Tuesday, October 31, 2017

एकादशी की खाश रिपोर्ट-भोला नाथ मिश्रा की कलम से

हमारा देश आस्था श्रद्धा और विश्वास का देश माना गया है। हमारी आस्था ही है कि हमें मस्जिद जाने पर अल्लाह मिंया और मंदिर जाने पर देवी देवता और भगवान के होने का अहसास हो जाता है।हमारी आस्था ही है कि हमें पीपल के पेड़ में ब्रह्म देवता और नीम में देवी तथा बबूल के पेड़ में प्रेत नजर आता हैं।इसी आस्था श्रद्धा विश्वास के चलते ही रिश्तों का निर्धारण और अनुपालन होता है।आज हमारी धार्मिक आस्था खुशियों से जुड़ा हुआ एक और महापर्व है जिसे हम आप देव उत्थानी एकादशी और छोटी दीपावली भी कहते हैं।आज के दिन ही हम गन्ने की फसल को तैयार मानकर उसमें कटान लगाकर उसे देवी देवताओं और विष्णु भगवान को समर्पित कर शुभ कार्य की शुरूवात करते हैं। आज की देव उत्थानी एकादशी के व्रत पूजा पाठ का विशेष महत्व माना गया है और आज ही शाभ को पूजा पाठ करने के बाद बड़ी बड़ी मशालें बनाकर गांव के बाहर उसमें आग लगाकर "हड़ा हड़वाई" हवा हवाई खेलकर वातावरण को शुद्ध एवं कीटमुक्त करते हैं। इतना ही नहीं कल ब्रह्म महूर्त में अनाज साफ करने वाले सूप को गन्ने के डंडे से पीट पीट घर के अंदर बाहर हर जगह की दरिद्रता को दूर भगाकर भगवान लक्ष्मी के आने की कामना कर प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।देव उत्थानी एकादशी के बारे में अलग अलग ग्रंथों में तमाम उद्धरण दिये हैं किन्तु मुख्य रूप से माना जाता है कि आज ही चतुर्मास का समापन होता है और सारे शुभकार्यों की शुरुआत हो जाती है।आज ही के दिन विष्णु भगवान और देवताओ की आँख चार माह के विश्राम के बाद खुलती है। भगवान विष्णु और देवताओं के सुसुपतावस्था में होने के कारण इन चार महीनों में शादी ब्याह या अन्य शुभकार्य नहीं हो पाते हैं क्योंकि इन सभी शुभकार्यों में शामिल होने के लिए भगवान देवी देवताओं ही नहीं पितृ देवताओं को भी आमंत्रित एवं आवाह्वान किया जाता है। हमारी संस्कृति कभी किसी के आराम में खलल डालने वाली नही रही है।देव उत्थानी एकादशी के बारे में मान्यता है कि एक बार विष्णु भगवान से माता लक्ष्मी जी ने कहा कि प्रभु आपके साथ रहते हुए मै आराम नहीं कर पाती हूँ क्योंकि हमें समय ही नहीं मिलता है क्यों न आप हमें विश्राम करने का मौका देने के लिये साल में चार माह के लिये अपनी योगनिद्रा में चले जाया करें।ऐसा करने से हमें भी आराम करने घूमने टहलने का मौका भी मिल जायेगा।लक्ष्मी जी के अनुरोध पर विष्णु भगवान ने अपने और देवताओं के लिए चतुर्मास आराम करने की परम्परा डाली और उन्हें देव उत्थानी एकादशी के पूजा व्रत आदि करने से होने वाले विभिन्न लाभों के बारे में बताया।भगवान विष्णु और देवताओं के निंद्रा से उठने की पावन मंगलमयी शुभ बेला पर आप सभी पाठकों को पर्व की मंगल शुभकामनाएं एवं बधाई देते हैं।भगवान विष्णु माता लक्ष्मी जी के साथ और सभी देवी देवता आपको स्वस्थ प्रसन्न रखें। धन्यवाद ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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         भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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