडी,,जिला देहात के हीरालाल,जसवंतसिंह इन्दा, महिला कांग्रेस से संगीता बेनीवाल,कुंती देवड़ा,दिव्या गहलोत, कीर्ति सिंह,बाड़मेर के पूर्व सांसद हरीश चौधरी,शमा बानो,मानव अधिकार कमिटी के जोधपुर जिला उपाध्यक्ष दिनेश सांखला,भागीरथ सांखला,सांवर परिहार,संतोष सांखला,दीपाराम सांखला आदि उपस्थित थे।

नही लगेगा वाट्सअप पे रोक याचिका ख़ारिज

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मैसेंजर एप व्हाट्सएप पर रोक लगाने के लिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए आज वाँट्सएप पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। दरअसल व्हाट्सएप पर एनक्रिप्शन सिस्टम लागू होने के बाद किसी के लिए भी यह संभव नहीं है कि दो लोगों के बीच या ग्रुप के बीच की गई बात को पकड़ सके। यह खास फीचर आतंकवादियों और अफवाह फैलाने वालों के लिए वरदान साबित हुआ है। इसी खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। जिस सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वाँट्स एप पर प्रतिबन्ध लगाने से इन्कार कर दिया।

किसने लगाई याचिका

सुप्रीम कोर्ट से व्हाट्सअप पर बैन लगाने की याचिका हरियाणा के आरटीआई कार्यकर्ता सुधीर यादव ने लगाई है। एक्टिविस्ट सुधीर यादव की इस याचिका में कहा गया है कि व्हाट्सएप ने अप्रैल से ही एन्किप्रशन लागू किया है जिससे इस पर चैट करने वालों की बातें सुरक्षित रहती हैं और यहां तक कि सुरक्षा एजेंसियां भी इन्हें डिकोड नहीं कर सकतीं। याचिका में कहा गया है कि अगर खुद व्हाट्सएप भी चाहे तो वह भी इन संदेशों को उपलब्ध नहीं कर सकता। आतंकियों को हो रहा फायदा

इस प्रणाली की वजह से आतंकियों और अपराधियों को संदेश के आदान-प्रदान करने में आसानी होगी और देश की सुरक्षा को खतरा होगा। सुरक्षा एजेंसियां इन संदेशों को मॉनीटर नहीं कर पाएंगी। ऐसे में व्हाट्स ऐप पर बैन लगना चाहिए। याचिका में व्हट्स ऐप के अलावा और भी एप का जिक्र किया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एन्क्रिप्शन को सुपर कंप्यूटर से भी इंटरसेप्ट करना मुनासिब नहीं है और ऐसे में आतंकी गतिविधियों की रोकथाम के लिए सुरक्षा एजेंसियां न तो इंटरसेप्ट कर सकती हैं न ही जांच को आगे बढ़ा सकती हैं। पॉपुलर मैसेजिंग एप व्हाट्सएप ने अप्रैल 2016 से यह यूजर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया था। इस सिस्टम की खास बात ये है कि एक बार एनक्रिप्शन सेट करने के बाद कोई भी एजेंसी और खुद व्हाट्सएप भी आपके और आपके व्हाट्सएप फ्रेंड्स की चैट को नहीं पढ़ सकता है। इसे शुरू करने के लिए व्हाट्सएप आपको हर नए चैट के साथ एनक्रिप्ट करने का मैसेज भेजता है।

एनक्रिप्शन से क्या है खतरा

यूजर की दृष्टि से देखा जाए तो एनक्रिप्शन सिस्टम उनकी निजता की रक्षा करता है। लेकिन इस बात की भी पूरी संभावना होती है कि आतंवादी गतिविधियों में लिप्त लोगों के लिए यह एक सबसे सुरक्षित और गोपनीय नेटवर्क साबित होता है। इसके जरिए किसी भी तरह की आतंकी प्लानिंग और सूचनाएं आदान-प्रदान की जा सकती हैं। क्योंकि उनको पता है कि उनकी सीक्रेट चैट को कोई भी डिकोड नहीं कर पाएगा।

क्यों मुश्किल है एनक्रिप्शन को डिकोड करना

एनक्रिप्शन को डिकोड करना लगभग असंभव है। यानि कि अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति इसका दुरुपयोग करे और सुरक्षा एजेंसी चाहे तो भी उनके बीच हुई बातचीत को सामने नहीं लाया जा सकता है। याचिका में बताया गया है कि व्हाट्सएप के किसी भी मैसेज को डिकोड करने के लिए 115, 792, 089, 237, 316, 195, 423, 570, 985, 008, 687, 907, 853, 269, 984, 665, 640, 564, 039, 457, 584, 007, 913, 129, 639, 935 के कॉम्बिनशन ट्राई करने पड़ेंगे, जो बड़े से बड़े सुपर कम्प्यूटर के भी बस की बात नहीं होगी। यादव के मुताबिक 256 बिट एनक्रिप्टेड मैसेज को डिकोड करने में सैंकड़ों साल लग जाएंगे।

डॉ पूनिया से मिले डॉ सौकीन वर्मा???

नीमच/ निंबाहेड़ा कल 28जून को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ पी एल पुनिया दिल्ली से वायुयान द्वारा उदयपुर आए यहां से  कार द्वारा शाम को नीमच पहुंचे रात्रि विश्राम कर 29 जून को सुबह जिला कलेक्टर sp सहित जिला अधिकारियों की बैठक ली तत्पश्चात डॉ पुनिया अलग-अलग संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मिले इस मौके पर सोशल जस्टिस ऑफ इंडिया  के राष्ट्रीय संयोजक  व सामाजिक न्याय के पक्षधर डॉशौकीन वर्मा ने भी डॉ पुनिया का फूल माला पहना कर स्वागत किया 10 मिनट की मुलाकात में डॉ शौकीन वर्मा ने चित्तौड़गढ़-- नीमच जिले में दलितों पर हो रहे हमले अत्याचार तथा अनुसूचित जाति के लोगों को प्रताड़ित किए जाने की घटनाओं से अवगत कराया इस संबंध में राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष डॉ पुनिया ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को तलब कर दलित अत्याचार के मामलों को शीघ्र निपटाने के दिशा निदेश प्रदान किए इस अवसर पर आदिम जाति विभाग के कमिश्नर उज्जैन , जिला कलक्टर नीमच ,जिला पुलिस अधीक्षक नीमच, जिला शिक्षा अधिकारी नीमच, अजाक्स के जिलाध्यक्ष रमेश पवार आदि उपस्थित थे

यूपी में 150 साल पुराना कल्प वृच्छ पाया गया साधू सन्तों का लगा जमावड़ा जाने कहाँ

सीतापुर समाचार -150साल पुराना कल्प व्रच्छ की हुई  पहचान-  सीतापुर -लखीमपुर मार्ग पर साई कन्या महाविद्यालय दो किमी दुर ग्राम गौरिया कला मे(150)वर्षों पुराने पेड़ की पहचान की गयी ।इतने पुराने पेड़ का गाँव वालो को नाम तक नही पता था  लेकिन इस बार गाँव के कुछ लोग तीर्थ करने उज्जैन गये वहाँ पर लगे कल्प व्रच्छ को को देखा तो लोगों ने अपने गाँव में भी ऐसे पेड़ की जानकारी वहाँ के साधुओ को दी साधुओ ने कल्पना व्रच्छ की एक टहनी दी तथा मिलाने कर सूचना देने को कहा ।लोगों ने यहाँ आकर उसके टहनी का मिलाने कर उज्जैन के साधुओ को सूचना दी जिस पर वहा से साधुओ ने आकर इसकी पहचान कर कल्प व्रच्छ होने की पुष्टि  की तथा पेड की पूजा की तथा भंडारे का भी आयोजन  किया गया भंडारे में गाँव के क्रषणकुमार  मलिखान सिंह जुगराज सिंह भानू सिंह आदि ने सहयोग किया तथा जहाँ तक लोगों को सूचना मिलती है वह इस पेड़ देखने आ जाता है प्रति दिन सैकडो लोग पेड़ को देखने आते हैं

उत्तराखण्ड में भारी बारिश की सम्भावना के चलते 72 घण्टे का अलर्ट जारी

उत्तराखंड में भारी बारिश एवं भूस्खलन के चलते बुधवार को एक बार फिर आवाजाही ठप हो गई, जिससे चार धाम यात्रा पर गये कई तीर्थयात्री अलग – अलग जगहों पर फंसे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भूस्खलन कि वजह से रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ और बद्रीनाथ से सड़क सम्पर्क टूट गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन इस बाधा से निपटने व यातायात सुचारु करने के लिये लगातGार प्रयास कर रहा है। मौसम विभाग ने राज्य में 30 जून को भारी बारिश की संभावना के चलते अल्मोड़ा, पौड़ी, उत्तरकाशी, देहरादून, ऊधमसिंहनगर, चंपावत और नैनीताल में 72 घंटे का अलर्ट जारी किया गया है।
टैप न्यूज़ इंडिया ,उत्तराखण्ड

Wednesday, June 29, 2016

हाईकोर्ट ने 15 हजार शिछक भर्ती में नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगाई रोक

Wed, 29 jun
लखनऊ (जेएनएन)। प्रदेश में चल रही पंद्रह हजार प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती को एक बार फिर झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस भर्ती में नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया हो तो फिलहाल ज्वाइन न कराया जाए। नियुक्ति पत्र मंगलवार से दिए जाने थे। कोर्ट ने प्रदेश सरकार और अन्य विपक्षियों को एक माह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राम सरन मौर्य ने दीपक कुमार तिवारी व अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि पंद्रह हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए दिसंबर 2014 में विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें डिप्लोमा इन एजूकेशन (स्पेशल एजूकेशन) करने वाले अभ्यर्थियों को शामिल नहीं किया गया। याचीगणों ने यह कोर्स रिहैबिलेशन काउंसिल आफ इंडिया से किया था। उन्होंने आवेदन किया लेकिन उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया।

इसके बाद याचीगणों ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट के आदेश पर शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कर लिए लेकिन काउंसिलिंग के दौरान उनके प्रमाणपत्र को नहीं माना गया। उन्हें काउंसिलिंग से बाहर कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि एक बार यह निश्चित हो गया कि याचीगण वैध डिग्री रखते हैं तो उन्हें काउंसिलिंग के लिए रोकने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने इसी आधार पर नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है।

उल्लेखनीय है कि 15 हजार शिक्षकों की भर्ती में मंगलवार से ही नियुक्ति पत्र दिए जाने थे, किंतु इससे कुछ घंटे पहले ही इस पर रोक लगा दी गई। याचिका पर अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

7 वें पे कमीशन: कुछ इस तरह से होगी सरकारी कर्मचारियों की बल्ले बल्ले


नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज सातवें वेतन आयोग की सिफारिशेंको मंजूरी दे दी है। इससे देश के लगभग एक करोड़ लोगों के वेतन और पेंशन में बढ़ोत्तरी होगी। इसका फायदा उन लोगो को भी होगा जो रिटायर हो चुके है। 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकारी खजाने पर 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बोझ पड़ेगा। आइए नजर डालते हैं सातवें वेतन आयोग की विशेषताओं और उससे अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभावों के बारे में-

क्या हैं सातवें वेतन आयोग की विशेषताएं?

कमीशन की सिफारिश के अनुसार, मिनिमम सैलरी 18 हजार रुपए हो जाएगी, वहीं अधिकतम सैलरी 2.50 लाख रुपए प्रतिमाह तक हो सकती है।पेंशन में 24 फीसदी बढ़ोत्तरी का सुझाव।वेतन आयोग की सिफारिशों का फायदा ऑटोनोमस बॉडीज, यूनिवर्सिटी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों को भी मिलेगा।साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के ग्रैच्युएटी की रकम 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी से इकोनॉमी में 1 लाख करोड़ रुपये आएंगे।कुल मिलाकर कर्मचारियों से अधिकारियों का वेतन 18 हजार से लेकर ढाई लाख तक हो जाएगा जबकि मांग साढ़े 23 हजार से सवा तीन लाख के बीच वेतन की है।सातवे वेतन आयोग में ट्रैवल एलाउंस में भी इजाफा होने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस में भी इजाफा होगा।सातवें वेतन आयोग में अवकाश में बढ़ोत्तरी होगी।

प्रभाव

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद भारत सरकार में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी का वेतन (भत्ते जोड़ कर) करीब 25000 रुपए हो जाएगा। ऐसे में सरकारी नौकरियों के लिए कंपटीशन और बढ़ेगा।वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार पर 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बोझ बढ़ेगा।वेतन में बढ़ोत्तरी से जीडीपी के 0.65 फीसदी के बराबर होगा खर्च होगा।रेलवे पर पड़ेगा 28000 करोड़ रुपए का अतिरक्त बोझसातवें वित्त आयोग ने 52 भत्तों को खत्म करने की सिफारिश की है। 36 अन्य भत्तों को या तो जारी भत्तों में या फिर नए प्रस्तावित भत्तों में समायोजित किया जाएगा।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से 2016-17 में केंद्र के खजाने पर 1.2 लाख करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा तथा राजकोषीय घाटे में 0.65 प्रतिशत वृद्धि होगी। राजकोषीय घाटा बढ़ने से अर्थव्यवस्था में असंतुलन पैदा होने की आशंका रहती है लेकिन वर्तमान में बाजार में मांग कम होने और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत कम होने के कारण मुद्रास्फीति पर ज्यादा दवाब नहीं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि होगी, परिणामस्वरूप रिएल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य एवं बीमा क्षेत्रों के कारोबार में तेजी आएगी। ऐसे में लोग मार्केट में निवेश करेंगे तो बाजार में पैसा भी आएगा। सातवें वेतनआयोग की सिफारिशों के बाद कार और घर की डिमांड काफी बढ़ जायेगी और इन पर ऋण सुविधा आसानी से उपलब्ध होगी।

इन विभागों को होगा सातवे वेतन आयोग का लाभ

रेलवे, शिक्षण संस्थान, आर्मी के कर्मचारी, आर्मी पेंशनर, बैंक कर्मचारी, बीएसएनएल कर्मचारी, सशस्त्र बल, सरकारी डॉक्टर ,इंजीनीयर, एयर फोर्स, नेवी, आईएएस ऑफिसर, आईपीएस ऑफिसर, आइआरएस ऑफिसर, न्यायिक स्टाफ, लाइब्रेरियन लोअर डिविजन क्लर्क ,अपर डिविजन क्लर्क, मेडिकल ऑफिसर , पेरामेडीकल स्टाफ आदि