Thursday, August 31, 2017

पिपरलिया मंडी में कांग्रेस करेगी धरना प्रदर्शन

पिपलिया मंडी ।।जिला कांग्रेस के बैनर तले व ब्लॉक कांग्रेस मल्हारगढ़,मंदसौर शहर व ग्रामीण के तत्वाधान में दिनांक 1/9/2017 शुक्रवार को मंदसौर गांधी चौराह पर 11 बजे धरना दिया जाएगा ।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कमलेश पटेल,मोहम्द हनीफ शेख, यूनुस मेव ने बताया कि किसान आंदोलन के नाम से पुलीस बे गुनाह किसानों को झूठे प्रकरण में फसा रही है ।और जो किसान पुलिस की गोली से घायल हुवे थे उन्हें मुख्यमंत्री ने 5 -5 लाख रूपए देने की घोषणा करी थी ।और घायलों को सिर्फ 75-75 हजार रुपए ही मिले हे ।मल्हारगढ़ ब्लॉक के सौम्या तालाब में जिन किसानों की जमीन डूब में गई है उन किसानो को पर्याप्त मुआवजा दिलाने ।
तेलिया तालाब में हो रहे अतिक्रम को रोकने ।
बिजली बिल के नाम पर अन्नदाता किसानों को जबरन परेशान कर पठानी वसूली को बंद करने सहित अनेक मांगो को लेकर कल गांधी चौराह पर धरना दिया जाएगा ।
अतः सभी मोर्चा संघटन के पदाधिकारी ,कॉंग्रेस समर्थित सभी ,वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधि इसे ही सूचना मानकर अपनी उपस्थीती दर्ज करावे ।उक्त जानकारी ब्लॉक कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र महावर ने दी ।

उत्तरप्रदेश के मदरसों पे सरकार रखेगी नजर

यूपी मदरसों में फर्जी छात्रों पर नजर रखने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए योगी सरकार ने एक नई पहल शुरू की है. इसके तहत प्रदेश के सभी 16 हजार मदरसों की जियो टैगिंग की जाएगी.
इस जीपीएस बेस्ड सर्विस के माध्यम से सरकार इन मदरसों परनजर रखेगी. सरकार ने हर मदरसे को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द क्लासरूम का नक्शा, बिल्डिंग की फोटो, शिक्षकों के बैंक एकाउंट की जानकारी और सभी कर्मचारियों के आधार कार्ड को जल्द से जल्द सरकार को मुहैया करा दें.
सरकार ने मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार को इस संबंध में निर्देश जारी कर​ दिए हैं. इस निर्देश में कहा गया है कि सूबे के सभी 16 हजार मान्यता प्राप्त मदरसों की जियो टैगिंग की जाए. सभी मदरसे एक यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडीआईएसई) कोड से जुड़ेंगे.
प्रमुख सचिव मोनिका गर्ग द्वारा जारी 31 जुलाई 2017 के आदेश में कहा गया है कि सभी मदरसे अगर सरकार द्वारा मिलने वाली अनुदान राशि और मान्यता को जारी रखना चाहते हैं तो उन्हें सरकार द्वारा हाल ही में लांच नई वेबसाइट madarsaboard.upsdc.gov.in को लॉगिन करें

