Wednesday, May 31, 2017

कल हिंदी पत्रकारिता दिवस था लोग बधाइयां दे रहे थे लेकिन

कल हिन्दी पत्रकारिता दिवस था इस अवसर पर पूरी दुनिया में विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन किये गये।लोकतंत्र में पत्रकारिता का महत्व बढ़ गया है और पूरी दुनिया पत्रकारिता से तमाम उम्मीदें लगाये बैठा है क्योंकि पत्रकारिता ने जहाँ अंग्रेजी सत्ता को उखाड़ फेंकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वहीं वर्तमान युग में भी लोकतंत्र की रक्षक बनी हुयी है।वर्तमान समय में पत्रकारिता का स्वरूप कुछ विकृत सा होने लगा है। मिशन माने जाने वाली हिन्दी पत्रकारिता आज विशुद्ध रूप से व्यवसायिक होती जा रही हैं।पत्रकारिता का स्वरूप व्यवसायिकता की इसी अंधी दौड़ के चलते अखबार एवं उससे जुड़े पत्रकारों को बौना बना दिया है।आज के बदलते परिवेश में अखबारों को अब कुशल पत्रकारों, लेखकों की नहीं बल्कि अच्छा व्यवसाय देने वाले प्रतिनिधियों की जरूरत है।इन परिस्थितियों मे पत्रकारिता जैसे पवित्र मिशन में गिरावट आना कोई बहुत अधिक ताजुब  नहीं है । पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ा व्यक्ति भी इसी समाज का अंग है और जब समाज में गिरावट आई है तो पत्रकारिता जगत इससे अछूता कैसे रह सकता है ? लेकिन यदि पत्र पत्रिकाओं के मालिकान अपनी धारणा में थोड़ा भी परिवर्तन कर लें तो पत्रकारिता के मूल्यों एवं मानदंडो को पुनः स्थापितत किया जा सकता है।आज के दौर में पत्रकारों को निरंतर शारीरिक , मानसिक और आर्थिक यातनाएं झेलनी पड़ रही है।स्वाधीनता के महायज्ञ में आहुति डालने मे  कलम रुपी हथियार के ताकत  के बल पर ही लोकमान्य तिलक से लेकर महात्मा गांधी तक सक्रिय राजनेता के साथ-साथ प्रखर पत्रकार के रूप में जनता के सामने आए तथा कलम के अन्य अनेक सिपाहियों के साथ मिलकर गुलामी की पीड़ा का सजीव वर्णन करके जनता के दिलों मे आजादी मे बगावत की भावना पैदा की गयी जिसके फलस्वरूप हमें आजादी मिल सकी। यह वह समय ऐसा था जबकि पत्रकारों को समाचार की तलाश के साथ ही अखबार बेचने तक का काम खुद करने पड़ता था। स्वयं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने समाचारपत्रों केसरी और मराठा के लिये टाइप राइटर अपनी पीठ पर ढोना पड़ता था। एक तरफ ऐसी विपरीत परिस्थितियां थी तो दूसरी तरफ खूंखार ब्रिटिश सरकार पत्रकारों की जुबान व कलम को रोकने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रही थी। उस समय की परिस्थितियों का आंकलन स्वराज पत्र से लिया जा सकता है जिसे एक विज्ञापन प्रकाशित करना पड़ा था कि "आवश्यकता है एक संपादक की जो वेतन के तौर पर जेल में जौ की एक रोटी और प्याले भर पानी से काम चला सके "। यह अतिशयोक्ति नहीं थी बल्कि ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों का ही परिणाम था कि इस पत्र की कुल ढाई साल की आयु में आठ संपादक ऐसे हुए जिन्हें सजा सुनाई गई थी।इसके बावजूद पत्रकारों ने आजादी की मशाल को रोशन करते रहे और जान की परवाह नहीं की। गांधी जी के हरिजन और यंग इंडिया तिलक के केसरी और मराठा कस्तूरी के हिंदू और गणेश शंकर विद्यार्थी के प्रताप जैसे अनेक हिन्दी अखबार ब्रिटिश सरकार के लिये सिरदर्द बन गये थे।अरविंद के वंदे मातरम की भाषा इतनी ओजस्वी तथा विचार इतने पैने थे कि उससे बरतानिया सरकार की नींव तक हिलने लगी थी । पंडित नेहरू जैसे वरिष्ठ नेता तक इन अखबारों के आने की बेसब्री से प्रतीक्षा किया करते थे। सैनिक के संस्थापक संपादक कृष्णदत्त पालीवाल को जब ब्रिटिश सत्ता ने गिरफ्तार कर लिया तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में देश की सेवा कर रहे विचार क्रांति के महानायक वेदमूर्ति युगदृष्टा और युग निर्माण के प्रणेता पंडित श्रीराम शर्मा को सैनिक अखबार के संपादन का उत्तरदायित्व संभालना पड़ा । नेशनल हेराल्ड के संपादक के रामाराव ने लिखा है था कि-" पहली पंक्ति में लड़ने वाले सिपाही के तौर पर 'सैनिक 'ने इतने प्रहारों एवं आघातों को सहन करने के बावजूद इस अखबार का जीवित रह जाना एक आश्चर्यजनक घटना है । इसके पीछे ऐसे ही योग्य और वीर थे  जिन्होंने कभी पराजय स्वीकार नहीं की।असलियत तो यह है कि उस दौर में पत्रकारों की वाणी व लेखनी ही नहीं बल्कि उनका सद्चरित्र जीवन लोगों को प्रेरित करता था । आज के दौर मे इसकी पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है।यह सही है कि आज की चुनौतियां और प्रलोभन फैला हुआ है और भविष्य का भारत गढ़ने वाले पत्रकारिता जगत के युवा सेनानियों को "आग के दरिया" से गुजरना पड़ रहा है। पत्रकारिता का लक्ष्य केवल वर्तमान को दोहरा देना ही समय की मांग है ।समाज के सम्मुख वर्तमान विसंगतियों से निपटने के तरीके भी प्रस्तुत करने होंगे। समाज का दर्द सामने लाने के साथ-साथ प्रेरणास्पद समाचारों को सुर्खियां बनाई जाएं न कि निगेटिव अपराधिक व अन्य समाचारों को सुर्खी बनाया जाय जिससे विकृत समाज को पुनः एक नयी दिशा मिल सके।आज की पत्रकारिता अखबार मालिकों की रखैल बनती जा रही है जो पत्रकारिता के माथे पर कलंक है।आज पत्रकारिता मे ऐसे तत्वों का समावेश हो रहा है जिनका लक्ष्य समाज सेवा एवं बेजुबानों की जुबान बनना नही बल्कि कमाई करना बनता जा रहा है।हिन्दी पत्रकारिता के गौरवमयी इतिहास को बनाये रखना हर पत्रकार का पुनीत दायित्व बनता है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात/ वँदेमातरम्/ गुडमार्निंग/ अदाब/ शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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                 भोलानाथ मिश्र
      वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी।
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एक नई यात्रा हुई प्रारम्भ जब मिले वो हमसे

मेरे जिस्म की मिट्टी
में एक बीज गिरा
प्रथम स्पंदन हुआ बीज का
मोह का धागा नाभि से जुड़ गया
एक यात्रा प्रारम्भ हुई
ओस सी भीगी हर सुबह
फूलों के रस में डूबा मेरा बदन
कच्चे गर्भ की उबकाइयाँ , मितलियाँ
कसती हुई छातियां
हर दिन अपने भीतर परिवर्तन का अद्भुत अहसास
पल -पल शहद से मीठे सपनों की ख़ुमारी
जीवन का हर खाली कोना
सपनों से भरता हुआ
अपने भीतर धड़कता हुआ ,
श्वास लेता एक जीवन
अंगों में उठती सिहरन
एक बवडंर उठता
लड़खड़ाते पैर थाम लेते कोई सहारा
दो नन्हे पैरों का स्पन्दन
मेरी उंगलियां उदर में सरकती
महसूस करती मीठी वेदना ...

रात्रि का दूसरा पहर
नींद कोसों दूर , बैचेनी , घबराहट
दुआ के लिए उठे थे हाथ
मेरे सूखे होंठ मुस्कुराये
और
कठोर प्रसव वेदना
पीड़ा और धैर्य का द्वन्द्व
अन्तत:
चिरतृप्ति का अहसास
एक नन्हे पौधे का जन्म
बीज से पेड़ बनने का
ये सफ़र मेरे मातृत्व का ....

दबंगो ने नाबालिका का अपहरण कर किया चार दिन तक दुष्कर्म

स्थानीय थाना क्षेत्र के घमहापुर गांव से एक नाबालिग लड़की को पड़ोसी गांव प्रतापपुर ( भर्थरा ) के ही युवक राजेन्द्र पुत्र स्वः शोभ नाथ ने अपहरण कर चार दिन तक अपने ही घर में बंधक बनाकर उसके साथ बलात्कार किया । लड़की के परिजनों ने अपने पुत्री को गायब होने की सूचना लोहता पुलिस को दी थी, लेकिन पुलिस ने सुचना दर्ज तक नही किया था। लड़की के परिजन अपने रिश्तेदारो व परिचितों के यहाँ पता लगाया ,लेकिन कोई पता नही चल सका । बीती रात गांव के किसी एक ब्यक्ति ने लड़की होने की सूचना पडोस के घर में बताई , तो लड़की के परिजनों व गांव वालो में हड़कम्प मच गया । परिजनों ने इसकी सूचना गांव के पूर्व प्रधान हंस लाल साहनी व भाजपा नेता छोटे लाल पटेल को दी , ततपश्चात पुलिस को सूचना 100 नम्बर पर दी , उसी दौरान स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुची, पुलिस ने रात 12:00 बजे आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार किया, आरोपी के घर से बरामद लड़की को परिजनों को सौप दिया। और आरोपी लड़के को पकड़ कर थाने लायी ।
बीती रात से सोमवार दोपहर  तक पुलिस मामले की लीपापोती में लगी रही । ग्रामीणों के दबाव में सोमवार को दोपहर बाद तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज किया ।
पुलिस की भूमिका से स्थानीय लोगो में काफी आक्रोश ब्याप्त है ।

जोबट विधायक ने आम लोगों को दिया आवास प्रमाणपत्र

दिनेश उपाध्याय जोबट

जोबट/ केन्द्र सरकार की प्रधान मंत्री आवास योजना एवं उज्वला योजना के अंतर्गत आज नगर में क्षेत्रीय विधायक माधव सिंह डावर ने आवास प्रमाण पत्र एवं गैस कनेक्शन टंकी चूला इत्यादि सामान लगभग दो सौ हितग्राहियों को वितरित किया .... इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष दिपक चौहान, उपाध्यक्ष किशोर राठौड, परिषद के पार्षदगण,भूतपूर्व नप अध्यक्ष रशीदा शैख,मंडल अध्यक्ष नरसिंह मोर्य,महामंत्री राकेश राठौड एवं अनुविभागीय अधिकारी सांकेत मालवीय प्रभारी नगर पंचायत अधिकारी अजमेर सिंह गौड़ तथा भाजपा के कई नेता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थिति थे! नगर पंचायत अध्यक्ष दिपक चौहान ने अपने स्वागत भाषण में बिते पांच साल की उपलब्धिया बताई! तथा भाजपा को जनता के लिये सोच रखने वाली पार्टी बताया!विधायक ने कहा की यह आवास योजना की पहली किस्त है आप इसी प्रकार अवसर देते रहो हम व हमारी सरकार सेवा करती रहेगी!भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने भी भाजपा को जनता के लिये सोच रखने वाली पार्टी बताया! भाजपा की इस सक्रियता को आने वाले नगर परिषद के चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है  .......?

नरेंद्र मोदी विचार मंच की बैठक में रामवीर कश्यप और मुनीश गुप्ता को मिली जिम्मेदारियां

बदायूँ -नरेन्द्र मोदी विचार मंच की बैठक आज नगर दातागंज में मुनीश गुप्ता के यहा आयोजित की गई जिसमे संगठन के प्रांतीय प्रवक्ता गोविंद सिंह राणा ब्रज प्रांत की उपस्थिति में जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने दातागंज विधानसभा  अध्यक्ष रामवीर सिंह कश्यप, नगर  अध्यक्ष मुनीश गुप्ता, तहसील  अध्यक्ष मनोज मिश्रा, मण्डल  अध्यक्ष संजीव सिंह चौहान दातागंज नियुक्त किया है वही प्रदीप गुप्ता मीडिया प्रभारी विधानसभा का दायित्व दिया गया है  इस मौके पर जिला  उपाध्यक्ष विवेक माहेश्वरी, संजीव कुमार सिंह, रमेश चन्द्र मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, साधू सिंह, विशाल श्रीवास्तव, विक्की, संजीव कुमार,  अनूप श्रीवास्तव सहित अन्य लोग उपस्थित थे

भारत भर में ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट ने बंद कर जताया विरोध

सहावर- ऑल इंडिया  आर्गेनाइजेशन  ऑफ केमिस्ट  एण्ड ड्रगिसटर ने आज शहर के सभी मेडिकल स्टोर बंद रखे संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने दवाओं की विक्री से सम्बंधित नियम बनाए है वो ठीक नही है  इनका हम विरोध करेंगे इसलिए सरकार हमारी भी सूने नियमों के खिलाफ  आज  एक दिवसीय  सभी मेडिकल बंद रखे है  इस मौके पर प्रबंधक परवेज मिर्जा  अध्यक्ष दिनेश कुमार प्रजापति महामंत्री कुलदीप सिंह, शाहिद  अली, फैजान खान, जितेंद्र सिंह अमित साहू, अनिल कुमार, हेमंत कुमार सुरेश, राहुल, महेश सहित अन्य लोग उपस्थित थे

रोडवेज बस से कुचलकर गर्भवती महिला की दर्दनाक मौत

शाहजहांपुर के सदर बाजार थाना क्षेत्र मे रोडवेज की अनुबंधित बस से कुचलकर गर्भवती महिला की मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

जनपद के बंडा थाना क्षेत्र के ग्राम बरगदा निवासी धर्मवीर की 30 वर्षीय पत्नी सुमन देवी सदर बाजार थाना क्षेत्र के ग्राम शहबाजनगर स्थित अपने मायके आई हुई थी। मंगलवार की दुपहर सुमन देवी मार्किट से खरीदारी कर अपने पिता सुरेश और मां के साथ वाइक से वापस शहबाजनगर जा रहे थे। जैसे ही बाइक कचहरी ओवर ब्रिज के पास पहुँची की तभी पीछे से आ रही तेज रफ़्तार रोडवेज की अनुबंधित बस ने वाइक में टक्कर मार दी।टक्कर लगते ही सुमन देवी उछाल कर सड़क पर गिर गई और बस के पहिए के नीचे आ गई। बस चालक बस को लेकर मौके से फरार हो गया।परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी। काफी देर तक एंबुलेंस के ना पहुचने पर परिजन सुमन देवी को टेंपो से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने सुमन देवी को मृत घोषित कर दिया। मृतका के भाई पंकज ने बताया कि उसकी बहन 8 माह की गर्भवती थी तथा हादसे में बहन के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

अमित कुमार शर्मा

Tuesday, May 30, 2017

जम्मू कश्मीर के हालात पर विशेष रिपोर्ट भोला नाथ मिश्रा की कलम से

आजादी के समय से ही हम काश्मीर की समस्या को हम आस्तीन के सापँ की तरह पाल रहे हैं।आजादी के बाद से ही हम अलगाववादी काश्मीरियों को भूला भटका मानकर उन्हें प्यार से समझाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन हमारी भाषा शैली शायद उनकी समझ नहीं आ रही है।कहते कि सुबह का भूला अगर शाम तक घर वापस लौट आता है तो उसे भूला नहीं कहा जाता है।आजादी के बाद से ही भूले भटकों को वापस लाकर मुख्य धारा में शामिल करने की कोशिश हो रही है।इसके बावजूद जिन्हें हम भूला भटका कहते हैं वह बराबर भटकते ही जा रहे हैं और वापस नहीं लौट रहे हैं।वह बराबर अपने घरों व मस्जिदों मे आँतकवादियो को पनाह दे रहे हैं और आँतकी गतिविधियों को गति प्रदान कर रहे हैं।घाटी मे आँतकी जब किसी बेगुनाह की हत्या कर देते हैं तो कोई कुछ नहीं बोलता है लेकिन जब सुरक्षा बलों के हाथों कोई आँतकी मार दिया जाता है तो उसके विरोध में हमारे सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके जाते हैं।हम बाहरी आँतकवादियो से तो निपट लेते हैं लेकिन जब काश्मीरियों से निपटने की बात है तो हम उन्हें अपना भटका हुआ मानकर रहम कर जाते हैं। भारत के खिलाफ नारेबाजी करने वाले भारतीय झँडे को जलाकर अपमानित करने वाले तथा भारतीय सेना पर हमला करने वाले देश के दोस्त नहीं बल्कि दुश्मन होते हैं।इन्हें भूला भटका मानकर इनके साथ हमदर्दी करने करने का समय समाप्त हो गया है।अब सेना के हाथ पैर बाँधने का समय नही है बल्कि अब समय आ गया है कि घाटी में सेना के बँधे हाथ को खोलकर राष्ट्र हित मे कार्यवाही करने की पूरी छूट दे दी जाय।जो जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं उन्हें ही जम्मू कश्मीर से अलग करने का समय आ गया है।सेना को घरों में घुसकर आँतकी गतिविधियों में लिप्त लोगों को घसीट कर बाहर लाने और सेना पर पत्थरबाजी करने जैसी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के सफाये से अब रोका नहीं जाना चाहिए। सुरक्षाबलों ने शनिवार को हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमाँडर बुरहान वानी के वारिश सब्जार अहमद समेत आठ आँतकवादियो को त्राल इलाके में सेना के साथ हुयी मुठभेड़ में मार गिराया गया है। वानी पर दस लाख रुपए का इनाम घोषित था।यह आँतकी रमजान के पवित्र महीने को नापाक बना कर दहशत फैलाने के मकसद से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे।पिछले चौबिस घंटे में दस आँतकी मारे जा चुके हैं।आतकियों से मुठभेड़ की सूचना पर जगह जगह लोगों ने पथराव शुरू कर दिया है इसके बावजूद तलाशी अभियान जारी है।अतिरिक्त सुरक्षा बलों की टुकड़ियां लगा दी गयीं हैं।सेना ने यह कार्यवाही गत शुक्रवार को आँतकवादियो द्वारा पेट्रोलिग पार्टी पर किये गये हमले के बाद शुरू की थी।इंटरनेट सेवाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गयी हैं तथा स्कूल कालेज सब बंद कर दिये गये।हमारी ढुलमुल रवैये का  फल है कि काश्मीर समस्या घटने की जगह बढ़ती जा रही है।जम्मू कश्मीर से राष्ट्र विरोधी ताकतों का सफाया करके ही हम काश्मीर समस्या का निदान कर सकते हैं।काश्मीर मे अब रियायत करने का समय नहीं है बल्कि बिना मुँह देखे सफाये का समय है क्योंकि जम्मू कश्मीर की सियासत भी समस्या को कम नहीं कर रही है बल्कि अलगाववादियों का मनोबल बढ़ाकर दोहरी भूमिका अदा कर रही है।घाटी को अमन की ओर ले जाने के लिए पूरे जम्मू कश्मीर मे इसी तरह एक विशेष सैनिक सर्च अभियान चलाने की जरूरत है।घाटी में ऐलान करा दिया जाना चाहिए कि जिसे भारत पसंद नहीं है वह घाटी छोड़कर चला जाय।घाटी में अकेले काश्मीरी ब्राह्मणों व अन्य हिन्दुओं को वापस लाकर बसाने की ही नही बल्कि देश के हर कोने के लोगों को घाटी में जाकर रहने व्यसाय करने की छूट मिलनी चाहिए।
अब समय आ गया है कि जो भारत विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेकर सेना से बगावत करें उसके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए।

मैं एक मुसाफिर हूँ और जिंदगी भी मुसाफिर है बिल्कुल मेरी तरह

जावरा कीर्ति वर्रा आज के इस दौर में कहां खो गई है मानवता जो रिश्ते को तार तार करके खोखली होती जा रही है क्योंकि छोटी  सी जिंदगी है दुश्मनी बढ़ा कर क्या उम्र बढ़ जाएगी आज के इस दौर में छोटी से छोटी बातों पर एक दूसरे के खून पीने के लिए तैयार हो जाते हैं जब  की मानव का सबसे बड़ा कर्तव्य है कि वह किसी की मदद करें क्योंकि मानव अपनी छोटी सी जिंदगी में आधा वक्त सोने में गुजार देता है और बाकी का अपने परिवार व अन्य कामों में तो फिर क्यों इस छोटी सी जिंदगी में हम एक दूसरे के दुश्मन बन कर कुछ वक्त को बर्बाद करते हे जो की बहुत कीमती है हमारे लिए उसे भी हम आपस में एक दूसरे  से क्रोध करके गुजार देते हैं जो लोग कहते हैं कि ऊपर वाले ने हमारी किस्मत पहले से ही लिख दी थी अगर ऊपर वाले ने किस्मत पहले से लिख दी थी तो फिर हमसे गलती क्यों होती है तब की सच तो यह है कि ऊपर वाले ने तो सिर्फ एक किताब बनाकर छोड़ दी थी और हमें कलम पकड़ा दी थी अब हम गलत लिखे या सही यह हम पर निर्भर करता है और रिजल्ट इसीलिए सब से आखरी में आता है परीक्षा के बाद  मेरा निवेदन है कि आपस में भाईचारा रखें क्योंकि हमेशा की तरह गलती के बाद पश्चाताप  ही होता है मगर कभी किसी की मदद करके देखो दिल को कितना सुकून मिलता है अगर मैं बहुत भूतकाल की बात करूं तो बहुत ही कम लोग होंगे जो अपने दादा वह पर दादा और गहराई में जाएंगे तो शायद ही  नाम बता पाए बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो  नाम याद रख पाए हो जब अपनों के ही नाम याद नहीं रहते हैं तो फिर दूसरों से दुश्मनी कैसी मगर पुराना दौर गुजरने के बाद और उसके बाद आया नया दौर के कुछ नए युवक वक्त के साथ कहीं भटक गए हैं और खून पानी की तरह बहा रहे हैं आपस में लड़ने लगने लगे हैं अगर आज के नवयुवक उनके खून में इतनी गर्मी है तो क्यों नहीं उठाते आवाज सच्चाई के खिलाफ जब एक चौराहे पर एक्सीडेंट देखने के बाद कोई हाथ आगे नहीं बढ़ाता क्यों इसी भीड़ का एक चेहरा  महिलाओं की मदद नहीं कर पाता जिसकी खुलेआम इज्जत आबरु लुट जाती है अगर आज के इस दौर में कोई  नवयुवक को मां बहन की गाली कहे तो तलवार निकल जाती है वह भी तो किसी की बहन थी तुम्हारी बहन की तरह कोई अपना जले तो बहुत तकलीफ होती है बड़ा आसान होता है किसी की जिंदगी बर्बाद होते हुए देखकर मगर कभी यह नहीं सोचते कि खुद ही अच्छे बन जाए ताकि कुछ झगड़े कम हो  जाएं आज के इस दौर में ऐसा लगता है जैसे कि भीड़ के कई चेहरे जलती हुई आग को हवा देकर रोटियां नहीं किसी गरीब की बोटिया सेक रहे हो राक्षसों की तरह इसीलिए आम जनता से मेरा कहना है कि किसी की बातों में आकर भाई चारा खत्म ना करें क्योंकि आपकी हर लड़ाई एक मुद्दा बनेगी और वह मुद्दा बड़ा बनकर लाशों के ढेर पर आकर टिक जाएगा जिन लाशों  के ढेरों को देखते हुए कुछ ही  मुआवजो में लाशों का सौदा हो जाएगा मुआवजे की तरह

जो बुरी से बुरी स्थिति में उम्मीद नही छोड़ता ईश्वर उसकी जरूर मद्त करता है

एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया । उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं, वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं और पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था
वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घण्टों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत निश्चित है । पर कहीं न कहीं उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार होगा और उसे पानी मिल जाएगा । तभी उसे एक झोँपड़ी दिखाई दी । उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ । पहले भी वह मृगतृष्णा और भ्रम के कारण धोखा खा चुका था । पर बेचारे के पास यकीन करने के अलावा कोई चारा भी तो न था । आखिर यह उसकी आखिरी उम्मीद जो थी ।
वह अपनी बची खुची ताकत से झोँपडी की तरफ चलने लगा । जैसे-जैसे करीब पहुँचता, उसकी उम्मीद बढती जाती और इस बार भाग्य भी उसके साथ था । सचमुच वहाँ एक झोँपड़ी थी । पर यह क्या ? झोँपडी तो वीरान पड़ी थी । मानो सालों से कोई वहाँ भटका न हो । फिर भी पानी की उम्मीद में वह व्यक्ति झोँपड़ी के अन्दर घुसा । अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ ।
वहाँ एक हैण्ड पम्प लगा था । वह व्यक्ति एक नयी उर्जा से भर गया । पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसता वह तेजी से हैण्ड पम्प को चलाने लगा । लेकिन हैण्ड पम्प तो कब का सूख चुका था । वह व्यक्ति निराश हो गया, उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता । वह निढाल होकर गिर पड़ा ।
तभी उसे झोँपड़ी की छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी । वह किसी तरह उसकी तरफ लपका और उसे खोलकर पीने ही वाला था कि तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज़ दिखा उस पर लिखा था - *"इस पानी का प्रयोग हैण्ड पम्प चलाने के लिए करो और वापिस बोतल भरकर रखना ना भूलना ?"
यह एक अजीब सी स्थिति थी । उस व्यक्ति को समझ नहीं आ रहा था कि वह पानी पीये या उसे हैण्ड पम्प में डालकर चालू करे । उसके मन में तमाम सवाल उठने लगे, अगर पानी डालने पर भी पम्प नहीं चला । अगर यहाँ लिखी बात झूठी हुई और क्या पता जमीन के नीचे का पानी भी सूख चुका हो । लेकिन क्या पता पम्प चल ही पड़े, क्या पता यहाँ लिखी बात सच हो, वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे ?
फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पम्प में डालने लगा। पानी डालकर उसने भगवान से प्रार्थना की और पम्प चलाने लगा । एक, दो, तीन और हैण्ड पम्प से ठण्डा-ठण्डा पानी निकलने लगा ।
वह पानी किसी अमृत से कम नहीं था । उस व्यक्ति ने जी भरकर पानी पिया, उसकी जान में जान आ गयी । दिमाग काम करने लगा । उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया । जब वो ऐसा कर रहा था, तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी । खोला तो उसमें एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमें रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था ।
उस व्यक्ति ने रास्ता याद कर लिया और नक़्शे वाली बोतल को वापस वहीँ रख दिया । इसके बाद उसने अपनी बोतलों में (जो पहले से ही उसके पास थीं) पानी भरकर वहाँ से जाने लगा । कुछ आगे बढ़कर उसने एक बार पीछे मुड़कर देखा, फिर कुछ सोचकर वापिस उस झोँपडी में गया और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतारकर उस पर कुछ लिखने लगा । उसने लिखा - *"मेरा यकीन करिए यह हैण्ड पम्प काम करता है
यह कहानी सम्पूर्ण जीवन के बारे में है । यह हमें सिखाती है कि बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोडनी चाहिए और इस कहानी से यह भी शिक्षा मिलती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है । जैसे उस व्यक्ति ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी उसमें डाल दिया ।
देखा जाए तो इस कहानी में पानी जीवन में मौजूद महत्वपूर्ण चीजों को दर्शाता है, कुछ ऐसी चीजें जिनकी हमारी नजरों में विशेष कीमत है । किसी के लिए मेरा यह सन्देश ज्ञान हो सकता है तो किसी के लिए प्रेम तो किसी और के लिए पैसा । यह जो कुछ भी है, उसे पाने के लिए पहले हमें अपनी तरफ से उसे कर्म रुपी हैण्ड पम्प में डालना होता है और फिर बदले में आप अपने योगदान से कहीं अधिक मात्रा में उसे वापिस पाते हैं