Wednesday, September 27, 2017

शनि प्रधान देवी कालरात्रि की महिमा अपरम्पार

सप्तमी कालरात्री आज
ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461

27.09.17 आश्विन शुक्ल सप्तमी अर्थात शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन  नवः ग्रह आदि शनि ग्रह प्रधान देवी कालरात्रि का पूजन किया जाएगा।

भगवान विष्णु की योगनिंद्रा शुभकरी देवी कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत भयंकर हैं।

यह काल का अंत करती हैं। काजल वर्ण त्रिनेत्री चतुर्भुजी देवी कंठ में विद्युत माला पहने गर्दभ पर सवार होकर तलवार व खड्ग धारण कालवास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार पश्चिम दिशा की अधिष्ठात्री देवी कुंडली के दशम और एकादश कालरात्रि भाव पर अपनी सत्ता से व्यक्ति के कर्म, प्रोफैशन, पितृ, पिता, आय, लाभ, नौकरी पर अपना स्वामित्व रखती हैं।

इनकी पूजा रात्रि में नीले फूल, काजल व उड़़द के मिष्ठानों से करनी चाहिए। इनकी साधना शनि के दोषों को शांत करती हैं, कर्म क्षेत्र मज़बूत होता है। नौकरी में प्रमोशन व इन्क्रीमेंट मिलता है।

विशेष पूजन: रात्र में देवी कालरात्रि का विधिवत पूजन करें। तिल के तेल का दीपक करें, लोहबान से धूप करें, काजल चढ़ाएं, नीले फूल, उड़द गुड़ के पुए का भोग लगाएं। तथा 1 माला विशेष मंत्र जपें। पूजन उपरांत भोग किसी कन्या को खिलाएं।

पूजन मुहूर्त: रात 19:08 से रात 20:37 तक। (रात्रि)

विशेष मंत्र: ॐ कालरात्र्यै नमः॥

गुलिक काल: प्रातः 10:42 से दिन 12:11 तक।

यमगंड काल: प्रातः 07:44 से प्रातः 09:13 तक।

अमृत काल: अगली सुबह 05:46 से प्रातः 07:34 तक।

राहु काल: दिन 12:11 से दिन 13:40 तक।

यात्रा मुहूर्त: दिशाशूल – उत्तर, राहुकाल वास – दक्षिण-पश्चिम, अतः उत्तर व दक्षिण-पश्चिम दिशा की यात्रा टालें।कलर: गहरा हरा।
दिशा: उत्तर-पश्चिम।
मंत्र: ॐ शिवदूत्यै नमः॥

टिप: प्रमोशन हेतु देवी कालरात्रि पर चढ़े हुए 10 लौंग पर्स में रखें।

बर्थडे  शनि दोष से मुक्ति हेतु देवी कालरात्रि पर चढ़े 11 उड़द के दाने कपूर से जला दें।🙏🙏🙏🙏

*सप्तम देवी:- कालरात्रि:-*

माॅ दुर्गा की सातवी शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है । माॅ कालरात्रि का स्वरुप देखने मे अत्यन्त भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देती है, इसी कारण इनका नाम शुभंक्करी भी है । दुर्गा पूजा के सातवे दिन कालरात्रि की उपासना का विधान है । इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र मे स्थित रहता है । उसके लिए संसार की समस्त सिद्वियो का द्वार खुलने लगता है । इस चक्र मे साधक का मन पूर्णातः माॅ कालरात्रि के स्वरुप मे समाया रहता है । माॅ कालरात्रि दुष्टो का विनाश और ग्रह बाधाओ को दूर करने वाली है, जिससे साधक भयमुक्त हो जाता है ।

*मां कालरात्रि का भोग:-*
सप्तम नवरात्रे भगवती कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को भी देना चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति भयमुक्त तथा शोकमुक्त होता है ।

*कालरात्रि मां का मंत्र:-*

*1.एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता ।*
  *लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्त शरीरिणी ।।*

*2.वामपादोल्ल सल्लोहलता कण्टक भूषणा ।*
   *वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयक्कंरी ।।*

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