Tuesday, January 31, 2017

केंद्रीय मंत्री ने कहा पत्रकारों को डायन रोष व्याप्त

मोतिहारी मे केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह द्वारा पत्रकारों को डायन कहने को लेकर वहाँ के पत्रकारों ने रविवार को उनके कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया है.हम चम्पारण के इन पत्रकारों के जज्बे को सलाम करते है !इंडियन जर्नलिस्ट असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राम नाथ विद्रोही प्रदेश मुख्य महासचिव दयानंद भारती ने केंद्रीय मंत्री के इस.बयान की भर्त्सना करते हुये कहा है की मंत्री को इस तरह की शव्दो की इस्तेमाल कर पत्रकारों को जलील करने की कोशिश की गयी है.जो बर्दाश्त करने योग्य नही है.मंत्री को इसके लिये माफी मांगनी चाहिये !असोसिएशन पूरी घटना की विवरण की प्रतीक्षा मे है.मिलते ही पीएम और.प्रेस कौंसिल को भेजकर  कारवाई की माँग करेगी !

इंजीनियर इमरान का नामांकन रदद् होना राजनितिक साजिश-हाजी अमीर

नोएडा विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी इमरान नम्बरदार हलदौनी ने आज नामांकन रद्द हो जाने की परिस्थितियों पर आज चुनाव कार्यालय हलदौनी ग्रेटर नोएडा पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और उक्त सन्दर्भ में की गई कार्यवाहीयों से साथियों को अवगत कराया बैठक की अध्यक्षता करते हुए हाजी डॉ फ़ैसल ने कहा कि समाज के लोगो द्वारा घोषित प्रत्याशी इमरान हलदौनी किसानों, मजदूरों, गरीब तवकों के प्रभावशाली नेता है और मजदूर-किसान महिलाओं, असहाय गरीबों के साथ क्षेत्र में कही भी कोई घटना या अन्याय हुआ तो जुल्म और अन्याय के खिलाफ सबसे पहले खड़े होने वाले व्यक्ति है। यही कारण था की उन्हें क्षेत्र की आम गरीब जनमानस का व्यापक सर्मथन मिल रहा था उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर यहां के बडे उद्योगपतियों व सत्ताधारी पार्टीयों के नेताओं ने प्रशासन के साथ गठजोड़ कर राजनीतिक साजिश के तहत इमरान हलदौनी का नामांकन रद्द कराया है क्योंकि इन लोगों को डर सताने लगा था कि कही अगर समाजसेवी नेता विधायक बन गया तो नोएडा के हालात व परिस्थितियों में जबरदस्त बदलाव हो जायेगा जात-पात की राजनीति ख़त्म हो जायेगी और गरीब मेहनतकशों की आवाज बुलन्द हो जायेगी इसी सोच के तहत एक बिन्दु को आधार बनाकर नामांकन रद्द कर दिया गया जबकि बड़ी पार्टी के नेताओं के पर्चे को अधिकारी घर जाकर ठीक करते हैं और एक आज़ाद उम्मीदवार का पर्चा कैसिल कर दिया जाता है कया ये ही लोकतंत्र है?जबकि अनेकों -अनेक अपराधी व माफिया आज विधायक, सासंद व मंत्री बने बैठे है उनके लिए कोई कानून नहीं है लेकिन जो गरीब -मजदूर किसानों के हक अधिकारों के लिए आवाज उठायेगा उसी पर सभी तरह के कानून लागू होगें। यही पूंजीवादी व्यवस्था का नियम है। उन्होंने कहा कि यह घोर अन्याय है इसके खिलाफ हमें मजबूती के साथ लड़ने की जरूरत है नोएडा विधानसभा प्रत्याशी इमरान हलदौनी  ने कहा कि उन्होने सभी समर्थको के फैसले के आधार पर नामांकन बहाली के लिए उच्च न्यायालय मे जाने का फ़ैसला किया है और मुझे न्याय प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है यदि किन्ही कारणों से उच्च न्यायालय निर्वाचन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करती है तो चुनाव वाद वे उक्त पर रिट पटीशन डालगें  और जब तक न्याय नहीं मिलेगा वे मजबूती के साथ लड़ते रहेगें साथ ही उन्होंने कहा कि नोएडा विधानसभा में इस बार जिस तरीके से बड़े पैमाने पर नामांकन खारिज किये गये है ऐसा कभी नही हुआ है मुशकिल से एक दो नामांकन रद्द होते थे लेकिन इस बार नोएडा सीट पर 31 उम्मीदवारों में से 17 नामंकन खारिज होना अपने आप में ही संदिग्ध है। बैठक मे जितेन्द्र भाटी सालारपुर,राहुल त्यागी,राजू रिज़वान एडवोकेट,अन्नू एडवोकेट ,सद्दाम नम्बरदार मुकममिल नम्बरदार ,मारुफ चौधरी,अनस खान दीपक राघव ,राहुल नम्बरदार ,डॉ राशिद ,राहुल खान ,नौशाद,धर्मेन्द्र ,महाराज,रियाज़,रिज़वान इंजीनियर ,महताब ,सबीब,नदीम ,नईम,फराइम,
सलीम,नरेन्दर,ज़ुबैर,पोली,जाहिद ,कययूम आदि उपस्थित रहे