अस्पताल की लापरवाही का शिकार बनी प्रसूता नवजात की किसी तरह बची जान

बलिया जिला महिला अस्पताल में बांसडीहरोड थाना क्षेत्र की टघरौली निवासी गुंजन गुप्त (25) पत्नी अरविंद गुप्त की प्रसव के बाद अचानक तबीयत खराब होने से हुई मौत को लेकर परिजनों ने जमकर बवाल काटा। प्रसव के बाद खून की कमी होने की वजह से महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने से उसने दम तोड़ दिया। इस बीच परिजनों के हो-हंगामा की सूचना पर सदर कोतवाल पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों को काफी प्रयास के बाद किसी तरह शांत कराया। इसको लेकर अस्पताल में घंटों अफरातफरी की स्थिति रही। इस बीच नवजात को चिकित्सकों ने किसी तरह से बचा लिया। मंगलवार की सुबह गुंजन को प्रसव पीड़ा होने पर परिवार के लोगों ने उसे महिला अस्पताल में भर्ती कराया। महिला चिकित्सकों ने जांच के बाद परिवार के लोगों से खून की कमी बताते हुए बीएचयू ले जाने की सलाह दी। परिवार के लोगों द्वारा असमर्थता जताने पर चिकित्सकों ने यहीं खून की व्यवस्था करने को कहा। परिवार के लोग इसके लिए प्रयास भी किए पर कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। इधर बुधवार की दोपहर में महिला का प्रसव हुआ जिसके बाद उसकी हालत खराब होने लगी। इस बीच परिजनों द्वारा खून की व्यवस्था कर लेने के बाद चिकित्सक उसे चढ़ाने लगी लेकिन इसी बीच महिला ने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार महिला की मौत हार्ट अटैक से हुई। इसको लेकर परिजन आग-बबूला होकर बवाल करने शुरू कर दिए।

पुलिस चेकिंग में हुई मुठभेड़ में मारागया इनामी बदमास

गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन में बदमाशों ओर पुलिस के बीच हुई एक मुठभेड़ में एक नामी बदमाश पकड़ा गया है. वाहन चेकिंग के दौरान जब पुलिस ने बाइक सवार बदमाशों को रुकने का इशारा किया तो बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. पुलिस की जबावी फायरिंग में 1 बदमाश घायल हो गया, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया।_
_उल्लेखनीय है गुरुवार को सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में दौर के लिए पहुंचने वाले हैं, जिसके चलते गाजियाबाद में पुलिस अलर्ट पर है. पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार हुए बदमाश पर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं. मुठभेड़ घायल हुए सभी को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।_रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार सुबह हापुड़ चुंगी पर वाहन चेकिंग के दौरान एक अपाची बाइक पर सवार दो बदमाश पुलिस द्वारा रुकने का इशारा करने पर फायरिंग कर दी और वहां से भाग खड़े हुए, लेकिन पलिस ने बदमाशों का पीछा किया और राज नगर एक्सटेंशन में बदमाशों की घेराबंदी कर ली।_
_पुलिस से खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर एक बार फिर फायरिंग करनी शुरू कर दी और पुलिस ने भी जबावी फायरिंग भी शुरू की. पुलिस और बदमाशों के बीच कुछ देर तक रूक-रूक कर फायरिंग होती रही. पुलिस फायरिंग में एक बदमाश हरेंद्र को गोली लगी जबकि उसका एक साथी शिवा भागने में सफल रहा जबकि क्रॉस फायरिंग में 1 सब इंस्पेक्टर सहित 2 पुलिसकर्मी भी घायल हो गया /

पलटते पलटते बची दून एक्सप्रेस

कोलकाता से दून जा रही दून एक्सप्रेस की इंजन का कपलिंग टूट जाने से बोगियां अलग हो गयीं जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया। शाहगंज से दूसरा इंजन मंगाकर बोगी से जोड़ा गया। फिर एक घण्टा बाद ट्रेन रवाना हुई।
सूत्रों के अनुसार हावड़ा से चलकर 13009 अप दून एक्सप्रेस दिन में पौने एक बजे जौनपुर पहुंची। दो मिनट रुकने के बाद शाहगंज की ओर रवाना हुई। 1.05 बजे खेतासराय स्टेशन पार करने के बाद जब वह डोभी स्थित रेलवे क्रासिंग गेट सी-56 के पास पहुंची तो इंजन से जुड़ी बोगी की कपलिंग टूट गया। नतीजा इंजन आधा किमी आगे चला गया। पीछे रह गये डिब्बे गेट तक पहुंच कर रुक गये। चालक को जब अहसास हुआ कि डिब्बे पीछे छूट गये तो वह इंजन को पीछे ले आया। लेकिन इंजन का कपलिंग टूटने से डिब्बों को जोड़ने लायक नहीं था।
इधर घटना की जानकारी खेतासराय स्टेशन अधीक्षक ने कंट्रोल को दी। चालक को इंजन शाहगंज लेकर जाने को कहा गया। चालक इंजन लेकर शाहगंज गया। जहां से शाहगंज के स्टेशन अधीक्षक आरपी राम दूसरा इंजन लेकर साथ में घटना स्थल पर पहुंचे। फिर सवा दो बजे यात्रियों को लेकर ट्रेन रवाना हुआ। इस दौरान एक घण्टे तक यात्री फंसे रहे। शाहगंज जाने वाले यात्री ट्रेन से उतर गये और सड़क पर पहुंच कर बस से चले गये।
इस दौरान ट्रेन की बोगियां धूप में खड़ी थी जिससे यात्री हलकान हो गये। वहां पानी पीने की कोई व्यवस्था भी नहीं थी। बोगियों के क्रासिंग पर खड़े होने से आवागमन भी बाधित हो गया।

