Wednesday, August 31, 2016

1 सितम्बर को दिल्ली सरकार करेगी "श्रमिक संवाद "का आयोजन

दिल्ली में आम जनता के हितों को सर्वोपरि रखकर काम करने वाली दिल्ली सरकार ने एक कदम और बढ़ाते हुए श्रमिकों को जागरूक करने की  जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर उठा ली है जिसको आगे बढ़ाते हुए आम आदमी की सरकार दिल्ली सरकार 1 सितम्बर 2016 को ताल कटोरा स्टेडियम में श्रमिक संवाद का आयोजन करने जा रही है मिली जानकारी के अनुसार  70 वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली सरकार ने संगठित व् असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों व कामगारों की समस्याओं व जरूरतों को ध्यान में रखकर न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की थी और मजदुरों के साथ किसी भी प्रकार की कोई ज्यातदी न हो  इसके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी निगरानी में एक निगरानी  समिति भी बनाई  थी यह समिति तबसे लगातार गरीब मजदूरों के हित में कार्य कर रही है लेकिन फिर भी कही कोई कमी न रहे इस लिए लोगों की राय जानने के लिए 1 सितम्बर को दिल्ली सरकार "श्रमिक संवाद" का आयोजन करने जा रही है  जिसका आयोजन नई दिल्ली स्थित तालकटोरा स्टेडियम  में दोपहर 3:00 बजे किया जाएगा।जिसमे  दिल्ली के सभी श्रमिकों को आमंत्रित किया गया है।

दिल्ली एनसीआर में जमकर हुई बारिश सड़कें बनी तालाब

बुधवार का दिन दिल्ली एनसीआर के लोंगो के लिए आफत भरा रहने वाला है सुबह से ही हो रही मूसलाधार बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त दिखा कहीं सड़के बनी तालाब तो कही सड़को पर ट्रैफिक रेंगता हुआ नजर आया मिली जानकारी के अनुसार भारी बारिश की वजह से थम गयी दिल्ली जिसके कारण एक बस में 52 यात्री फॅस गये लोगो की मद्त से सभी को सकुसल बाहर निकाल लिया गया है और दिल्ली से उड़ान भरने वाली सभी फ्लाइट रदद् हुई हैं
बारिस की वजह से साइबराबाद के रामनाथ पुर में एक घर की दीवार गिरने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत की खबर  भी आ रही।
दिल्ली में बारिस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली जाम होने के कारण टैफिक पुलिस को काफी परेसानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजू

बड़ी भाग्य से होते है हमें संतो के दर्शन?

मनुष्य जीवन में संत-महात्मा बड़ी भाग्य से मिलते हैं ।कहा भी गया है कि-" संत मिलन और हरि कथा तुलसी दुर्लभ दोय,सुत दारा औ लक्ष्मी पापिहु के घर होय"।इसीलिए मनुष्य को कभी भी संत महात्माओ को अपमानित नहीं करना चाहिए और न ही उनका मजाक उड़ाना चाहिए इतना ही नही कभी संत महात्मा की परीक्षा भी नहीं लेनी चाहिए क्योंकि संत महात्मा कभी मिथ्या नही बोलते हैं जो कहते हैं वह पूरा होता है।संत महात्मा ईश्वर के भी बहुत सम्माननीय होते हैं और इनके कष्टो का निवारण करने के लिये निराकार से साकार रूप धारण करके धराधाम पर आ जाते हैं ।भगवान शिव एक मात्र ऐसे है जो भक्त का समर्पण देखते है  उसका गुण दोष नहीं देखते हैं । जो उनकी शरणागत हो जाता है वह उसका कल्याण जरूर करते हैं । रावण इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। मानव के जीवन में श्रीमद् भागवत कथा का बहुत महत्व है और अज्ञानी को भी ज्ञानवान बनाकर प्रभु के करीब पहुँचा देती है। भागवत कथा के दो मार्ग बताये गये हैं ।पहला भक्ति तथा दूसरा ज्ञान मार्ग होता है।भक्ति मार्ग में श्रृद्धा व समर्पण का बहुत महत्व है। भगवान कभी भी अनाचारी अत्याचारी व दुष्टो को माफ नहीं करते हैं बल्कि ऐसे लोगों को नष्ट कर देते हैं जैसा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने वंशजो के साथ किया । वैराग्य मनुष्य जीवन में ईश्वर प्राप्ति का आसान मार्ग है। वैराग्य ज्ञान मिलने के बाद ही सम्भव हो सकता है।यह संसार नाशवान है इसमें मनुष्य के कर्म ही शेष रह जाते हैं ।इस नाशवान संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता है सभी स्वार्थ के वशीभूत होते हैं ।जब तक स्वार्थ की पूर्ति होती रहती है तब तक सारे नाते रिश्ते रहते हैं जब जब मतलब सिद्ध होना बंद हो जाता है तो बुढ़ापे मे कोई साथ नहीं देता है और अपने भी पराये हो जाते हैं ।ईश्वर ही अकेला ऐसा होता है जो सुख व दुख दोनों में साथ रहता है ।इसीलिए कहा गया है कि यह दुनिया एक मायामोह है और मायामोह मनुष्य जीवन के लिये अभिशाप समान माना गया ।
                  भोलानाथ मिश्र
      वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी
  रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी ।

