Saturday, October 21, 2017

भगवान चित्रगुप्त की जयंती और भइया दूज पर विशेष

आज भारतीय संस्कृति से जुड़े दो बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व हैं जो हमारी श्रद्धा आस्था व विश्वास से जुड़े हैं।हमारे देश की दुनिया में अलग पहचान इसीलिए है क्योंकि हमारा देश श्रद्धा आस्था व विश्वास वाला देश है। हमारे तीज त्यौहार पर्व सिर्फ हमारी श्रद्धा आस्था व विश्वास को मजबूती प्रदान करते हैं।आज भगवान चित्रगुप्त जी की जयंती हैं और उनके वंशज परम्परा के मुताबिक कलम की पूजा करते हैं क्योंकि भगवान चित्रगुप्त की महिमा उनकी कलम से जुड़ी है।आज के दिन चित्रांश परिवार उनकी जयंती पर कलम का इस्तेमाल सिर्फ उनकी विशेष पूजा अर्चना के लिये ही करता है।भगवान चित्रगुप्त जी को ब्रह्मा जी का मानस पुत्र बताया गया है जिनकी उत्पत्ति उस समय हुयी थी जब ब्रह्मा जी सृष्टि रचना की शुरुआत करने से पूर्व समाधिस्थ हो गये थे।जबकि उनकी समाधि टूटी तो एक दिव्य पुरूष कलम दवात लिये उनके समक्ष खड़ा था। चित्रगुप्त जी की शादी एरावती और सुलक्षणा के साथ हुआ था।सुदक्षिणा से चार पुत्र पैदा हुये जबकि एरावती से आठ पुत्र पैदा हुये थे।यहीं बारह पुत्र ही कायस्थों की शाखाएं मानी जाती हैं।भगवान राम के राजतिलक के दिन भगवान चित्रगुप्त द्वारा विशेष परिस्थितियों में कलम रख देना आज परम्परा बन गयी है।
आज ही भइया दूज का पौराणिक आस्थाओं से जुड़ा पर्व भी है जो बहन भाई के अटूट रिश्ते को और अधिक मजबूत व महान बनाता है।यह पर रक्षाबंधन के पर्व से भी कठिन होता है क्योंकि बहनें भूखी प्यासी रहकर विभिन्न कष्ट निवारक लकड़ियों को बहुत ही कठिनाइयों से एकत्र कर भइया दूज का पूजन आंगन में करती हैं।पूजा अक्सर सामूहिक होती है और बहनें मिल जुलकर तमाम पूजन सामग्री एकत्र करती हैं। सर्व विघ्न विनाशक की पूजा अर्चना के बाद बहनें अपने भाइयों का रोली चंदन लगाकर उनका अभिनंदन कर उनके शतायु होने की कामना करती हैं। भाई के हमेशा स्वस्थ प्रसन्न खुशहाल और दीर्घायु होने की कामना बहनें इसलिए करती हैं क्योंकि भाई ही उनके भविष्य के संरक्षक होते हैं।माता पिता के न रहने पर भाई ही पिता की भी भूमिका निभाता है इसीलिए बहनें हमेशा भाई की खुशहाली की कामना किया करती हैं।जिनके कोई भाई नही होता है वह इन अवसरों पर अपने दुर्भाग्य को कोसती हैं।आज भाई बहन का पावन पवित्र पर्व एवं भगवान चित्रगुप्त की जयंती के अवसर पर हम सभी बहनों से आशीर्वाद की कामना करते हुए अपने सभी अग्रज सुधीपाठकों को चार दिवसीय पर्वो की श्रखंला समाप्ति के अवसर पर शुभकामनाएं देते हैं। एक भगवान चित्रगुप्त की कलम थी जो विधि विधान से बंधी न्यायप्रिय थी जो आज की तरह बिकती नहीं बल्कि भाग्य लिखती थी।आज का जमाना होता तो लोग कलम खरीदकर  अपनी बढ़िया बढ़िया भाग्य लिखवा लेते।कलम आत्मा की आवाज पर विधि विरूद्व कार्य करने वालों, समाज में व्याप्त कुरीतियों विसंगतियों व अन्याय अत्याचार के विरूद्ध चलनी चाहिए। अगर देखा जाय तो आज चित्रांशु भगवान की पूजा कायस्थ परिवार के साथ साथ कलम के सभी पुजारियों को करनी चाहिए।कलम ऐसी चींज है जो आग उगलती है तो जंगल में भी आग लग जाती है और जब शांतिदूत बनती है तो मिठास और पानी की फुहारें समाज को आनंदित कर एकता अखंडता के सूत्र में बांध देती है।कलम जुबान से भी तेज चलती है क्योंकि कलम को भगवान चित्रगुप्त और माता सरस्वती चलाती हैं। इन दोनों का कलम पर पूर्ण अधिकार होता है।धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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