पूर्व मंत्री ने दिया पर्यावरण बचाओ का नारा

उत्तरप्रदेश के बाराबंकी में लखनऊ रोड (गांधी आश्रम के निकट) बैटरी चालित ई-रिक्शा शोरूम का पूर्व मन्त्री मा. अरविन्द कुमार सिंह "गोप" जी ने फीता काट कर उद्घाटन किया। उद्घाटन अवसर पर शोरूम के मालिक भोलेन्द्र मिश्र द्वारा आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये पूर्व मन्त्री मा. गोप जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ये अत्यन्त आवश्यक है कि ईंधन चालित वाहनों का प्रयोग कम से कम किया जाये, इस दिशा में पूर्व मुख्यमन्त्री मा. अखिलेश यादव जी के प्रयासों की सराहना करते हुये कहा कि मा. अखिलेश जी ने महत्वपूर्ण क़दम उठाते हुये पिछली सरकार के अपने कार्यकाल में बैटरी चालित ई-रिक्शा मुफ़्त बाँटकर जहाँ एक तरफ़ बेरोज़गार लोगों को रोज़गार मुहैया कराया वहीं दूसरी तरफ़ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया। इस पर समाजवादी पार्टी के ज़िलाध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह सहित भारी संख्या में नगर के प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अन्त में शोरूम मालिक भोलेन्द्र मिश्र ने सभी अतिथियों एवं आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया।

सर्प के काटने से महिला की मौत

शाहगढ़/अमेठी विवाहिता की संपदर्श की वजह से हुई मौत, 2 माह के दूध मुहे बच्चे का कौन बनेगा सहारा, ये बना चर्चा का  विषय, विदित हो कि मुंशीगंज थाना क्षेत्र के चौबेपुर मजरे हरिहरपुर में अरविंद कोरी की पत्नी जानकी उम्र 20 वर्ष शाम 5 बजे घर में खाना बना रही थी, उस दौरान घरेलू कार्य करते हुए उन्हें किसी जहरीले जन्तु के काटने का आभास हुआ तो उन्होंने परिजनों को बताया तो परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहगढ़ ले गए जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद मृत्यु घोषित कर दिया। इस घटना से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गयी।  विवाहिता के 2 माह के  बच्चे जसवंत को लेकर लोगो मे बहुत चिंता है। घर मे शोक संतप्त परिवार को ढांढस देने वालो का तांता लगा है।

रिपोर्ट
आर के यादव

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और टीचरों के आंदोलन पर भोला नाथ मिश्रा की रिपोर्ट

