Monday, September 25, 2017

मां की भक्ति से मिलती है इंसान को अलौकिक शक्ति

कन्नौज ब्युरो पवन कुशवाहा के साथ आलोक प्रजापति

कन्नौज : शनिवार को बारिश भी भक्तों का हौसला कम नहीं कर पाई। मां के दर्शन की लालसा व मन में भक्ति का ज्वार लिए भक्त रिमझिम बारिश के बीच मंदिरों में पहुंचे। सुबह से सुगंध नगरी में मां के जयकारे गूंजते रहे। मंदिरों में दर्शन करने वालों की कतार लगी रही। बूंदाबांदी के बीच हर भक्त मां की एक झलक पाने को बेताब दिखा। भक्त कतार में खड़े होकर बीच-बीच में मां का गुणगान करते रहे। नगर के काली देवी मंदिर, फूलमती, गोवर्धनी, क्षेम कली समेत अन्य छोटे बड़े मंदिरों में भक्तों ने दर्शन किए। परंपरा अनुसार फूलमती, गोवर्धनी, क्षेमकली मंदिर में बच्चों के मुंडन संस्कार कराए गए। नई मोटर साइकिल व कार लेकर पहुंचे लोगों ने पंडितों से पूजन कराया। इसके साथ शुभ काम की मां से आज्ञा मांगी। घरों में भी व्रत रहकर मां का अनुष्ठान किया।
मां फूलमती के दर्शन पाकर भक्त मंत्रमुग्ध
मकरंद नगर स्थित सिद्धपीठ मां फूलमती मंदिर में भक्तों की भीड़ रही। मां का भव्य श्रृंगार किया गया। मां की आस्था भक्तों को यहां खींच लाई। मंदिर परिसर की सजावट ने भक्तों को आकर्षित किया। मां की भव्य प्रतिमा के दर्शन कर भक्त मंत्र मुग्ध हो गए। आकर्षण में बंधे लोग काफी देर तक मां के चरणों को निहारते रहे। हवन-पूजन के साथ दिन भर धार्मिक कार्यक्रम हुए।
पंडालों पर भजन कीर्तन, कलश सजाओ प्रतियोगिता
नगर में जगह जगह दुर्गा महोत्सव पंडालों ने भक्तों को आकर्षित किया। दूर दराज से आए भक्तों ने मां के दर्शन किए। मकरंद नगर एसबीएस मैदान, हाजीगंज, हरदेवगंज, सफदरगंज, चौहट्टा, फर्श रोड समेत 15 स्थानों पर लगे पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। नगर के सभी स्कूल के बच्चों ने रंगोली, कलश सजाओ, मेहंदी लगाओ समेत कई प्रतियोगिता में भाग लिया। एसबीएस मैदान में कलश सजाओ प्रतियोगिता कराई गई। कार्यक्रम में माया देवी बालिका इंटर कालेज, सरस्वती ज्ञान मंदिर, एसजीएम पब्लिक अकादमी, सेठ चंद्र गुप्त शिक्षा निकेतन, सरस्वती ज्ञान मंदिर जूनियर हाईस्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल कानून गोयान, एसडी बालिका इंटर कालेज, आकाश शिक्षा सदन, लौंगश्री बालिका विद्यालय, कन्नौज पब्लिक स्कूल से गोमती देवी बालिका विद्यालय के छात्र छात्राओं ने पंडाल में कलश सजाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद भागवत कथा में वृंदावन से आए आचार्य कृष्ण गोपाल भारद्वाज ने शुकदेव जन्म की कथा सुना।

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