अगर देश में पत्रकार नही होते तो सोंचो क्या होता-राजेश गुप्ता की कलम से

हम समाज के प्रहरी कहे जाने बाले देश का चौथा स्तम्भ माने जाने बाले पत्रकार कहलाते है । एक पत्रकार किस मुश्किल से एक खबर को लिखता और बनाता है यह कोई नही जानता हम समाज की गंदगी साफ करते करते खुद अपने आप को भुल जाते है लोगों की नफरत दुश्मनी तरह तरह की मुसिबत झेलते है । और हमें कोई खबर के बदले धन्यवाद तक नही देता आरोप इतने बड़े बड़े की हम रिश्वत खोर है नजाने क्या क्या । नेता झुठे बादे कर चले जाते है तो लोग उनके नाम के जैकारे भगवान की तरह लगाते है। हम ओ है जो सायद अगर हम देश मे पत्रकार न होते तो सोचिए इस देश का क्या होता हम ही है जो अच्छी बुरी खबरों को अपनी जान पर खेल कर आप तक पहुंचाते है । और आप लोगों से नफरत दुश्मनी पाते है कभी कोई पत्रकारों को बधाई व धन्यवाद नही देता । हम देश का चौथा स्तम्भ इस लिए है कयो की देश की सेना फौजी पुलिस के बाद हम लोग ही है जो आप लोगों के लिए प्रहरी बन कर आप लोगों की रक्षा कलम से करते है । आज अगर कही गलत हो रहा हो तो उस जगह पर आप हल्ला कर दे की पत्रकार या पुलिस आ गई तो फिर नजारा देखिए हमें कोई नही डरता हमारी कलम से सब डरते है पर हमारी कलम पर भी यह समाज झुठ की स्याही थोप देता है यही हमारा दुख है यही दर्द । पर हमें खुशी तब मिलती है जब हम किसी को न्याय दिलाते है कोई सराहनीय कार्य कर समाज का हित करते है । इस देश मे हमसा न कोई हुआ है न होगा । पत्रकार जगत को हमारा सलाम सभी मित्र को मेरी ओर से शुभकामनाएँ ।

