Monday, September 25, 2017

हाईटेक हुई गोरखपुर जेल जाने कैसे

गोरखपुर जिला कारागार 'ई-प्रिजन स्कीम' से लैस हो गया है. इस योजना से जेल में बंद *कैदियों की ऑनलाइन रिकार्ड* रखा जायेगा. जिसमें अपराधी का नाम और पता के साथ उसका अपराधिक रिकार्ड कही भी इंटरनेट पर देखा जा सकेगा.इसकी मदद से *बदमाशों का आपराधिक रिकार्ड अब एक क्लिक पर* मिले सकेगा. जिला जेल में ई-प्रिजन स्कीम के तहत सभी *बंदियों का आपराधिक रिकार्ड के साथ ही अंगुलियों के निशान और फोटो फीड कर लिए गए* हैं.कई बार नाम और पता बदलकर अपराध करने वाले कुख्यात पेशेवर बदमाश अब पुलिस को चकमा नहीं दे पाएंगे. बता दें, कि बदमाशों का पुराना आपराधिक रिकार्ड नहीं होने की वजह से पकड़े जाने के बाद वह आसानी से छूट जाते थे. जबकि ई-प्रिजन स्कीम के तहत डाटा फीड होने के बाद अब इनकी कुंडली देश में कही भी देखी जा सकेगी.अब  अपराधियों का डाटा फीड कर लिया गया है. ऐसे में जेल से छूटने के बाद किसी दूसरे जिले में वारदात करने पर अपराधी की शिनाख्त करना आसान हो जायेगा. वहीं ई-प्रिजन स्कीम के तहत *प्रदेश भर के जेलों को एक दूसरे से जोड़ा जा रहा* है.
ऐसे में बंदी समेत जेल प्रशासन के बारे में पूरी जानकारी आनलाइन साइट पर उपलब्ध होगी. लेकिन इससे जानकारी सिर्फ कुछ उच्च पदस्थ अधिकारी ही ले सकेंगे. इसके लिए एक लॉगिन व पासवर्ड जारी किया गया है. *सभी बंदियों के हाथ व आंख की स्केनिंग* की गई है.

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