Monday, October 16, 2017

हमारे जीवन से जुड़ी होती है स्वास्थ सेवाएं- भोला नाथ मिश्रा की रिपोर्ट

जिस तरह से चाहेे गाड़ी या हवाई जहाज का इंजन हो या फिर पम्पिंग सेट का इंजन हो उसके के लिये मिस्त्री व कलपुर्जों का महत्व होता है उसी तरह  मनुष्य के लिये स्वास्थ्य सेवाओं का बहुत महत्व होता है। मिस्त्री व कलपुर्जों के अभाव में जिस तरह इंजन मृत समान हो जाता है उसी तरह डाक्टर सर्जन और दवा के अभाव में मनुष्य की असमय मौत हो जाती है या अंग भंग हो जाता है।इसीलिये सरकार आम देश व प्रदेश वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम करोड़ों अरबों रुपये खर्च करती है।यह सुविधाएं देश प्रदेश की राजधानियों या जिला मुख्यालयों पर ही बल्कि मिनी जिला अस्पताल के रूप ब्लाक स्तर पर करोड़ों के भव्य सुसज्जित भवनों में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलकर उपलब्ध कराई जा रही हैं।इतना ही नहीं प्राथमिक व उप प्राथमिक तथा ग्राम पंचायत स्तर पर महिला स्वास्थ्य केन्द्र तक खोलकर प्रदान की जा रही हैं। सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मौके पर कितना गरीब मध्यम वर्ग के गांव दिहात से जुड़े अन्त्योदय लोगों को कितना मिल रहा है इसे वह हर इंसान जानता है जो सस्ती या मुफ्त चिकित्सा की लालच में सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हो या प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हो चाहे मेडिकल कालेज या लखनऊ का लोहिया अस्पताल हो हर जगह डाक्टर तो मिल भी जाते हैं लेकिन सरकारी दवाओं के साथ बाहर से दवा खरीदने के लिए विवश किया जाता है।सरकार की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं की प्रसव क दौराने होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने के नाम अरबों खरबों खर्च हो रहा है।गर्भवती महिलाओं को तकलीफ होते ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये सरकार खासतौर पर ऐम्बुलेंस एक सौ दो नम्बर ही नहीं बल्कि  एक सौ आठ नम्बर को भी इससे अटैच कर रखा है। सरकार की एम्बुलेंस सेवा इस समय पिछले दिनों से धनाभाव में कहीं बाधित रहती है।स्थिति यह है कि अब दुर्घटनाओं में मरणासन्न घायलों का रक्तस्राव तत्काल रोककर जान बचाने के लिए अस्पताल पहुंचना अति आवश्यक होता है। कभी कभी क्या इस समय अधिकांश दुर्घटनाओं में अपनी पर सीएचसी लाना पड़ता है। जननी सुरक्षा योजना गर्भवती महिलाओं की देखभाल शुरू करके प्रसव पीड़ा होने पर तत्काल वाहन से सीएचसी पीएचसी या जच्चा बच्चा केन्द्र पहुंचाने के लिए गांव स्तर पर आशाबहू तक को तैनात कर रखा गया है।इतना ही नहीं प्रसव होने के स्वास्थ्य लाभ के लिए चौदह सौ की धनराशि भी  सप्रेम भेंट की जाती है।प्रसव के दौरान तमाम तरह की जांचें जरूरी होती हैं जिनमें से अल्ट्रासाउंड का रोल महत्वपूर्ण होता है और गर्भधारण के बाद कई बार करवाना पड़ता है।आजतक सभी सीएचसियों की कौन कहे तहसील स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पर उपलब्ध नही है।एक बार अल्ट्रासाउंड कराने पर चार सौ रूपये कम से कम खर्च होते हैं।आने जाने में जो किराया खर्चा लगता है वह अलग की बात है। सरकार जितनी धनराशि स्वास्थ्य लाभ के लिए देती है उसका दूना अल्ट्रासाउंड कराने में खर्च हो जाता है। प्रसव के अस्पताल पहुंचने पर उन्हें अधिकांशतः जिला अस्पाताल रेफर कर दिया जाता है। कुछ हमारी ग्रामीण महिला स्वास्थ्य कर्ता इस समय मामलें में सराहनीय योगदान देकर नार्मल डिलवरी करा रही हैं लेकिन पैसा हर जगह बोलता है।आजकल मार्ग दुर्घटनाओं में वृद्धि होती जा रही है और लोगों को तत्काल ट्रामा सेंटर की जरुरत होती है।क्रमशः। धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
            भोलानाथ मिश्र
   वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
  रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

No comments:

Post a Comment