हाजी डॉ अमीर फ़ैसल
हल्दौनी

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर मंडराते साजिश के बादल

आर.के.श्रीवास्तव

सिंगरौली। आज हम स्वतन्त्र भारत की कानूनी आजादी का जश्र मना रहे हैं। कानून बनने, उसमें समय समय पर परिवर्तन होने तथा उसके क्रियान्वयन को लेकर भारतीय लोकतंत्र आज कटघरे में है। कानून बनाने तथा परिवर्तन के सवाल पर भारतीय लोकतंत्र की संसद बाधित हो जाती है। सत्र निकल जाते हैं, निर्णय नहीं निकल पाता। देश के ग्रामीण, कस्बाई तथा सघन शहरी क्षेत्रों में काूनन को लागू करने तथा उसके साथ खिलवाड़ करने के हवाले मिलते रहते हैं। पत्रकारिता को भारतीय संविधान का संवाहक कहा जा सकता है। सरकार की नीतियों पर पैनी नजर रखना और शासन प्रशासन जैसी एजेन्सियों की मीन मेख निकालने से लेकर कानून पालन करने की बात जन-जन तक पहुंचाने के दायित्व का निर्वहन पत्रकारिता ने किया है। जब देश गुलाम था, तब अंग्रेजों की नीतियों के खिलाफ जेहाद कायम करने तथा पत्रकारिता में ेेेआत्मोत्सर्ग करने का काम भी पत्रकारिता ने कर दिखाया है, इसका गौरवपूर्ण इतिहास भी रहा है। आज जब देश गणतंत्र का जश्र मना रहा हो तो पत्रकारिता जैसे गणतंत्र के चौथे खम्भे पर चर्चा करना लाजिमी लगता है।
आज वह समय आ गया है, जब देश के पत्रकारों को आत्मदर्शन की जरूरत है। पत्रकारों को शासन प्रशासन का चमचा बनकर रखने का समय खत्म हो चुका है। पत्रकारों के सम्मुख आज पेड न्यूज, फेक न्यूज, सोशल मीडिया पर बवाल बचा है। पत्रकारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार पर मीडिया की खरीद बिक्री पर विवाद मचा हो तो पत्रकारिता का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है। भारत ही नहीं अमेरिका जैसे देश में भी पत्रकारिता पर काले बादल मंडरा रहे हैं। यदि ऐसे समय में पत्रकारों ने सही दिशा की तरफ रूख करके अपनी कमर नहीं कसी तो लोकतंत्र में राजतंत्र की हवा बहते देर नहीं लगेगी। सरकार का तुगलकी फरमानलोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर काले बादलों की चर्चा औचित्यपूर्ण है। ढाई वर्षों से देश के केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्तारूढ़ है। हालांकि यूपीए के शासन काल में ही पत्रकारिता की स्वायत्तता पर सवाल उठने शुरू हो गये थे लेकिन सवालों को अब अस्तित्व में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। केन्द्र की मोदी सरकार में अरूण जेटली नाम के एक केन्द्रीय मंत्री हैं। गत् दिनों इनके पास सूचना मन्त्रालय भी था। बताते चलें कि अरूण जेटली चुनाव जीतकर सांसद में नहीं पहुंचे हैं, इसलिए शायद उन्हेें जनता की तकलीफों तथा भावनाओं का अहसास नहीं है। बहरहाल उनके ही कार्यकाल में सरकार के इस मंत्रालय ने प्वाइंट सिस्टेम पालिशी का निर्माण किया। देश के छोटे, मझोले अखबारों पर इसका भयंकर प्रतिकूल असर पड़ा। सरकार ने डी.ए.वी.पी. नामक एजेंसी के मार्फत देश के प्रकाशकों को प्वाइंट सिस्टेम पालिसी से प्रतिबन्धित करने का काम किया। प्वाइंन्ट सिस्टेम पालिसी में सरकार ने जो प्रतिबन्ध बनाये वे देश की ग्रामीण, आन्चलिक पत्रकारिता पर भारी पड़े। कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वे प्रतिबन्ध असंवैधानिक थे। सरकार इस पालिसी के तहत उन्हीं समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापनों का लाभ देगी जो उन प्रतिमानों, मापदण्डों को पूरा करते हैं। पालिसी में स्वयं का प्रेस, आर.एन.आई., ए.बी.सी. की प्रसार सनद, ई.पी.एफ. के नम्बर, कम से कम आठ पेज की संख्या, मात्र तीन समाचार एजेन्सियों की सेवाएं लेने की प्रतिबद्धता शामिल है। सरकार ने प्वाइंट सिस्टेम पालिसी पर नम्बर रखे और कम से ४५ अंक पाने वालों को ही विज्ञापन की आर्हता में शामिल करने की तुलगकी घोषणा की गयी। फरमान की व्यावहारिकता को बिना परखे जारी कर दिया गया। यानि देश के किसी ग्रामीण अंचल से चार-छ: पेज का दैनिक अखबार छापने वाले की विश्वसनीयता खत्म कर दी गयी। देश के चार्टरएकाउन्टेन्टों को भी कटघरे में रखा गया। पत्रकार को यदि अखबार छापना है तो उसे प्रेस का मालिक बनना पड़ेगा। देश के ग्रामीण अंचलों, जिलों से छपने वाले छोटे-मझोले समाचार पत्र के मालिकों को लाखों रूपये की मशीन खरीदकर तकनीकी कर्मचारियों को नौकरी देना पड़ेगा। चाहे प्रकाशक ईपीएफ की श्रेणी में आता हो या नहीं उसे कर्मचारियों का ईपीएफ नम्बर लेना होगा। हिन्दुस्तान समाचार, पीटीआई, जैसी सरकार न्यूज एजेन्सियों को हायर करना पड़ेगा। यानि सरकार छोटे-मझोले समाचार पत्रों को बन्द करना चाहती है? सरकार का मानना है कि पत्रकारिता में भ्रष्टाचार ब्याप्त है। भ्रष्टाचार के सवाल तो संसद पर भी उठे हैं तो क्या जांच के बजाय देश की संसद को बन्द कर देना लाजिमी होगा? पत्रकारों की जेहन में अब लोकतंत्र के लिए ऐसे सवाल भी आने लगे हैं।
भय के साये में पत्रकारिता
अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति ओबामा कहते हैं कि देश को पत्रकारों की जरूरत है। अमेरिका के राष्ट्रपति टं्रप जब देश के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने जा रहे हंै तो उनकी इच्छा है कि पत्रकार उनके विचारों को उसी तरह टाइप करें, क्रीटीसाइज न करें। टं्रप सरकार पत्रकारों के प्रति असहज हैं उन्हें डराने का काम किया जा रहा है। दिल्ली की सरकार भी प्वाइंट सिस्टेम पालिसी के मार्फत पत्रकारों को डराने का काम कर रही है। आज तो पुलिस थाने में बैठा थानेदार भी सवाली पत्रकारों को पसन्द नहीं करता। मन्त्रियों की, सरकार की चाहत होती है कि पत्रकार उनसे कड़े सवाल न पूछे। पत्रकार शासन, सरकार का चमचा बन कर रहे। देश के बुद्धिजीवी वर्ग में धारणा पनप चुकी है कि मीडिया सरकार से डर गयी है, या सरकार मीडिया को डरा रही है। अमुक चैनल बिक गया है। अमुक पत्रकार चमचा है। पत्रकारों पर सवाल उठ रहे हैं कि वह सरकार से सवाल पूछने पर डरता है और जो सवाल करते हैं उनको सरकार निशाना बनाती है। खबरों की विश्वसनीयता
आज गणतंत्र दिवस के जश्र पर मीडिया को पुनर्विचार के लिए तैयार होना है। सोशल मीडिया के चलन से सही खबरों पर फेक न्यूज बन रहे हैं। सरकार में बैठे लोगों की शह पर भी सोशल मीडिया पर प्रचार किये जा रहे है। फेक न्यूज मीडिया को तितर-बितर कर रहा है। ऐसे में इसकी तथ्यपरक जांच जरूरी है। राजनीतिक संगठनों द्वारा सोशल मीडिया पर फेक न्यूज बनाकर प्रसारित किये जा रहे है। देश में कभी मीडिया की धीमी गति का जमाना होता था। आज समाचार सेकेन्डों में चल रहे हैं। जरा सी निगाह हटी, समाचार पार हो गयी। इसके समाचारों में गहराई का अभाव हो गया है खोज, विश्लेषण आंकड़े आज अहमियत नहीं रखते जिससे समाचारों में गम्भीरता का अभाव हो गया है। हम उस तरह के स्लो न्यूज की बात नहीं कर रहे जिसमें आज की खबरें परसो मिलती हों, हमारा तात्पर्य समाचारों में जांच परख से सम्बन्धित है। देश समाज के बदलते परिवेश ने पत्रकारिता को प्रभावित किया है। सोशल मीडिया के प्रचनल से विश्वसनीयता के सवाल उठ रहे हंै। सरकार नीति की आड़ में छोटे-मझोले अखबरों के विज्ञपन रोक रहीं है। प्राइवेट विज्ञापनों के भरोसे अखबार छापने में पेड़ न्यूज को प्रोत्साहन मिलेगा। ऐसे में पत्रकारिता के चरित्र पर गम्भीर सवाल उठेंगे। सरकार पत्रकार संगठनों से मिलने से कतरा रही है। उनकी समस्या को अनसुना किया जा रहा है। पत्रकार संगठन आन्दोलन की राह पर है। कोर्ट की शरण लेने पर विवश है। वर्तमान परिवेश पत्रकारिता को पुन: पारिभाषित करने के लिए तैयार है।
अमेरिका में मीडिया ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र
आदरणीय निर्वाचित राष्ट्रपति जी, आपके कार्यकाल के शुरू होने के अंतिम दिनों में हमने अभी ही साफ कर देना सही समझा कि हम आपके प्रशासन और अमेरिकी प्रेस के रिश्तों को कैसे देखते हैं। हम मानते हैं कि दोनों के रिश्तों में तनाव है। रिपोर्ट बताती है कि आपके प्रेस सचिव व्हाईट हाउस से मीडिया के दफ्तरों को बंद करने की सोच रहे हैं। आपने ख़ुद को कवर करने से कई न्यूज़ संगठनों को बैन किया है। आपने ट्विटर पर नाम लेकर पत्रकारों पर ताने कसे हैं, धमकाया है। अपने समर्थकों को भी ऐसा करने के लिए कहा है। आपने एक रिपोर्टर का यह कहकर मज़ाक उड़ाया है कि उसकी बातें इसलिए अच्छी नहीं लगी कि वह विकलांग है।हमारा संविधान प्रेस की आज़ादी का संरक्षक है। उसमें कहीं नहीं लिखा है कि राष्ट्रपति कब प्रेस कांफ्रेंस करें और प्रेस का सम्मान करें। प्रेस से संबंध रखने के नियम आपके होंगे। हमारा भी यही अधिकार है क्योंकि टीवी और अखबार में वो जगह हमारी है जहां आप प्रभावित करने का प्रयास करेंगे। वहां आप नहीं, हम तय करते हैं कि पाठक, श्रोता या दर्शक के लिए क्या अच्छा रहेगा। अपने प्रशासन तक रिपोर्टर की पहुंच समाप्त कर ग़लती करेंगे। हम सूचना हासिल करने के तरह तरह के रास्ते खोजने में माहिर हैं। आपने अपने अभियान के दौरान जिन न्यूज़ संगठनों को बैन किया था उनकी कई रिपोर्ट बेहतरीन रही है।हम इस चुनौती को स्वीकार करते हैं। पत्रकारिता के नियम हमारे हैं, आपके नहीं हैं। हम चाहें तो आपके अधिकारियों से ऑफ द रिकॉर्ड बात करें या न करें। हम चाहें तो ऑफ द रिकॉर्ड ब्रीफिंग में आयें न आयें। अगर आप यह सोचते हैं कि रिपोर्टर को चुप करा देने या भगा देने से स्टोरी नहीं मिलेगी तो ग़लत हैं। हम आपका पक्ष लेने का प्रयास करेंगे। लेकिन हम सच्चाई को तोडऩे मरोडऩे वालों को जगह नहीं देंगे। वे जब भी ऐसा करेंगे हम उन्हें भगा देंगे। यह हमारा अधिकार है। हम आपके झूठ को नहीं दोहरायेंगे। आपकी बात छापेंगे लेकिन सच्चाई का पता करेंगे।आप और आपका स्टाफ व्हाइट हाउस में बैठा रहे, लेकिन अमेरिकी सरकार काफी फैली हुई है। हम सरकार के चारों तरफ अपने रिपोर्टर तैनात कर देंगे। आपकी एजेंसियों में घुसा देंगे और नौकरशाहों से ख़बरें निकाल लायेंगे। हो सकता है कि आप अपने प्रशासनिक इमारत से आने वाली खबरों को रोक लें लेकिन हम आपकी नीतियों की समीक्षा करके दिखा देंगे। हम अपने लिए पहले से कहीं ज्यादा ऊंचे मानक कायम करेंगे। हम आपको इसका श्रेय देते हैं कि आपने मीडिया की गिरती साख को उभारा है। हमारे लिए भी यह जागने का समय है। हमें भी भरोसा हासिल करना होगा। हम इसे सही, साहसिक रिपोर्टिंग से हासिल कर लेंगे। अपनी गलतियों को मानेंगे और पेशेवर नैतिकता का पालन करेंगे।ज़्यादा से ज़्यादा आप आठ साल ही राष्ट्रपति के पद पर रह सकते हैं लेकिन हम तो तब से हैं जब से अमेरिकी गणतंत्र की स्थापना हुई है। इस महान लोकतंत्र में हमारी भूमिका हर दौर में सराही गई है। तलाशी गई है। आपने हमें मजबूर किया है कि हम अपने बारे में फिर से यह बुनियादी सवाल करें कि हम कौन हैं। हम किसलिए यहां हैं। हम आपके आभारी हैं। अपने कार्यकाल के आरंभ का लुत्फ उठाइये। आज जो अमेरिका में होने जा रहा है। उसका शुभारंभ मोदी सरकार ने कर दिया है। पत्रकारों को अखबार बचाओ मंच जैसे संगठन बनाने पर विवश होना पड़ रहा है।

इंदर गढ़ में ओवर लोडिंग कई वाहन सीज

कन्नौज से पवन कुशवाह के साथ दर्शन राजपूत की खबर

कन्नौज के इंदरगढ़ थाने मे
आचार संहिता के चलते आज  थाने के पास से गुजर रहे ओवर लोडिग ईटो से भरे हुए दो टैक्टर व दो डीसियम एआर टीओ द्वारा सीज कर इन्दरगढ़ थाने में खड़ा कर अभियोग पंजीकृत कराया कस्वे ओवर लोडिंग के चलते दिन में कई वार जाम जैसे हालातो का  सामना करना पड़ता है इससे आम जनता को वहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है आचार सहिंता लगते ही पुलिस ने अपने तेवर किये सख्त जिससे  अपराधियो मे दहशत का माहोल बना हुआ है खास कर वाहन स्वामिओ मे जगह जगह बाहनों की चेकिंग हो रही है जिससे कोई भी इधर से उधर पत्ता भी नही हिला सकता है

कन्नौज में राजनैतिक दल उड़ा रहे धज्जियां

कन्नौज से पवन कुशवाहा के साथ विमलेश कुशवाहा की खबर

मुख्य चुनाव आयुक्त के दिशा निर्देशों के बावजूद भी जनपद मे कई जगह पर प्रत्याशियो की होर्डिंग्स व बैनर लगे है जो आदर्श आचार सहिंता को मुंह चिड़ा रहे है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण जीटी रोड गुरसहायगंज पश्चिमी वाईपास से इदुयागंज मार्ग के पास वनी गोदाम में आज भी लिखा है प्रत्याशियो के वाल पेटिंग चुनाव प्रचार दीवारों पर राजनैतिक  दलो व प्रत्याशियो की वाल पेटिंग से अभी भी साफ नही किया गया जब की पहले चुनाव में धनबल और बाहुवल का डंका बजता था अधिकारी भी कर रहे हैँ ढीला हवाली कई दिनों चला अभियान फिर भी अभी भी कई जगह दिखाई पड रहा है प्रत्याशियो का प्रचार प्रसार

जब लोग आपकी कापी करने लगे तो समझना आप कामियाबी के नजदीक है

30 प्रेरणादायिक सुविचार जो किसी कि जिंदगी बदल सकता है। जिसने भी यह कलेक्शन किया होगा वह भी काबीले तारीफ है।
Quote 1 .जब लोग आपको Copyकरने लगें तो समझ लेना जिंदगी में Successहो रहे हों.
Quoted 2 .कमाओ…कमाते रहो और तब तक कमाओ, जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे.Quote 3 . जिस व्यक्ति का लालच खत्म, उसकी तरक्की भी खत्म.
Quote 4 . यदि Plan A”काम नही कर रहा, तो कोई बात नही 25और Lettersबचे हैं उन पर *Try* करों.
Quote 5 .* जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की.Quote 6 .* भीड़ हौंसला तो देती हैं लेकिन पहचान छिन लेती हैं.
Quote 7 . अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती हैं.Quote 8 .* कोई भी महान व्यक्ति अवसरों की कमी के बारे में शिकायत नहीं करता.
Quote 9 .महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है.
Quote 10 .* जिस चीज में आपका *Interest* हैं उसे करने का कोई टाईम फिक्स नही होता. चाहे रात के *1* ही क्यों न बजे हो.
Quote 11 .* अगर आप चाहते हैं कि, कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये.
Quote 12 .* सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते.
Quote 13 .* जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं.
Quote 14 .* जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी.
Quote 15 .* यदि लोग आपके लक्ष्य पर *हंस* नहीं रहे हैं तो समझो *आपका लक्ष्य बहुत छोटा हैं.*
Quote 16 .* विफलता के बारे में चिंता मत करो, आपको बस एक बार ही सही होना हैं.
Quote 17 .* सबकुछ कुछ नहीं से शुरू हुआ था.
Quote 18 .* हुनर तो सब में होता हैं फर्क बस इतना होता हैं किसी का *छिप* जाता हैं तो किसी का *छप* जाता हैं.
Quote 19 .* दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं कि आपको सुनने की लोग मिन्नत करें.
Quote 20 .* अच्छे काम करते रहिये चाहे लोग तारीफ करें या न करें आधी से ज्यादा दुनिया सोती रहती है ‘सूरज’ फिर भी उगता हैं.
Quote 21 .* पहचान से मिला काम थोडे बहुत समय के लिए रहता हैं लेकिन काम से मिली पहचान उम्रभर रहती हैं.
Quote 22 .* जिंदगी अगर अपने हिसाब से जीनी हैं तो कभी किसी के *फैन* मत बनो.
Quote 23 .* जब गलती अपनी हो तो हमसे बडा कोई वकील नही जब गलती दूसरो की हो तो हमसे बडा कोई जज नही.
Quote 24 .* आपका खुश रहना ही आपका बुरा चाहने वालो के लिए सबसे बडी सजा हैं.
Quote 25 .* कोशिश करना न छोड़े, गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल सकती हैं.
Quote 26 .* इंतजार करना बंद करो, क्योकिं सही समय कभी नही आता.
Quote 27 .* जिस दिन आपके *Sign #Autograph* में बदल जाएंगे, उस दिन आप *बड़े आदमी बन जाओगें.*
Quote 28 .* काम इतनी शांति से करो कि सफलता शोर मचा दे.
Quote 29 .* तब तक पैसे कमाओ जब तक तुम्हारा बैंक बैलेंस तुम्हारे फोन नंबर की तरह न दिखने लगें.
Quote 30 .* *अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे तो जीतने वाला भी जीत की खुशी खो देता हैं. ये हैं मुस्कान की ताकत....
शैलेन्र्द सिंह तोमर
7828158919

Monday, January 30, 2017

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती

जोधपुर मारवाड़ राजपूत सभा की बैठक शनिवार को पावटा बी रोड स्थित सभा भवन में हुई बैठक में पदमावती फि ल्म से सम्बंधित घटना पर विचार विमर्श कर विरोध जताया गया।समाज विरोध करेगाबैठक में यह निर्णय लिया गया कि फिल्म से यदि वास्तविक एेतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया तो सम्पूर्ण मारवाड़ राजपूत समाज पुरजोर विरोध करेगा। यह समस्त क्षत्रिय जाति की अस्मिता का प्रश्न है। इस अनैतिक घटना को लेकर क्षत्रिय समाज प्रशासन और फि ल्म निर्माण कम्पनी निर्देशक संजयलीला भंसाली फि ल्म व लेखक के विरुद्व इतिहास को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध जताया।समाज और इतिहासकार साथ साथसभा के अध्यक्ष हनुमानसिंह खांगटा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में नारायणसिंह माणकलाव, चक्रवर्तीसिंह जोजावर, इतिहासकार प्रोफेसर जहूर खां मेहर, डॉ. मनोहरसिंह राठौड़ ,साहित्यकार मनोहरसिंह बांकली, रामसिंह डांवरा, डॉ. विक्रमसिंह भाटी, डॉ.महेन्द्रसिंह तंवर व अरविन्दसिंह चारण सहित समाजजन उपस्थित थे। सभी इतिहासकारों ने फिल्म के प्रोमो में दर्शाए गए एेतिहासिक दृश्यों की कड़ी निन्दा की। आमजन को भी कड़ी ठेस पहुंची उन्होंने कहा कि इससे न केवल इतिहासविद्व साहित्यकार और क्षत्रिय समाज व चितौड़ के गौरवपूर्ण इतिहास से जुड़े हुए आमजन को भी कड़ी ठेस पहुंची है। सोमवार को घटनाक्रम के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा

योगेन्द्र प्रजापति

यूपी में दोनों युवा नेताओ की जोड़ी

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव मे एक नया मोड़ आही गया सपा से गठबंधन के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अखिलेश यादव पर पूरा भरोसा व्यक्त किया और लखनऊ में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की जिसमे अखिलेश यादव के साथ ही राहुल गांधी ने इस बार प्रदेश में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस की सरकार बनाने का भरोसा व्यक्त किया और प्रत्रकारों से कहा कि हम दोनों मिलकर तीन सौ से अधिक सीटें जीतकर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएंगे। लखनऊ में ताज होटल में आयोजित संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने माना की उत्तर प्रदेश में अगली सरकार उनके गठबंधन की ही बनेगी। दोनों नेता ने भरोसा जताया कि तीन सौ से अधिक सीट जीतकर हम सरकार बनाकर भाजपा को बाहर करेंगे।इसके साथ ही अखिलेश यादव ने कहा कि राहुल और हम विकास, खुशहाली के पहिए हैं, मिलकर प्रदेश को आगे बढ़ाएंगे। राहुल गांधी ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की शुरुआत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पहला शब्द उत्तर है। हमारा यह गठबंधन एक जवाब है। इतिहास में यूपी ने दुनिया को जवाब दिया है। 1857 में कंपनी राज था, यूपी की प्रोग्रेसिव सोच मिलीं और कंपनी राज का मिलकर जवाब दिया।राहुल गांधी ने कहा कि हम गुस्से की राजनीति, बांटने की राजनीति और कंपनी को हिन्दुस्तान का धन देने की राजनीति का जवाब दे रहे हैं. एक प्रकार से गंगा और यमुना का मिलन हो रहा है। राहुल ने कहा कि मोदी जी के शब्दों में ट्रिपल पी है, प्रोग्रेस, प्रॉस्पेरिटी और पीपुल्स। राहुल ने कहा कि मेरी अखिलेश के साथ जो व्यक्तिगत संबंध हैं, वह राजनीतिक तौर पर भी हो गया है।अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल जी का मैं स्वागत भी करता हूं। जहां से उन्होंने बात छोड़ी मैं वहीं से शुरू करता हूं। हम लोकसभा में साथ रहे। कई बार साथ काम करने का मौका मिला। हम एक दूसरे को जानते हैं, बड़ी बात यह है कि हमें अब साथ काम करने का मौका मिला है। आबादी के लिहाज से यूपी एक बड़ा प्रदेश है।