यूपी में फिर हुए 27 अधिकारियों के तबादले

उत्तरप्रदेश के लखनऊ  से मिली जानकारी के अनुसार साशन ने अपने सभी 27 डिप्टी एसपी के तबादले, डीजीपी आफिस ने तबादलों की सूची जारी की,27 सीओ के तबादलों की सूची जारी, विष्णु कुमार तिवारी सीओ फिरोजाबाद, वंदना सिंह सीओ सीबीसीआईडी कानपुर, अजय प्रकाश श्रीवास्तव सीओ कानपुर देहात, विजय कुमार द्वितीय सीओ प्रतापगढ, रितेष कुमार सिंह सीओ रामपुर, संजीव कुमार सिन्हा सीओ डायल 100 लखनऊ, सुशील कुमार सिंह सीओ उन्नाव, डॉ. राजेश तिवारी सीओ यातायात लखनऊ, मनोज कुमार गुप्ता सीओ कानपुरनगर, राजेश कुमार सिंह सीओ पुलिस मुख्यालय लखनऊ, सुरेश कुमार सहायक सेनानायक 9वीं पीएसी मुरादाबाद, अभिषेक यादव सीओ मुरादाबाद बनाए गए, प्रभात कुमार प्रथम सीओ झांसी बनाए गए, अमिता सिंह सीओ लखनऊ बनाई गई, उमाशंकर सिंह सहायक सेनानायक 32वीं पीएसी लखनऊ, अजय कुमार उपाध्याय सीओ फैजाबाद, राधेश्याम कोल जोनल अधिकारी चित्रकूट, शिव स्वरूप-जोनल अधिकारी आजमगढ़, कल्यान सिंह-सीओ बांदा बनाए गए, अर्चना सिंह-सीओ पीटीएस मुरादाबाद, चरन सिंह-सीओ रायबरेली बनाए गए, सीतांशु कुमार-सीओ देवरिया बनाए गए, अनिल कुमार सिंह-सीओ सोनभद्र ,लेखराज सिंह-सीओ हरदोई बनाए गए, परमानंद पांडेय-सहायक सेनानायक 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद, मोईन अहमद-सीओ इलाहाबाद, अजय सिंह चौहान-सीओ जालौन बनाए गए ।।

पकड़ी गई देशी शराब की भट्टी एक युवक गिरफ्तार

पटना मिली जानकारी के अनुसार आज सुबहडोमचांच थाना अतर्गत ढोढ़ाकोला क्षेत्र में देशी शराब की अवैध फैक्ट्री  पकड़ी गई जिसको एसो के आदेश से नष्ट किया गया । यह छापामारी एस डी ओ प्रभात कुमार बरदियार के नेतृत्व में किया की गयी। जिसमे भारी मात्रा में शराब की पेटी बरामद की व संसाधन के अभाव में पच्चीस ड्राम स्प्रीट व तीन सौ पेटी को नष्ट किया गया,व दो ड्राम बनी शराब को बहा दिया गया।एस डी ओ प्रभात कुमार बरदियार ने बताया कि अवैध विदेशी शराब की बहुत बड़ी फेैक्ट्री है,छापामारी मारी में मशीन को क्षति ग्रस्त कर दिया गया है।
एक युवक गुड्ड कुमार पिता स्व विलाश पासवान पटना सिटी,धवल पुरा निवासी को गिरफ्तार किया गया,गिरफ्तार गुड्डु कुमार ने पुलिस के समक्ष बताया कि इस फैक्ट्री मैं रोजाना एक सौ पचास पेटी शराब बनता था,जो चार पहिया वाहनो से झारखंड में कही भेजा जाती थी,यहां दो प्रकार के ब्रांड आर एस,एमपेरियल ब्लू तैयार की जाती थी,युवक ने बताया कि  वह शराब सील करने की मशीन चलाता था।इस एवज में मुझे  पांच हजार रुपया दिए जाते थे छापामारी में उत्पाद अधीक्षक कमल नयन सिंह, थाना प्रभारी संतोष कुमार, ए एसआई विनोद सिंह, उत्पाद निरीक्षक ललित सोरेन,उत्पाद विभाग के मो शहनवाज सहित पुलिस बल मौजुद थे।

पत्रकार पर हमला करने वाला फर्जी नेता गिरफ्तार

कानपुर। बिगत 20 अगस्त को कानपुर कोर्ट परिसर में दिन दहाड़े पत्रकार चन्दन जायसवाल पर जानलेवा हमला करने वाला रितेश गुप्ता उर्फ वासू गुप्ता पुलिस के हत्थे चढ़ गया। हालांकि अन्य हमलावर अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। बताते चलें कि पुलिस की पकड़ में आया रितेश गुप्ता उर्फ वासू गुप्ता अपने आपको समाजवादी पार्टी का नेता बताकर रौब झाड़ता रहता था जबकि वह कमोडिटी शेयर ट्रेडिंग की आड़ में सट्टे का कारोबार करता था। यह भी पता चला कि वह जुआड़खाना भी चलवाता था। 
वही कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। कोतवाली सीओं राजेन्द्र धर ने बताया कि नामजद तीन आरोपियों में वासू गुप्ता, उसका बडा भाई सानू गुप्ता व पिता विजय गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज थी, जिसमें हमने मुख्य आरोपी हमलावर वासू गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है तथा बांकि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जायेगा।चन्दन जायसवाल ने बताया कि शहर के सभी पत्रकार भाइयों के सहयोग के चलते पुलिस ने कार्रवाई की। उन्होंने कानपुर प्रेस क्लब के महामंत्री अवनीश दीक्षित सहित सभी पत्रकार भाइयों के सहयोग की तारीफ करते हुए कहा कानपुर प्रेस क्लब के सभी पदाधिकारी व सदस्य गणों का भरपूर साथ मिला। वहीं अन्य जिलों के पत्रकार भाइयों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। 

पकड़ा गया 6कोठे 40 कमरों वाला सेक्स रैकेट

दिल्ली के जीबी रोड में सेक्स रैकेट के सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इसके तहत दिल्ली पुलिस ने जीबी रोड पर कोठे चलाने वाले आफाक हुसैन और उसकी बीवी सायरा को गिरफ्तार कियाहै। ये दोनों जीबी रोड पर 6 कोठे चलाते हैं जिनमें 40 कमरे हैं और इनमें करीब 250 लड़किया थीं।जानकारी के अनुसार क्राइम ब्रांच ने आफाक और उसकी पत्नी को एक हफ्ते पहले गिरफ्तार किया था। इन दिनों दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं। पुलिस टीम ने कोठा चलाने वाले इस दंपति के अलावा 6 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है।दिल्ली क्राइम ब्रांच ने बताया कि, आफाक की हर रोज़ की कमाई 10 लाख से ऊपर थी। इसका अपना पूरा गिरोह है, जिसमें अधिकतर लड़कियां पश्चिम बंगाल, झारखंड, नेपाल, बिहार से लाईजाती रही हैं।लड़क‌ियों की कमाई का ह‌िसाब रखता था रमेश पंड‌ितकोठों पर लड़कियों के आने के बाद इन्हें संभालने के लिए सीनियर महिलाएं तैनात थीं, जिन्हें नायिकाएं कहा जाता है। लड़कियों की कमाई का हिसाब आफाक का ड्राइवर रमेश पंडित रखता था।सिंडिकेट में मैनेजर का नाम सरफराज है, जो फरार है। इन लोगों के अकाउंट में करोड़ों रुपये जमा हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली और एनसीआर में इनकी कई संपत्तियां हैं।इनके अलावा गैंग के कई लोग अब भी फरार हैं। जीबी रोड सेक्स रैकेट के इस केस में पुलिस ने सभी आरोपियों पर मकोका के तहत पहली बार कार्रवाई की है।सायरा को पहले भी हो चुकी है 7 साल की सजासूत्रों के मुताबिक इस जोड़े ने यह काम जीबी रोड़ के एक कोठे से शुरू किया था। लेकिन अब इनके पास अन्य चार कोठे हैं। इसके साथ ही इनके पास कई बेनामी प्रॉपर्टी और दुकानें हैं।1990 के बाद से सायरा को अलग-अलग केसों में सात बार गिरफ्तार किया गया है, वहीं आफाक को तीन बार गिरफ्तार किया गया है।साल 2001 में सायरा को एक मामले में सात साल की सजा हुई थी, लेकिन वहां से लौटने के बाद उसने फिर से वही धंधा शुरू कर दिया। 

अगले 24 घण्टो में हो सकती है जमकर बारिश जाने कहाँ

भोपाल। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में मंगलवार की सुबह से हल्की बदली छाई हुई है जिससे धूप खिलकर नहीं निकल पाई। बादलों के छाने से गर्मी व उमस से कुछ राहत है।बीते 24 घंटों के दौरान इंदौर, श्योपुर व शिवपुरी में बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों मे सामान्य से भारी बारिश होने का अनुमान जताया है।मौसम विभाग ने धार, बैतूल, झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम, नीमच, मंदसौर में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

राज्य के मौसम में बदलाव का दौर जारी है। मंगलवार को भोपाल का न्यूनतम तापमान 24.9 डिग्री सेल्सियस, इंदौर का 23 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर का 25.8 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर का न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं, सोमवार को भोपाल का अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस, इंदौर का 30.2 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर का  36 डिग्री सेल्सियस और जबलपुर का अधिकतम तापमान 31.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

जलपरी श्रद्धा अपनी हिम्मत का लोहा मनवाने को तैयार

फतेहपुर। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और सच्ची लगन हो तो असम्भव सम्भव हो जाता है। कुछ ऐसी ही नजीर पेश कर रही हैं कानपुर की 11 वर्षीय श्रद्धा शुक्ला। कक्षा नौ में पढ़ने वाली इस छात्रा की प्रतिभा और हौसला देखेंगे तो दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर हो जाएंगे। जी हां, श्रद्धा कानपुर से गंगा में तैरते हुए वाराणसी जा रही हैं और सोमवार को जिले के असनी घाट स्थित संकठा मंदिर में पहुंचने पर उनका जमकर स्वागत किया गया। जलपरी की एक झलक पाने के लिए खासी भीड़ भी उमड़ी तो नारी स्मिता फाउंडेशन की महिलाओं ने पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। कानपुर के ललित शुक्ला की 11 वर्षीय पुत्री श्रद्धा गजब के हौसले और ऊंची उड़ान भरने के जज्बे के साथ रविवार की दोपहर कलकल बह रही गंगा में उतरीं और तैरते हुए सोमवार को जिले के असनी गंगा घाट पहुंची। जहां श्रद्धा ने संकठा मंदिर में माथा टेका और पूजा अर्चना भी की। जलपरी के जिले में पहुंचने की सूचना मिलते ही उसे देखने वालो की भीड़ लग गई। नारी स्मिता फाउंडेशन की स्मिता सिंह, जिला पंचायत सदस्य नीतू यादव, महिला व्यापार संगठन की माधुरी साहू, मधु साहू, रीता वैश्य व अन्य महिलाओं ने चार हजार रुपए देकर जलपरी का सम्मान किया और खूब हौसला आफजाई की। इसके अलावा अन्य तमाम लोगों ने जलपरी का फूलमाला पहना कर भव्य स्वागत किया। 

Tuesday, August 30, 2016

और खमोश हो गयी किसानों की मदतगार आवाज नही रहे सीनियर एडवोके उमेश चंद्रा

(विकास बालियान)।
किसानो के लिए दिल में ज़ज़्बात लिए रहते थे लखनऊ निवासी सीनियर अधिवक्ता उमेश चन्द्रा, चश्मे के पीछे से झांकती आँखे उम्मीदें बंधाए रखती थी की "किसान के दिन बहुरेंगे, कोई नही सुनेगा अदालत तो सुनेंगी।"चार बाग़ के पास लखनऊ में रहने वाले 88 वर्षीय श्री उमेश चन्द्रा जी ने कल जैसे जिंदगी की अदालत में आखरी पेशी करते हुए अंतिम सांस ली। पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार और पूर्व महाधिवक्ता उमेश चन्द्रा सोमवार दोपहर उच्च न्यायलय लखनऊ हमेशा की तरह गए, मालूम हुआ नए चीफ जस्टिस आए हुए है तो नवनियुक्त चीफ जस्टिस श्री दिलीप बाबासाहेब भोसले को मिलने उनके चेम्बर तक पहुँचे ही थे की दरवाज़े के पास ही अचानक हृदय घात के चलते लड़खड़ाकर गिर पड़े, आनन फानन में उन्हें नज़दीक के चिकत्सालये ले जाया गया, मगर यहाँ कोई दलील कोई अर्जी कसम न आ सकी और गयी सांस लौटाई न जा सकी।
वक्त का तकाज़ा की एक और वह चीफ जस्टिस के स्वागत के लिए उनके चेम्बर तक पहुंचे भी और मिल न पाए वहीँ चीफ जस्टिस कुछ समय बाद खुद उनके आवास पर उन्हें  श्रधांजलि अर्पित कर रहे थे, और विडंबना की यहाँ ब्रह्मलीन हो चुके उमेश चंद्रा चाह कर भी चीफ जस्टिस का अब स्वागत नही कर सकते थे।
बेहद मृदुल स्वाभाव, लोगो की सुनना, आत्मीयता देना, मुद्दों से जुड़ना और मित्र सरीखा व्यवहार उनके शानदार व्यक्तित्व का हिस्सा थे।सरदार वी एम् सिंह का बड़ा सम्मान करते थे उमेश चंद्रा। वी एम् सिंह ने राष्ट्रिय किसान मज़दूर संगठन बनाया तो उसकी न केवल उमेश चंद्रा जी ने ही जरूरत समझाई थी बल्कि उसके पांच संस्थापकों में से वह एक थे।
गन्ना बकाया भुगतान, मिल चलने, खड़े गन्ने के दाम, ब्याज, धान खरीद के कांटे, गेहूं खरीद, भूमि अधिग्रहण आदि के किसान हितेषी वी एम् सिंह द्वारा दायर किये गए मुकदमो में वह न केवल राय देते थे बल्कि अपना वकालतनामा भी लगा देते थे, केस के कागजात, नियम, पुराने आदेश सब तैयार रहते थे उनके पास। किसान अधिकार जैसे उनकी रगो में बसता था। वह कहते थे वी एम् सिंह जैसे 10 लोग भी हिंदुस्तान में मिल जाए तो किसान के हालात बदले जा सकते है।6 साल पहले 82 साल की उम्र में भीषण ठण्ड में भी वह घण्टो वी एम् सिंह और किसानो के साथ गन्ना भुगतान आदि को लेकर लखनऊ गन्ना आयुक्त कार्यलय पर चले धरने में देर रात तक बैठे रहे थे।जीवट के धनी उमेश चंद्रा की 2 बेटियां और 1 बेटा है।उनके एक दामाद पदम् श्री डॉक्टर राजन सक्सेना है जो पीजीआई लखनऊ में न केवल गेस्ट्रोलिजि विभाग के हेड है बल्कि दुनिया के चन्द बड़े डॉक्टर में शुमार है।उमेश चंद्रा जी ने किसानो के लिए बहुत कुछ किया, उन जैसे विद्वान् और सीनियर अधिवक्ता एक एक बहस के लाखो रुपिये लेते है मगर उन्होंने किसान हित में न केवल अपने वकालत नामें लगवाए बल्कि जिरह में भी आगे रहे परंतु कभी एक पैसा किसी से नही लिया अपितु घर से ही लगाया।

गलतियों का पुतला होता है मनुष्य और गलती को सुधारना उसका धर्म

मनुष्य को गलतियों का पुतला कहा जाता है और मानवीय भूल को हर स्थान पर मान्यता मिलती है।गलती मनुष्य का स्वाभाविक गुण माना जाता है ।गलती को सुधारना मनुष्य का धर्म होता है और जो बार वहीं गलती करें वह स्वाभाविक नहीं लापरवाही मानी जाती है ।गलतियाँ उसी से होती हैं जो कुछ कार्य करता है जो निकम्मा बना बैठा रहता है उससे क्या गलती होगी? क्रिया की प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक गुण होता है और मनुष्य को अपना कार्य सोच समझकर ईश्वर को साक्षी मानकर करते रहना चाहिए प्रतिक्रिया की चिंता नहीं करनी चाहिए।गलती होने के डर से कोई कार्य ही न करना मनुष्य के लिये कतई उचित नहीं  है।गलती से मनुष्य को सुधार करने का अवसर मिलता है और भविष्य के लिये सीख मिलती है । बेकार आदमी सारा समय दूसरे की बुराई तलाशने में लगा देता है किन्तु कभी अपनी बुराई की तरफ गौर नहीं करता है। कहा भी गया है कि जब मनुष्य किसी की तरफ एक अंगुली उठाता है तो तीन अंगुलिया उसकी तरफ इशारा करती हैं जीवन में कोई जरूरी नहीं है कि हर वक्त आप भगवान का भजन या नाम ही लेते रहे ,कर्म करना भी ईश्वर की पूजा होती है। कर्म करने के समय भी ईश्वर को याद करते रहना बहुत बड़ी पूजा होती है। इन्सान का इन्सान के काम आना भी ईश्वर भक्ति के समान होता है क्योंकि हर इन्सान के अंदर ब्रह्म का वास होता है। मानव पूजा ईश्वर पूजा होती है और मानव का मानव के काम आना मानव का मुख्य धर्म होता है।
                   भोलानाथ मिश्र
     वरिष्ठ पत्रकार /समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी

पत्रकार का सच लिखना और दिखाना उसका काम है फिर उसपर अत्याचार क्यों?

पत्रकारों की सुरक्षा पर निगरानी रखने वाली प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था सीपीजे के अनुसार भारत में भ्रष्टाचार कवर करने वाले पत्रकारों की जान को खतरा हो सकता है.कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स की 42 पन्नों की इस विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रिपोर्टरों को काम के दौरान पूरी सुरक्षा अभी भी नहीं मिल पाती है.इसमें कहा गया, "1992 के बाद से भारत में 27 ऐसे मामलेदर्ज हुए हैं जब पत्रकारों का उनके काम के सिलसिले मेंक़त्ल किया गया. लेकिन किसी एक भी मामले में आरोपियों को सजा नहीं हो सकी है".रिपोर्ट के अनुसार इन 27 में 50% से ज़्यादा पत्रकारभ्रष्टाचार संबंधी मामलों पर खबरें करते थे.प्रेस फ्रीडम के नाम से भी जानी जाने वाली इस संस्था ने वर्ष 2011-2015 के बीच तीन भारतीय पत्रकारों - जागेंद्र सिंह, अक्षय सिंह और उमेश राजपूत की मृत्यु का ज़िक्र किया है.कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स की इस रिपोर्ट के पहले, वर्ष 2015 में प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया की एक स्टडी ने कहा था कि, 'पत्रकारों की हत्याओं के पीछे जिनका कथित हाथ होता है वे बिना सज़ा के बच कर निकल जाते हैं'.पीसीआई ने भारतीय संसद से देश में पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए एक नए क़ानून की भी मांग की थी.बहराल, सीपीजे यानी कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स की ताज़ा रिपोर्ट में तीन पत्रकारों की मृत्यु का ख़ासज़िक्र किया गया ह1. अक्षय सिंह : एक निजी टीवी चैनल के रिपोर्टर अक्षय सिंह मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले की जांच कर रहे थे. मडिकल कॉलेज दाखिलों में कथित धांधलियों और फ़र्जीडिग्री वाले इस घोटाले में कई बड़े नेता और अफसरों के खिलाफ सीबीआई जांच जारी है. अक्षय और उनकी टीम मध्य प्रदेश में एक ऐसे व्यक्ति का इंटरव्यू कर लौट रहे थे जिसकी बेटी की संदिग्ध अवस्था में मृत्यु हुई थी. एकाएक अक्षय की तबीयत खराब हुई और आकस्मिक मृत्यु हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पड़ने से हुई थी.🖌2. जागेंद्र सिंह: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में स्थानीय पत्रकार जागेंद्र सिंह की मृत्यु अभी तक पहेली बनी हुई है. जागेंद्र ने फ़ेसबुक पर प्रदेश के एक मंत्री के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ रखी थी और उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे. उनके परिवार वालों का दावा था कि कई कथित धमकियों के बाद स्थानीय पुलिस ने जागेंद्र के घर पर छापा मारा था जबकि प्रशासनके अनुसार ये सब कुछ जांच का हिस्सा था. हालांकि जागेंद्र ने 8 जून को अपनी मौत से पहले अपने बयान में कहा कि उन्हें पुलिस ने मारा पीटा और उनको आग लगा दी. जागेंद्र का आखिरी बयान था, "मुझे पुलिस वालों ने मारा-पीटा और आग लगा दी. मुझे गिरफ्तार कर लेते, लेकिन मारा क्यों, तेल क्यों छिड़का.🖌"3. उमेश राजपूत: वर्ष 2011 की शुरुआत में छत्तीसगढ़ में रायपुर से लगभग सौ किलोमीटर दूर छुरा इलाके में नईदुनिया के लिए काम करने वाले उमेश राजपूत देर रात काम से अपने घर लौट रहे थे कि उनके घर के पास पहले से घात लगाकर बैठे अपराधियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी.बताया जाता है कि उमेश मेडिकल लापरवाही के कुछ मामलों की खबर जुटाने में लगे थे और उनेक परिवार का दावा था किधमकियाँ मिलने के बाद उन्हें निशाना बनाया गया.🖌
4.महिला पत्रकार,चाँदनी गुप्ता लखनऊ, के घर डकैती, मारपीट, रिपोट दर्ज, आरोपी खुले आम घूम रहे,,5.रुखसार, शाहजहाँपुर के साथ समाचार संकलन के दौरान बद्तमीजी, छिना झपटी,मारपीट, रपट तक नही लिखी पुलिस वाले उलटे उस परही मामला दर्ज करने की बन्दर घुड़की,, स्वस्थ कर्मी आज भी वसूली में मस्त,,इसके अलावा आये दिन पूरे देश में पत्रकार उत्पीड़न होता रहता है,पत्रकार समाज का आइना,जो सच दिखाता है, उस पर अत्याचार क्यों,,

जानिए क्यों फांसी की सजा बोलने के बाद जज तोड़ देते है उस पेन की निब

भारत में फांसी की सज़ा को काफी ‘Rarest of
Rare’ केस माना जाता है और इसे प्राय: दिया भीनहीं जाता है. हालांकि जब भी फांसी की सज़ाहोती है, जज फैसला सुनाने के बाद कोर्ट रूम छोड़तेसमय जिस पेन से फैसले को लिखा गया है, उस पेन कीनिब को तोड़ देते हैं. पेन की निब तोड़ना अभी भीएक अबूझ और अद्भुत पहेली है, जिसे कोई नहीं सुलझापाया है. आखिर ऐसा जज क्यों करते हैं, यह सवालआज भी आम लोगों के मन में बना हुआ   है. लेकिनआपके हर सवाल का जवाब है यहां.
दरअसल, पेन की निब तोड़ना एक सिम्बॉलिक एक्टहै. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किसी व्यक्ति केजीवन के फैसले को जिस पेन से लिख दिया जाता है,उस पेन का दुबारा कभी फिर से प्रयोग न हो. साथ ही ऐसी उम्मीद की जाती है कि कोई भी व्यक्तिइस तरह के जघन्य अपराध न करे. हमारे कानून में फांसी की सज़ा सबसे बड़ी सज़ा होती है, क्योंकि इससे व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है.इसलिए जज इससज़ा को मुकर्रर करने के बाद पेन कीनिब तोड़ देते हैं, ताकि उस पेन का इस्तेमाल दोबारान हो सके.सैद्धांतिक तौर पर, Death Sentence किसी भीजघन्य अपराध क मुकदमों के लिए समझौते का अंतिमएक्शन होता है, जिसे किसी भी अन्य प्रक्रियाद्वारा बदला नहीं जा सकता. जब फैसले में पेन सेDeath” लिख दिया जाता है, तो इसी क्रम में पेनकी निब को तोड़ दिया जाता है, ताकि इंसान केसाथ-साथ पेन की भी मौत हो जाए. अकसर यह भीमाना जाता है कि शायद फैसले से अपने आप कोअलग रखने या फैसले को लेकर होने वाले प्रायश्चितया अपराधबोध को लेकर जज पेन की निब तोड़ देतेहैं. एक बार फैसला लिख दिये जाने और निब तोड़दिये जाने के बाद खुद जज को भी यह यह अधिकारनहीं होता कि उस जजमेंट की समीक्षा कर सके याउस फैसले को बदल सके या पुनर्विचार की कोशिश कर सके.
शिवेंद्र बदायूं