शिक्षा की दुर्दशा सुधरने की जगह बिगड़ती ही जा रही है। सरकारी प्राथमिक शिक्षा का एक समय वह भी था जबकि शिक्षकों के अभाव में सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुँच गये थे।उस आड़े वक्त पर शिक्षा को गर्त में जाने से बचाने के लिये सरकार द्वारा अस्थाई वैकल्पिक व्यवस्था शिक्षा मित्र के रूप में ग्राम पंचायत स्तर से की गयी थी।यह शिक्षा मित्र शिक्षित तो थे लेकिन शिक्षक नहीं थे।उस समय इनकी नियुक्ति सत्रान्त तक के लिये की गयी थी।फिलहाल यह सही है कि इन शिक्षा मित्रों ने सरकारी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को अवरूद्ध होने से बचाकर शिक्षक एक विकल्प के रूप सामने आ गये। जब इन्हें लगा कि वह शिक्षकों से कम से नहीं है तो अपने संगठन के माध्यम से अपने स्थायीकरण की माँग को लेकर आंदोलन में कूद पड़े । शिक्षा मित्रों की संख्या को देखते हुये अखिलेश सरकार ने राजनैतिक फायदे के लिये इन्हें मानक के विरुद्ध शिक्षक बना दिया था।सरकार के इस फैसले को उच्च न्यायालय ने गत वर्ष निरस्त कर दिया था जिसे लेकर शिक्षा मित्रों का आंदोलन जानलेवा हो गया था।इसके बाद सरकार ने इन्हें अपनी तरफ से अबतक शिक्षक बनाये रखा था और राज्यकोष से इन्हें शिक्षक का वेतन दे रही थी।वर्तमान समय में यह शिक्षा मित्र शिक्षक के रूप में ही नहीं बल्कि प्रभारी प्रधानाचार्य के पद पर कार्य कर रहे थे।उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में  चल रहे बहुप्रतीक्षित मुकदमे का फैसला दो दिन पहले आ गया है।सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों के समायोजन को रद्द करके उन्हें शिक्षक बनने के लिये परीक्षा उत्तीर्ण करने का अवसर दिया है। अदालत ने शिक्षा मित्रों को सड़क पर नहीं आकर आकर आंदोलन तोड़फोड़ आगजनी करने के लिये नही बल्कि स्कूल में जाकर पढ़ाने और अपनी तैयारी करने के लिये उनका मूल पद दो वर्ष के लिये बहाल कर रखा है।एक तरह से सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों के पिछले उग्र आंदोलन एवं संवेदनशीलता को देखकर बहुत सोच समझकर राहत भरा निर्णय सुनाया है ताकि "लाठी भी न टूटे और साँप भी मर जाय"।शिक्षक बनने के लिये कुछ मानक होते हैं और बिना उन्हें पूरे किये शिक्षक नहीं बना जा सकता है।इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा मित्र स्कूल की जगह सड़कों पर आकर उग्र आंदोलन आगजनी तोड़फोड़ व अराजकता पैदा करने पर उतारू हो गये हैं।कल पूरे दिन पूरे प्रदेश में शिक्षा मित्रों के उग्र आंदोलन से सड़कें जाम रही और अधिकारियों को अपनी जान बचाने के लाले पड़ गये।सुप्रीम कोर्ट की जगह कार्यालयों में तोड़फोड़ आगजनी और रोडजाम करके  जनमानस को संकट में डालना उचित नहीं है। फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने सुनाया है जनता  अधिकारी या सरकार ने नहीं सुनाया है।सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सामने पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था नतमस्तक होती है।शिक्षा मित्रों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी नियुक्ति एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में हुयी थी।जब अदालत ने दो वर्ष के अंदर "मानक परीक्षा" उत्तीर्ण करने का समय दिया है तो गुस्सा किस बात का है।गुस्सा तो उन्हें होना चाहिए जिनके पास सिर्फ सपा बसपा जमाने की डिग्री है और जिनके के लिये मानक परीक्षा उत्तीर्ण कर पाना संभव नहीं है।यह सही है कि शिक्षा मित्रों में अधिकांश ऐसे हैं जो शिक्षक न होते हुये भी शिक्षकों से कई गुणा अधिक बेहतर  हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अंगीकृत कर उसका स्वागत किया जाना चाहिए कि उसने शिक्षा मित्रों की रोजी नहीं छीनी।अदालत के सामने एक तरफ वह शिक्षक मानक को पूरा किये बेरोजगार थे दूसरी तरफ वैकल्पिक व्यवस्था के मानक विहीन शिक्षा मित्र थे।अदालत ने दोनों को प्राणदान दिया और दोनों को बेरोजगार नहीं किया।अदालत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विपरीत सरकारी कोष से दिये गये वेतन को भी बहाल करके शिक्षा मित्रों को बेरोजगार होने से बचाने लिया है।शिक्षा मित्रों को अदालत के फैसले का आदर करते हुये अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुये शिक्षक परीक्षा की तैयारी करना चाहिए।तोड़फोड़ हंगामा मारपीट मुकदमेबाजी से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अब राष्ट्रपति ही बदल सकता है।राज्य सरकार चाहे तो दो वर्ष के कार्यकाल के लिये महंगाई को देखते हुये वेतन वृद्धि करके राहत दे सकती है। कुल मिलाकर जिस  अंदाज में शिक्षा मित्रों के उग्र आंदोलन का आगाज कल हुआ है उससे अराजकता पैदा होगी।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निग / अदाब / शुभकामनाएँ।। ऊँ भूर्भवः स्वः--------/ ऊँ नमः शिवाय।।।

            भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी

कन्नौज समाचार लेने गए पत्रकार से डाक्टर ने की बदजुबानी

कन्नौज ब्यूरो पवन कुशवाहा के साथ शिवम द्विवेदी
♢प्रथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अनौगी की धटना ♢पोटॅल न्यूज संबाददाता को मारने की दी धमकी
(कन्नौज ) अनौगी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है जिसमे चाहे खुद सीएमओ साहब हो या फिर अन्य आलाकमान यहा सबकी बातो नजर अंदाज करते हुए हुकूमत तो सिर्फ और सिर्फ डाक्टर साहब की चलती है, आज दिन बुधवार को एक बेब न्यूज चैनल का पत्रकार जब अनौगी स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर किसी समस्या को लेकर समाचार संकलन करने पहुचा तो बगैर कुछ सुने बिना ही बाडॅब्याय समेत डाक्टर मन्जुल कटियार ने पत्रकार से अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया, इतना ही पत्रकार को धमकी देने के साथ ही अपने बिभागीय अधिकारियो को भी उल्टा सीधा कह डाला, इससे तो साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि साहब बहा मरीजो का उपचार करते है न कि अपनी जगलरी छाटते है,

Wednesday, August 30, 2017

विजया बैंक में निकली बम्फर भर्ती करें आवेदन-रामजी पांडेय

बेंगलूर,विजया बैंक शशक्त एयर और मध्यम आकार की सार्वजनिक बैंक है जिसका प्रधान कार्यालय बेंगलूर में है जिसकी देश भर में शाखाएं है संविदा के आधार पर मुख्य संखिकीविड की नियुक्ति के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन आमन्त्रित है।
पद की संख्या 1
पद का नाम-सविदा के आधार पर मुख्य सांख्यकी विद ।
स्थान-प्रधान कार्यालय बेंगलूर कर्नाटक
अबनुभव-आदि के बारे में अधिक जानकारी के लिये बैंक की बेबसाइट-www.vijayabank.com/careers/careers-list पर लॉगिन करें

इंडबैंक में निकली भर्ती हो जाएं तैयार-रामजी पांडेय

चेन्नई ,इंडबैंक में चार पदों के लिए भर्ती निकली है जिसका विवरण इस प्रकार है।
1,मर्चेंट बेंकर और कारपोरेट सलाहकार रिक्त पद 2 ,अनुभव,वित्त में एमबीए,आयु 25-40,सेलरी 6 से 8 लाख रुपये सालाना।

2,इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट रिक्त पद 2,अनुभव वित्त में एमबीए,आयु 25 से 40,सेलरी 6से 8 लाख सालाना
3,बैंक आफिस स्टाफ ,रिक्त पद 2 अनुभव स्नातक उम्र 21 से30 सेलरी 9000 से15000 प्रतिमाह
आदि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 16-9-2017
अधिक जानकारी के लिए www.indbankonline.com देखें।

