Tuesday, October 3, 2017

धर्मिक आद्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है बाराबंकी -भोला नाथ मिश्रा

सुप्रभात-सम्पादकीय     आज हम अपने जिले की पावन माटी का गुणगान करना चाहते हैं जो धार्मिक अध्यात्मिक उर्जा से परिपूर्ण है।हमारा सौभाग्य है जो कि हम बाराह क्षेत्र की माटी पर रहते हैं और हर साल "बाराह छत्रन" का मेला आज भी लगता है।बारह क्षेत्र से सटी हुयी संत शिरोमणि विष्णु अवतार माने जाने वाले जगजीवन साहेब की तपोभूमि कोटवाधाम है।जिससे जुड़े चार गद्दी चौदह पावा अध्यात्मिक उर्जावान के केन्द्र हैं।कोटवाधाम में साहेब की चरणों में ही अपना धाम बनाने वाले कमोली धाम से जुड़े रिटायर्ड पुलिस सब इन्सपेक्टर कमलेशदास जी उनके पुत्र राजेशदास छोटे मंझले और बड़े भइया के भावी कर्णधार आदि इस तपोभूमि को नित प्रतिदिन उर्जा प्रदान कर रहें हैं।कोटवाधाम में साहेब की ड्योढ़ी पर हाजिरी लगाने वालों में हिन्दू भी मुसलमान भी है क्योंकि साहेब के शिष्यों में दोनों शामिल थे।साहब की दोस्ती उस जमाने में कौमी एकता को संदेश देने वाली मुस्लिम संत मलामत शाह से थी जो पड़ोस किंतूर के रहने वाले थे।एक बार कहते हैं कि एक बार साहेब घर की टूटी दीवाल पर बैठकर दातून कर रहें थे तभी मलामत शाह शेर से आते हुये दिखाई पड़े।कहते हैं कि साहेब ने मलामत को शेर आते देखा तो उन्होंने दीवाल से कहा कि क्या तुम चार चलकर स्वागत नही कर सकती?इतना कहते ही दीवाल चल पड़ी और साहेब की महिमा देखकर शेर से कूदकर चरण छूने दौड़े लेकिन साहेब ने उन्हें गले लगा लिया।इस तरह की तमाम कहावतें कोटवाधाम से जुड़ी हैं।कहा जाता है कि हथौंधा स्टेट के बारे में कहा जाता है कि यह साहेब से शापित ड्योढ़ी है।इसीलिए यह स्टेट निःसंतान है और रानी के बाद कोई उनका वंश नही है।कोटवाधाम ही हिन्दू मुस्लिम एकता व अध्यात्मिक उर्जा का केन्द्र नही है बल्कि जो रब है वही राम है का संदेश देने वाले सूफी संत हाजी वारिश अली शाह का तपोभूमि देवा शरीफ हमारी  माटी को धन्य कर रहा है।सतरिख सप्त ऋषियों की तपस्थली रही है और आज भी उसके तमाम अवशेष मौजूद हैं।भगवान भोलेनाथ का साक्षात प्रादुर्भाव लोधेश्वर के रूप में हमारी माटी को शिवधाम तो औसानेश्वर को शिव क्षेत्र बनाने के लिये हुआ है।हमारे जिले की माटी माटी नही बल्कि सोने से भी ज्यादा कीमती है। बाबा रामसनेहीदास सीधे राम नगरी अयोध्या से प्रतिनिधित्व करते हैं तो बुढ़वा बाबा में साक्षात भोलेनाथ भक्तों का कल्याण करते रहते हैं।बुढ़वा बाबा के पुराने जीर्ण शीर्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली क्षेत्रीय लोगों की कमेटी मंदिर को भव्यता प्रदान करने के लिए बधाई की पात्र है। हमारी भूमि संत शिरोमणि बाबा टीकाराम की जन्मभूमि है जो आज भी गोमती के करार पर हिन्दू मुसलमान दोनों के श्रद्धा आस्था का केन्द्र बनी हुयी है।हमारी माटी अध्यात्मिक ही नहीं बल्कि हर तरह से अतुलनीय है और यहाँ पर राय राजेश्वर बली जैसे देशभक्त हुये जिन्होंने साइमन कमीशन के विरोध में शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।हमारे ही जिले की सरजमीं हड़ाहा स्टेट है जहाँ पर लगी बाँस की अभूतपूर्व बाग में नेता जी सुभाषचन्द्र बोस अपनी फौज के साथ यहाँ पर रह चुके हैं।बाराबंकी के पहले हमारा जिला दरियाबाद था जिसे अंग्रेजों ने मच्छर अधिक होने के नाम पर हटाकर लखनऊ के निकट बंकी में बना दिया था।मच्छर का मतलब देशभक्त आजादी के मतवालों से थे क्योंकि एक बार यहाँ पर उनका खजाना लूट लिया गया था।हमारी माटी पर स्वतंत्रता सेनानी भी हमें गौरान्वित कर रहे हैं और अनगिनत लोग हैं जो आजादी की लड़ाई में अग्रणी रहे और आजाद हिन्द फौज में भी भर्ती हुये।हमारे जिले की खूबी है कि यहाँ पर बीबीपुर और भानपुर में ऐसी अजूबी कुआँ आज भी जहाँ का पानी पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।हमें गर्व है कि हमें घाघरा गोमती कल्याणी रारी जैसी नदियों का सानिध्य मिला हुआ है।हमारे जिले की महिमा अगम अपार है और हम धान गेहूं गन्ना मेंथा केला मक्का मटर ही नहीं पर धरती का काला सोना अफीम हेरोइन पैदा करते हैं।हमारे कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ पर आज भी हेरोइन मर्फिया की बिक्री होती है।हमारी माटी ने साहित्यिक क्षेत्र में किसी से कमजोर नहीं है और अब्दुल माजिद दरियाबादी खुमार बाराबंकवी मृगेश जी जैसे तमाम नाम हमें गौरान्वित कर रहें हैं।समाजवादी चिन्तक नेता रामसेवक यादव रफी अहमद किदवई महंत जगन्नाथ दास जैसे राजनेता हमारी ही धरती के लाल हैं।मुस्लिम धर्म गुरु अयातुल्ला खुमैनी मूल रूप से किंतूर से जुड़े हैं।देश की रक्षा करते हुए सीमाओं पर बलिदान होने से तमाम भारत माता के सच्चे सपूतों से भी हमारे जिले का भाल ऊँचा है।हमारे जिले की माटी की खूबी है कि जिस तरह यहाँ पर सारी फसलें पैदा होती हैं उसी तरह हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने वाले लोगों की कमी नही है।हम एक बार भी अपने जिले की माटी को माथे पर लगाकर आप सभी पाठकों को नमन वंदन अभिनन्दन करते हैं।यह हमारा सौभाग्य है कि हम भी इस माटी पर पैदा हुये जवान हुये और अब बुढ्ढा होने की तैयारी है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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              भोलानाथ मिश्र
   वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
  रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी
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