Tuesday, October 17, 2017

बढ़ती दुर्घटनाएं मरते लोग - भोला नाथ मिश्रा की खाश पेशकस

कल हम जनजीवन से जुड़ी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और क्रियान्वयन पर चर्चा कर रहे थे।आज उसी कड़ी को आगे बढ़ा रहें हैं।
     इधर सरकार की बहुमुखी आधुनिक तकनीक से लैस राजमार्ग एवं मार्ग बनाने की योजनाओं के चलते इस समय इन मार्गों पर चलने वाले वाहनों की गति स्वतः दोगुनी हो गई है।नयी तकनीक के तेजगति वाले दो पहिया  चार छः दस व बीस पहिया वाले वाहनों की रफ्तार पहले के वाहनों की अपेक्षा दो चार गुना ज्यादा हो गई है।इस समय दो चार छः लेन वाली सड़क पर ही नहीं बल्कि सिंगल रोड का पार करना आसान नहीं होता है।इधर देखिये उधर वाहन आ जाता है और आधुनिक वाहनों में आवाज न होने के कारण उनके आने जाने का पता ही नहीं चल पाता है।ज्यौं ज्यौं मार्ग बढ़ते और चौड़े होते जा रहे हैं त्यौं त्यौं वाहनों की तादाद दिन दूनी रात चौंगुनी होती जा रही है।फलस्वरूप आजकल इन मार्गों पर मौतें रोजाना ताँडव करती है और रोजाना तमाम लोग गंभीर रूप से घायल मरणासन्न ही नहीं बल्कि मौके पर ही मर जाते हैं।रोजाना तमाम ऐसे लोगों की मौत हो जाती है जिन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा सरकारी सेवा नियमानुसार चलती है क्योंकि अपनी सेवा नहीं होती है कि जब चाहो इस्तेमाल कर लो।दुर्घटना होने पर पहले एम्बुलेंस सेवा को फोन करके आनलाइन रहने में दस मिनट कम से कम लग जाते हैं।दस बीस मिनट एम्बुलेंस आने में लग जाता है और रक्तस्राव होने से घायल की मौत सीएचसी पहुंचने से पहले ही हो जाती है।जो अतिगंभीर सीएचसी पहुंच भी जाते हैं उनकी मरहम पट्टी करके जिला अस्पताल पहुंचने में एक घंटा बीत जाता है और तमाम लोग जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही मर जाते हैं।जिला अस्पताल से सीधे ट्रामा सेंटर पहुंचने में कम से कम एक घंटा तो लग ही जाता है।इसीलिए ट्रामा सेंटर में जो घायल मरीज बेहोशीवस्था में जाता है तो सबसे पहले चेक किया जाता है कि वह जीवित है या मृत है। ट्रामा सेंटर में अगर घायल के साथ कोई नहीं तो उसे स्ट्रेचर पर जल्दी को लादकर अंदर ले जाने वाला नहीं मिलता है।पर्चा फीश देने के बाद विभिन्न जांचों में घंटों का समय लग जाता है।इतनी लम्बी प्रक्रिया तय करने के दौरान तमाम लोग मर जाते हैं। घायल को तत्काल ट्रामा सेंटर सुविधा अगर घटना के आधे घंटे के अदंर उपलब्ध करा दी जाय तो दुर्घटनाओं में मरने वालों मृत्यु दर घटाई जा सकती है।आधे घंटे के अंदर ट्रामा सेंटर सुविधा तभी संभव कराई जा सकती है जबकि मुख्य मार्गों से जुड़ी सभी सीएचसियों को मिनी ट्रामा सेंटर के रूप में परिवर्तित कर दिया जाय। आम लोगों को असमय दुर्घटना से बचाने का उत्तरदायित्व सरकार का होता है। धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।।ऊँ भूर्भुवः स्वः--------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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