फिर दहेज लोभियों ने ली एक जान

कुशीनगर।* दहेज के लिये एक और दुल्हन को मार डाला गया और शव को चुपके से गायब करने का प्रयास किया जा रहा था कि डायल 100 ने पहुँच कर शव को कब्जे में ले लिया, शव पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया। इधर लड़की के पिता ने पुलिस को तहरीर दी कर कार्यवाही की मांग की है।बताया जाता है कि महराजगंज जिले के कोठीभार थानाक्षेत्र अंतर्गत ग्राम चैनपुर निवासी मोहनप्यारे अपनी पुत्री इन्दु की शादी 23 मई 2013 को कुशीनगर जिले के रामकोला थाना अंतर्गत ग्राम हरपुर माफी निवासी श्रीपत के पुत्र मंटू से किया था जिसका गवना 3 मार्च 2016 को हुआ।
        इन्दु के पिता मोहनप्यारे ने इस मामले में रामकोला पुलिस को दिये प्रार्थना पत्र में लिखा है कि पुत्री इन्दु अपने ससुराल चली गई और पत्नी धर्म का निर्वहन कर रही थी, विदाई के समय अपने क्षमता के अनुसार दान, उपहार मंटू और उनके परिजनों को दिया गया था, बावजूद इसके इन्दु द्वारा बार-बार इस बात की जानकारी दी जाती रही की उसके पति मंटू, सांस यशोदा, ससुर श्रीपत, ननद इंदु, प्रियंका और मीरा, जेठानी वेदी, जेठ संजय व बाबा मुनीब हर समय दहेज के लिए प्रताड़ित कर रहते है और एक led tv तथा एक लाख रुपये अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव बनाते है जिसके कारण हमेशा मारते-पीटते प्रताड़ित करते थे, इसी क्रम में इंदू ने 24 अगस्त 2017 की रात्रि 9 बजे मोबाइल नंबर 7607376302 से घर के मोबाइल नंबर 812728 9347 पर फोन कर के बताया कि उसके ससुराल कि उपरोक्त पति मंटू, सास यशोदा, ससुर श्रीपत, ननद इंदु, प्रियंका, मीरा और जेठानी बेदी, जेठ संजय, बाबा मुनीब उनको अतिरिक्त दहेज के लिए मारने पीटने के लिए आमादा है और इसके बाद फोन कट गया, रात में बात नहीं हो पायी, दूसरे दिन 25 अगस्त 2017 को सुबह गांव के किसी व्यक्ति ने फोन करके बताया कि इन्दु की हत्या कर उसके ससुराल के उपरोक्त लोग लाश को गायब करने की फिराक में है, इसके बाद प्रार्थी भागा भागा अपनी पुत्री के ससुराल पहुंचा और देखा कि प्रार्थी की पुत्री इन्दु के शव का आगे का दांत टुटा हुआ है और चेहरे सहित अन्य जगह पर सूजन भी है, पूरा शरीर नीला हो गया है। उसके ससुराल पक्ष के उपरोक्त लोग जल्दी जल्दी चोरी से शव का अंतिम संस्कार करने की फिराक में है, इस तरह मेरी पुत्री इंदु की हत्या उपरोक्त लोगों द्वारा दहेज के लिए कर दिया गया है। इसकी सूचना हमने डायल 100 पर फोन करके पुलिस को बुलाया, उसके बाद प्रार्थी की पुत्री इन्दु का पोस्टमार्टम हुआ।उन्होंने पुलिस को दिये प्रार्थना पत्र पर मामला दर्ज कर कार्यवाही की मांग की है।

