Sunday, July 31, 2016

जो आदमी दूसरी कौम से जितनी नफरत करता है वह खुदा से उतनी ही दूर है-मुन्सी प्रेम चन्द

रिपोर्ट- अनुज हनुमत
बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं फिर भी इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ । तारीख 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गांव में एक युग पुरूष का जन्म हुआ जिसने विश्व साहित्य की फलक पर भारत के नाम को बुलंदियों पर पहुँचा दिया. गोदान, रंगभूमि, कर्मभूमि व गबन जैसे विश्व प्रसिद्द उपन्यासों व शतरंज के खिलाड़ी, ठाकुर का कुआँ, कफ़न, पूस की रात व दो बैलों की कथा जैसी सशक्त कहानियों के रचयिता प्रेमचंद किसी एक भाषा के लिए गर्व का विषय नहीं हैं वरन समस्त साहित्य जगत के शाश्वत युग द्रष्टा
 प्रेमचंद जी कहते हैं कि समाज में ज़िन्दा रहने में जितनी कठिनाइयों का सामना लोग करेंगे उतना ही वहाँ गुनाह होगा। अगर समाज में लोग खुशहाल होंगे तो समाज में अच्छाई ज़्यादा होगी और समाज में गुनाह नहीं के बराबर होगा। प्रेमचन्द ने शोषितवर्ग के लोगों को उठाने का हर संभव प्रयास किया। उन्होंने आवाज़ लगाई 'ए लोगों जब तुम्हें संसार में रहना है तो जिन्दों की तरह रहो, मुर्दों की तरह ज़िन्दा रहने से क्या फ़ायदा।
प्रेमचंद के उपन्‍यास न केवल हिन्‍दी उपन्‍यास साहित्‍य में बल्कि संपूर्ण भारतीय साहित्‍य में मील के पत्‍थर हैं। प्रेमचन्द कथा-साहित्य में उनके उपन्यासकार का आरम्भ पहले होता है। उनका पहला उर्दू उपन्यास (अपूर्ण) ‘असरारे मआबिद उर्फ़ देवस्थान रहस्य’ उर्दू साप्ताहिक ‘'आवाज-ए-खल्क़'’ में ८ अक्टूबर, १९०३ से १ फरवरी, १९०५ तक धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ। उनका दूसरा उपन्‍यास 'हमखुर्मा व हमसवाब' जिसका हिंदी रूपांतरण 'प्रेमा' नाम से 1907 में प्रकाशित हुआ। चूंकि प्रेमचंद मूल रूप से उर्दु के लेखक थे और उर्दू से हिंदी में आए थे, इसलिए उनके सभी आरंभिक उपन्‍यास मूल रूप से उर्दू में लिखे गए और बाद में उनका हिन्‍दी तर्जुमा किया गया
प्रेमचंद एक संवेदनशील कथाकार ही नहीं, सजग नागरिक व संपादक भी थे। उन्‍होंने 'हंस', 'माधुरी', 'जागरण' आदि पत्र-पत्रिकाओं का संपादन करते हुए व तत्‍कालीन अन्‍य सहगामी साहित्यिक पत्रिकाओं 'चांद', 'मर्यादा', 'स्‍वदेश' आदि में अपनी साहित्यिक व सामाजिक चिंताओं को लेखों या निबंधों के माध्‍यम से अभिव्‍यक्‍त किया। अमृतराय द्वारा संपादित 'प्रेमचंद : विविध प्रसंग' (तीन भाग) वास्‍तव में प्रेमचंद के लेखों का ही संकलन है |

हमारी पीढ़ी उनकी आभारी है। हम सदा उनके प्रति नतमस्तक रहेंगे। उन्होंने हमारा संरक्षण का भार लिया और हमें सिखा-पढ़ाकर बड़े दुलार के साथ साहित्य में प्रतिष्ठित करने का भार उठाया।
कलम के सिपाही प्रेमचन्द जी नाम लेते ही आँखों के समक्ष एक चित्र उभरता है- गोरी सूरत, घनी काली भौंहें, छोटी-छोटी आँखें, नुकीली नाक और बड़ी- बड़ी मूँछें और मुस्कुराता हुआ चेहरा। टोपी,कुर्ता और धोती पहने एक सरल मुख-मुद्रा में छिपा एक सच्चा भारतीय। एक महान कथाकार- जिसकी तीक्ष्ण दृष्टि समाज और उसकी बुराइयों पर केन्द्रित थी। एक समग्र लेखक के रूप में उन्होने मध्यवर्गीय समाज को अपने साहित्य में जीवित किया।  मुंशी प्रेमचंद्र ने कहा था की - " जो आदमी दूसरी कौम से जितनी नफरत करता है,समझ लीजिये वह खुदा से उतना ही दूर है ।"

तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे.......मोहम्मद रफ़ी

31जुलाई । आवाज की दुनिया के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी को पाश्र्वगायन करने की प्रेरणा एक फकीर से मिली थी। पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में 24 दिसंबर, 1924 को एक मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार में जन्मे रफी एक फकीर के गीतों को सुना करते थे जिससे उनके दिल में संगीत के प्रति एक अटूट लगाव पैदा हो गया। रफी के बड़े भाई हमीद ने मोहम्मद रफी के मन मे संगीत के प्रति बढ़ते रुझान को पहचान लिया था और उन्हें इस राह पर आगे बढऩे में प्रेरित किया।
लाहौर में रफी संगीत की शिक्षा उस्ताद अब्दुल वाहिद खान से लेने लगे और साथ ही उन्होंने गुलाम अलीखान सें भारतीय शास्त्रीय संगीत भी सीखना शुरू कर दिया। एक बार हमीद रफी को लेकर के एल सहगल संगीत के कार्यक्रम में गए, लेकिन बिजली नहीं रहने के कारण सहगल ने गाने से इनकार कर दिया। हमीद ने कार्यक्रम के संचालक से गुजारिश की वह उनके
भाई रफी को गाने का मौका दें। संचालक के राजी होने पर रफी ने पहली बार 13 वर्ष की उम्र में अपना पहला गीत स्टेज पर दर्शको के बीच पेश किया।
दर्शको के बीच बैठे संगीतकार श्याम सुंदर को उनका गाना अच्छा लगा और उन्होंने रफी को मुंबई आने के लिए न्यौता दिया। श्याम सुंदर के संगीत निर्देशन में रफी ने अपना पहला गाना सोनिये नी हिरीये नी पाश्र्वगायिका जीनत बेगम के साथ एक पंजाबी फिल्म गुल बलोच के लिए गाया। वर्ष 1944 में नौशाद के संगीत निर्देशन में उन्हें अपना पहला हिन्दी गाना हिन्दुस्तान के हम हंै पहले आप के लिए गाया।
वर्ष 1949 में नौशाद के संगीत निर्देशन में दुलारी फिल्म में गाए गीत सुहानी रात ढल चुकी के जरिए वह सफलता की ऊंचाईयों पर पहुंच गए और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नही देखा। दिलीप कुमार, देवानंद, शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, शशि कपूर, राजकुमार जैसे नामचीन नायकों की आवाज कहे जाने वाले रफी अपने संपूर्ण सिने कैरियर में लगभग 700 फिल्मों के लिए 26000 से भी ज्यादा गीत गाए।
मोहम्मद रफी फिल्म इंडस्ट्री में मृदु स्वाभाव के कारण जाने जाते थे, लेकिन एक बार उनकी कोकिल कंठ लता मंगेश्कर के साथ अनबन हो गई थी। उन्होंने लता मंगेशकर के साथ सैकड़ों गीत गाए थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब रफी ने लता से बातचीत तक करनी बंद कर दी थी। लता मंगेशकर गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं, जबकि रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की।
रफी साहब मानते थे कि एक बार जब निर्माताओं ने गाने के पैसे दे दिए तो फिर रॉयल्टी किस बात की मांगी जाए। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इनकार कर दिया। हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में दिल
पुकारे गीत गाया।
मोहम्मद रफी ने हिन्दी फिल्मों के अलावे मराठी और तेलुगु फिल्मों के लिए भी गाने गाए। वह अपने करियर में 6 बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किए गए। वर्ष 1965 में रफी पदमश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। वह बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। रफी फिल्म देखने के शौकीन नहीं थे, लेकिन कभी-कभी वह फिल्म देख लिया करते थे।
एक बार रफी ने अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार देखी थी। फिल्म देखने के बाद रफी अमिताभ के बहुत बड़े प्रशंसक बन गए। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म नसीब में रफी को अमिताभ के साथ युगल गीत चल चल मेरे भाई गाने का अवसर मिला। अमिताभ के साथ इस गीत को गाने के बाद रफी बेहद खुश हुए थे और जब रफी साहब अपने घर पहुंचे तो उन्होंने अपने परिवार के लोगों को अपने पसंदीदा अभिनेता अमिताभ के साथ गाने की बात को खुश होते हुए बताया था।
अमिताभ के अलावा रफी को शम्मी कपूर और धर्मेन्द्र की फिल्में भी बेहद पसंद आती थी। मोहम्मद रफी को अमिताभ-धर्मेन्द्र की फिल्म शोले बेहद पसंद थी और उन्होंने इसे तीन बार देखा था। 30 जुलाई 1980 को आस पास फिल्म के गाने शाम क्यूं उदास है दोस्त गाने के पूरा करने के बाद जब रफी ने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से कहा शुड आई लीव जिसे सुनकर
लक्ष्मीकांत प्यारे लाल अचंभित हो गए क्योंकि इसके पहले रफी ने उनसे कभी इस तरह की बात नहीं की थी। अगले दिन 31 जुलाई 1980 को रफी को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को ही छोड़कर चले गए।

सरकारी बस ने ली गाय की जान?

जयपुर से आ रही मथुरा डिपो बस ने कोनौता के पास एक गाय को टक्कर मार दी ! श्री गोविन्दम मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के सामने बस ने गाय को टक्कर मारी और करीब 20 मीटर तक अपने साथ मुर्छित गाय को रगडती हुई ले गयी ! बस में सवार लोगो में किसी को नुकसान नहीं हुआ है लेकीन गाय की जान चली गयी ! बाबा गोशाला के अध्यक्ष शंकर यादव , मानवाधिकार कमिटी के उपाध्यक्ष पवन धाकड़ , मेहन्द्र टाक , सुरेन्द्र महेता , अजय बन्ना , भवानी सिंह व अन्य लोगो को बस दृवार को पकड़ा और कानोता थाना ले जा कर एफ आई आर दर्ज करवाई ! बस ड्राइवर फ़िलहाल पुलिस हिरासत में है ! 

आपका गायब फोन मिल सकता है जाने कैसे?

आजकल हम सभी के पास महंगे _मोबाइल फोन_ होते है ।अगर आपका फोनगुम हो जाता है तो आप उसे वापस कैसे  पा सकते है ।
इसी विषय पर एक रोचक जानकारीसाझा कर रहा हूं ।प्रत्येक मोबाइलका IMEI(International Mobile Equipment Identity) no.होता है । इसके माध्यम से आप विश्व में कही भी अपना मोबाइल ट्रैककर सकते है ।यह कैसे काम करता है :-
1. अपने फोन से _*#06#_डायल करें ।
2. आपका फोन  15 अंको का एक युनिक कोड दिखाएगा ।
3.  इसे संभाल कर कहीं लिख लें, फोन मे न सेव करें ।
4.  अगर आपका फोन गुम हो जाए तो इस नम्बर को नीचे लिखी डिटेल के साथ _cop@vsnl.net_ पर ईमेल कर दें ।
Your name:-__________
Address :- ______________
Phone model :-__________
Make :-___________
Last used no. :-__________
Email for communication:_______
Missed date:- __________
IMEI no :- __________
5.  पुलिसमे जाने की जरूरत नही ।
6.  आपका फोन अगले चौबीस घंटो मे  जीपीआरएस के जरिए ट्रैक हो जाएगा ।और आपका हैंडसेट आपका नंबर बदल जाने की दशा मे  भी मिल जायेगा।

बिचौलिये मलाई मार रहे और किसान मजबूर-रामसरन शर्मा

सरकारो चाहे केन्द्र व राज्य केवल घोषणाओं से ही किसान को बेबकूफ   बनाने का छद्म रवैया अपनाये हुये हैं किसानो के हित के लिए मसले पर बैठको के दौर व नीतियों के क्रियान्वन पर ज्वलंत सबाल।
बहरहाल अभी आला केन्द्रीय मंत्रियों ने महँगाई पर काबू पाने के समय रहते उपायों पर बल दिया। हालांकि खास बात जो वित्त मंत्री की अध्यक्षता मे सामने आयी वो सरकार द्वारा बफर स्टाक के रूप मे रखने के लिये किसान उत्पादों की खरीद का जिक्र।
900 करोड़ की खरीद पर 630  करोड़ का प्याज। क्या प्याज की खरीद जो जमाखोरो द्वारा किसानों से अभी सस्ती दर पर खरीद कर ऑवटन करने वाली ऐजेनसीयो को फिर सरकार मूल्य तय कर दोनो को अप्रत्यक्ष रूप से फाइदा करायेगी   यानि दोनो को साथ-साथ नीति निर्माताओ को भी । अब इस हालात मे किसान क्या करे जिसे अभी प्याज व सीजन मे अन्य उत्पादों का लागत भी हासिल नही होती और बिचौलिए उपरोक्त मलाई मार रहे हैं कब तक होता रहेगा।
अच्छाई तो तब है जब किसान को लागत के अनुरूप सभी उत्पादों की कीमत मिलना सुनिश्चित हो। कीमत मिले तो वह आत्महत्या को बाध्य न हो। किसान के हित को कब ये नीति निर्माता सुनेंगे या उपरोक्त वर्ग विशेष को ही 68 साल से फाइदा पहुंचाकर किसान की जमीने कारपोरेट घरानों को कहीं फार्महाउस कहीं फार्म प्रोडक्ट्स ही फार्मिंग के रूप मजबूरन बेचे जाने की स्थित लगातार चल रही है और बढती जा रही है ।  और आज तो किसान की पीढ़ी मजदूरी का पेटपालने के लिए सहारा ले रही है भविष्य मे 5% लोग कारपोरेट लॉबी के साथ शासन करेगे और सभी बचे खुचे किसान मजदूरी करने को बाध्य होगे।    
                                
Ram saran sharma

इश्क न जाने जाति कुजाति नींद न जाने टूटी खाट?

मछलीशहर। किसी ने ठीक ही कहा कि प्यार न देखे जाति पात नीद न देखे टूटी खाट का कहावत उस समय चरिता देखने को मिला जब स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के एक गाव एक पाँच बच्चों की माँ 35 वर्षीय महिला पर आशिकी का ऐसा परमार चढ़ा की पड़ोसी युवक के साथ ही अपनी बची हुई जीवन बिताने के लिए चुनते हुए घर वालो के सभी अरमानो पर पानी फेरते हुए फुर्र हो गयी जो कि क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।बताते है कि कोतवाली क्षेत्र के एक गाव में एक महिला पति के साथ सात जन्मों तक रिस्ता निभाने वाली कसमो को दर किनार करते हुए उस समय अपने आशिकी के साथ भाग गयी जब उसका पति रोजी रोटी के लिए मुम्बई गया हुआ है और महिला पति के घर न रहने पर अपने पड़ोसी आशिकी के साथ जीवन निभाने का फैसला करके सभी को चकित कर दी।महिला के कारनामे का पता चलते ही परिवार में खामोशी छा गयी और परिजन लोक लज्जा के चलते बिना किसी बताए ही महिला की खोजबीन करने लगे लेकिन जब कही पर महिला का पता नही चला तो लोगो को पड़ोसी युवक पर शक किया जा रहा है क्योकि जब से महिला फरार है तब से युवक भी फरार है। सुत्र

उपकार भी सेर जैसों पे करे चूहों पे नही...?

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर।
देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे तभी शेर शेरनी आये बकरी को देख लाल पीले होकर हमला करता उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।
अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो।
अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी।
यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है।
चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करता हूँ चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार ।
चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली
काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे।
चील ने यह घटना बकरी को सुनाई तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग क्यों? ?
बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा

उपकार भी शेर जैसो पर किया जाए चूहों पर नही।
चूहों  (कायर) हमेशा उपकार को स्मरण नही रखेंगे वो तो भूलना बहादुरी समझते है और शेर(बहादुर )उपकार कभी नही भूलेंगे ।

पत्नी ने ही की थी अपने 2 बच्चों के साथ पति की हत्त्या

हनुमानगढ़. नाजायज संबंधों के चलते जंक्शन स्थित हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में शुक्रवार रात विवाहिता ने प्रेमी के संग मिलकर अपने ही बच्चों का गला रेत डाला। पति का भी कत्ल कर शव संदूक में बंद कर दिया। आरोपित प्रेमी की पत्नी ने इस हत्याकांड का राज खोला तो शनिवार सुबह पुलिस मौके पर पहुंची। तीनों शवों जिला अस्पताल स्थित मोर्चरी में रखवाया। दोपहर को पुलिस ने मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर विवाहिता व उसके प्रेमी को हरियाणा के अबूबशहर इलाके से दबोच लिया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस उनसे पूछताछ कर रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शंभुदयाल यादव (४५) हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी में आजाद वाटिका के पास पत्नी रीमा यादव (४०) व पुत्री ज्योति (१३) तथा पुत्र दीपक (१०) के साथ किराए के मकान में रहता था।  वह मूलत: बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला था। हनुमानगढ़ में पिछले कई वर्षों से रहकर डबल रोटी बेचने का काम करता था। रीमा यादव के सुनील यादव (३५) निवासी रीको, जंक्शन के साथ लंबे समय से अवैध संबंध थे। वह शंभुदयाल के घर आता-जाता रहता था। दोनों के अवैध संबंधों की खबर रीमा तथा सुनील यादव के परिवारों को थी। लेकिन शंभुदयाल की रोकटोक उनको खटकती थी। इसलिए दोनों ने मिलकर बुधवार रात गला काटकर उसकी हत्या कर दी। शव को घर में ही संदूक में डालकर ऊपर रजाइयां रख दी। जब शव से बदबू उठने लगी तो ज्योति व दीपक को संदेह हुआ। दोनों ने माता से पिता के संबंध में पूछा। इसलिए आरोपितों ने बच्चों को भी रास्ते से हटाकर भागने का प्लान बनाया और शुक्रवार रात उनको नशे की गोलियां खिलाकर गला काट दिया।
पत्नी ने खोला राज
आरोपित सुनील यादव शुक्रवार शाम को अपनी पत्नी नीलम यादव व बच्चों मानसी व सौरभ को लेकर शंभुदयाल यादव के घर गया। उनको बताया कि वहां खाने का निमंत्रण है। वहां पहुंच जब आरोपित सुनील यादव ने अपने बच्चों को नशे की गोलियां खिलानी चाही तो नीलम यादव को संदेह हो गया। दोनों में काफी बहस हुई। फिर वह अपने दोनों बच्चों को लेकर वहां से घर लौट गई। जब रात-भर पति सुनील यादव घर नहीं आया तो ससुर अशरफी यादव को पूरी घटना बताई। शनिवार सुबह अशरफी यादव अपने पुत्र व अन्य को लेकर हाऊसिंग बोर्ड स्थित शंभुदयाल यादव के घर पहुंचा। वहां ज्योति व दीपक के शव देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
बदबू से संदेह
सूचना मिलने पर एसपी भूवनभूषण यादव, डीएसपी अत्तरसिंह पूनिया व जंक्शन थाना प्रभारी रणवीरसिंह मीणा मय जाब्ते मौके पर पहुंचे। दोनों बच्चों के शवों को मोर्चरी पहुंचा कर मौका मुआयना किया। इस दौरान घर से भयंकर बदबू आ रही थी। ऐसे में पुलिस को संदेह हुआ। जब कमरे में रखे संदूक को खोला तो उसमें शंभुदयाल का शव मिला। बदबू से पुलिस व आसपास के लोगों की हालत खराब हो गई। पुलिस ने मुश्किल से उसे वाहन में रखवा जिला अस्पताल की मोर्चरी पहुंचाया।

पुलिस के हत्थे चढ़े 4 शातिर लुटेरे जाने कहाँ?

कानपुर। (सर्वेश पाठक) बर्रा थाना पुलिस ने चार शातिर लुटेरों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है। अभियुक्तों के कब्जे से तमंचे बरामद करते हुए कई वारदातें कबूल की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया है।
एसपी दक्षिण डा. संजय यादव ने बर्रा थाने में खुलासा करते हुए बताया कि शहर के साउथ इलाके में लुटेरों की धरपकड़ अभियान में चार शातिर लुटेरों को पकड़ा गया। एसपी के मुताबिक थानाध्यक्ष तुलसीराम पाण्डेय गोविन्दनगर एच ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास से विश्व बैंक निवासी विनोद कुमार सरोज, नयापुर निवासी रीतेश कुमार वर्मा, अवधेश सक्सेना व सुदर्शन को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 315 बोर तमंचा दो करतूस, 32 बोर तमंचा समेत दो कारतूस, डुप्लीकेट चाभियों को गुच्छा बरामद किया। एसपी ने बताया कि पकड़े गये अभियुक्त महिलाओं से पर्स व चेन स्नेचिंग सहित कई लूट की घटनाएं कबूल की हैं। अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है।

बंद होगी parle G की 87 साल पुरानी फैक्ट्री?

मुंबई। देश के करोड़ों लोगों की पसंद और सबसे ज्यादा बिकने वाली बिस्कुट पार्ले जी की फैक्ट्री बंद होने वाली है। बेहद कम कीमत पर आसानी से मिलने वाली इस बिस्कुट की फैक्ट्री करीब 87 साल पुरानी है, लेकिन मुंबई के विलेपार्ले स्थित फैक्ट्री को कंपनी ने बंद करने का फैसला लिया है।
दरअसल इस कारखाने में प्रोडक्शन कम होने के कारण कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला लिया गया है। इस फैक्ट्री का कारोबार 10,000 करोड़ रुपए का है। यहां करीब 300 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन कर्मचारियों ने धीरे-धीरे वीआरएस ले लिया।
विलेपार्ले में कंपनी की स्थापना साल 1929 में हुई थी। साल 1939 से यहां ग्लूको नाम से बिस्कुट बना शुरू हुआ। लेकिन साल 1980 में इसका नाम बदलकर पार्ले-जी रख दिया गया। अब 87 साल बाद ये सफर खत्म होने वाला है। कंपनी के मुताबिक पिछले कुछ सालों से उत्पादन में गिरावट हुई है। जिसकी वजह से इसे बंद करने का फैसला लिया गया।

यहां सक्रिय है मानव तस्कर ..............?

सर्वेश पाठक (पत्रकार)
-नौकरी के नाम पर अरब देशों में कानपुर समेत अन्य जनपदों से युवकों के बेचे जाने की बात आईं सामने
कानपुर। विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने के नाम पर दलाल भोले-भाले युवकों को अपने जाल में फसा लेते हैं। जिसके बाद अरब देशों में उनका सौदा कर अच्छी रकम वसूल लेते है। यही नहीं नौकरी दिलाने व विदेश भेजने के नाम पर युवकों से भी अच्छा खासा रूपया ऐंठ लेते है। ऐसा ही ताजा मामला शहर के नौबस्ता थाना में देखने को मिला। मामले में युवक की पत्नी से तहरीर लेकर एसएसपी ने शासन को पत्र भेजा है।
बढ़ती बेरोजगारी के बीच दलालों का धंधा सिर चढ़कर बोल रहा है। जिसके चलते शहर के साथ ही कानपुर देहात, फतेहपुर, बुदेलखंड के हमीरपुर और बाँदा के युवकों को बड़ी सख्या में अरब देशों में अच्छी पगार का ऑफर देकर मानव तस्कर बेच रहे हैं। कुछ दिन पहले जहानाबाद के सानीगढ़वा के फनीफ को एक तस्कर सउदी अरब में नौकरी का झांसा देकर उससे पहले एक लाख रूपए ले लिए और फिर एक शेख को पांच लाख में बेच दिया। ऐसा ही एक मामला कानुपर के नौबस्ता थाना अंतर्गत मछरिया में सामने आया है, जहां मानव तस्कर ने इस्लाम अहमद को बहरीन के एक शेख को 10 लाख में बेच दिया और उसके गुलाम बनाए जाने की बात सामने आ रही है।
ऐसे हुआ खुलासा
फतेहपुर के चांदपुर थाना निवासी मोहम्मद इस्लाम का विवाह मछरिया के गांव की शबाना परवीन के साथ हुआ था। परवीन ने बताया कि उसके भाई राजा के दोस्त अनवर, इदरीश और आवास विकास हंसपुरम निवासी जीशान, सलीम ने जानकारी दी की बहरीन में प्लंबर के पद के लिए नौकरी का आफर आया है, अगर इस्लाम बहरीन में काम करेगा तो उसे प्रतिमाह 50 से 60 हजार रूपए प्रतिमाह मिलेंगे। जिससे मेरे पति इस्लाम बहरीन जाने को तैयार हो गए। मानव तस्करों ने वहां जाने के एवज में इस्लाम से 1.80 लाख रूपए की मांग की। इस्लाम की पत्नी ने तस्करों को 50 हजार किराए के नाम पर और 1 लाख 30 हजार बीजा के तौर पर दिए।
27 फरवरी को बहरीन के लिए हुआ था रवाना
चारों युवकों ने इस्लाम को लेकर 26 फरवरी 2016 को मुंबई के लिए निकले, जहां उन्होंने आजाद नाम के एक व्यक्ति से मिलवाया। आजाद ने 27 की सुबह इस्लाम को बहरीन के लिए रवाना कर दिया। बहरीन पहुंचते ही इस्लाम को शेख ने मजदूरी के काम पर लगाया। पांच माह तक एक रूपए नहीं दिए, साथ की दोपहर को ही भोजन मिलता था। कभी-कभी शेख के बाक्सर उसे और उसके साथ अन्य भारतीय की पिटाई भी करते थे।
जुलाई में फोनकर हकीकत बयां की
पत्नी परवीन ने बताया कि जुलाई में पति का फोन आया और जो दास्तां उन्होंने बताई, सुनते ही पैरों के तले से जमीन ही खिसक गई। परवीन के मुताबिक पति ने बताया कि मुझे 10 लाख रूपए में एक शेख को बेचा गया है। शेख उससे दिनभर मजदूरी करवाता है। इस्लाम ने पत्नी को बताया कि जब भी शेख से पैसे मांगता हूं तो वह पीटता है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस्लाम की पत्नी ने एसएसपी शलभ माथुर से मिलकर पति के बेचे जाने की बात बताई। जिस पर एसएसपी ने चारों के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश नौबस्ता पुलिस को दिया है। एसएसपी ने बताया कि नौबस्ता पुलिस पांच दिन में अपनी रिपोर्ट देगी जिसके बाद राज्य सरकार के माध्यम से विदेश मंत्रालय को भेज दी जाएगी।