सरकारी काम करने वाला सरकारी कर्मचारी होता है लेकिन

सरकारी कामकाज करने वाले को सरकारी कर्मचारी माना जाता है और सरकारी कर्मचारी मानकर उसे हर माह एक निश्चित धनराशि वेतन या मानदेय के रूप में दी जाती है।कर्मचारी जिस विभाग में काम करता है वह विभाग उसका अभिभावक या संरक्षक होता है।इधर सहकारिता की आँधी चल रही है और सहकारिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।दुनिया भले ही चाँद पर पहुँच गयी हो लेकिन सहकारिता विभाग जहाँ के तहां पर बैठा गुलछर्रे उड़ा रहा है।उसके कर्मचारियों की जीविका कैसे चलती है जैसे उससे कोई मतलब ही नहीं रह गया है।सहकारिता विभाग न खुद अपने संग्रह अमीनों की दयनीय दशा पर तरस खा रहा है और न ही अदालत के फैसले को ही मान रहा है।सहकारिता से जुड़े सहकारी कुर्क अमीनों को दशकों से मजदूरी नहीं दी गयी है और अदालत के फैसले की आड़ में संग्रह अमीनों के कमीशन की धनराशि से मौजमस्ती की जा रही है।सहकारी अमीन दशकों से कमीशन या वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर पहुँच गये और इनके सामने पेट भरने की समस्या पैदा हो गयी है।इन सहकारी कुर्क अमीनों ने अपने हितों की रक्षा के लिये नब्बे के दशक में एक मुकदमा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर करके न्याय की गुहार लगाई थी जिसके परिप्रेक्ष्य में अदालत अपना फैसला अमीनों के पक्ष में सुना चुकी है।सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले की पुष्टि भी कर चुकी है।अदालत ने इन संग्रह कुर्क अमीनों को राज्य कर्मचारी मानते हुये इन्हें कमीशन की जगह वेतन देने का फैसला सुनाया था।अदालती  फैसले से संग्रह कुर्क अमीनों को तो लाभ नहीं हुआ किन्तु सहकारिता विभाग ने पूरा लाभ उठाया और जो कमीशन देते थे उसे भी देना बंद कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद सहकारी कुर्क अमीनों की दशा धोबी के कुत्ते जैसी हो गयी और वह न घर के रहे न राह के रहे।जो कुछ बाल बच्चों के लिये कमीशन के रूप में मेहनताना मिलता था वह भी बंद हो गया। संग्रह अमीन रूपी चौबे गये थे छब्बे बनने लेकिन वापस लौटकर दूबे भी नहीं रह गये।सहकारी बैको में अस्सी के दशक से कोई नयी संग्रह अमीनों की भर्ती नहीं हुयी है।दो दशक पहले इन सहकारी संग्रह कुर्क अमीनों की संख्या लगभग तीन हजार के करीब थी जो अब घट गयी है क्योंकि काफी लोगों की मृत्यु हो चुकी है। एक दो अमीन क्षुब्ध होकर अबतक अपनी जान खुद दे चुके हैं तथा लखनऊ में धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। सहकारिता विभाग व सरकार की बेरूखी व मनमानी अदालती अवमानना ही नहीं कर रही है बल्कि इन बेचारे सहकारी संग्रह कुर्क अमीनों को बेमौत मरने के लिये मजबूर कर रही है।इन अमीनों को आजतक न तो सरकारी कर्मचारी माना गया है और न ही इनका वेतन ही निर्धारित किया गया है और उच्च व सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हवा हवाई बना हुआ है।सहकारिता विभाग को शर्म भी नहीं आती है कि उसका खजाना वसूली करके भरने वाला उसका कमाऊं पूत दाने दाने का मोहताज है और उसे उसकी मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।सत्ता बदली है व्यवस्था बदली है लेकिन इन सहकारी कुर्क अमीनों के साथ बर्ताव नहीं बदला है।अदालत के आदेश की अवहेलना करना सहकारिता विभाग व सरकार दोनों को महंगा पड़ सकता है।अगर शिक्षा मित्रों की तरह इन अमीनों के पास भी संख्याबल होता तो शायद अदालती आदेश के अनुपालन  में देरी न होती।सहकारी अमीनों को बिना पैसा दिये पद पर बनाये रखना भारतीय संविधान के तहत गंभीर अपराधिक मामला बनता है।बंधुवा मजदूरी या बेगार कराना भी भारतीय दण्ड संहिता के तहत दण्डनीय अपराध है।इन बेचारे अमीनों के पास अगर पुनः सुप्रीम कोर्ट के पास जाकर गुहार लगाने की बुतात होती तो अबतक विभाग की हालत पतली हो गयी होती।अदालत के फैसले को न मानना अदालत की अवमानना है और यह कोई न भूले कि अदालत में अब बिना किसी याचिका के स्वतः संज्ञान लेने की प्रथा शुरू हो गयी है और अगर अदालत ने स्वतः संज्ञान में ले लिया तो विभाग डेरा सच्चा सौदा बन जायेगा। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात/ वंदेमातरम्/ गुडमार्निग/ अदाब/ शुभकामनाएँ।। ऊँ भूर्भवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय ।।
              भोलानाथ मिश्र
   वरिष्ठ पत्रकार/ समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी