Friday, October 6, 2017

जाने कुंडली में गुण मिलान का रहस्य अभय पांडेय के संग

सुखी वैवाहिक जीवन बेमेल विवाह और जन्मकुंडली (Happy Marital Life Marriages And Horoscopes)

* नामाक्षर अथवा जन्म नक्षत्र :- 

जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित है उसके आधार पर कुंडली मिलान किया जाता है। जिसे आम भाषा में गुण मिलान भी कहा जाता है।

इस विधि में वर एवं कन्या के नामाक्षर अथवा जन्म नक्षत्र की एक सारणी से मिलान करके परिणाम निकाला जाता है। इस गुण मिलान में त्रुटी हो जाए तो 36 में से 30 32 गुण मिलने वालों में भी तलाक की नौबत आ जाती है एवं की बार कोी भी गुम मिलने बाद बी दंपति सुकी वैवाहिक जीवन का र्निवाह करता है।

* गुण मिलान :-

गुण मिलान से अधिक महत्वपूर्ण है वर एवं वधु की कुंडली का पंचम भाव (पंचमेश) सप्तम भाव (सप्तमेश), नवम भाग (भाग्यदेश) एवं एकादश भाव (लाभेश) की विशेष रूप से जांच करना। 

पंचमेश भाव में से विद्या, पद, उन्नति एवं संतान के बारे में पता लगाया जा सकता है। वर तथा कन्या की वृद्धि का स्तर लगभग समान होना चाहिए। धार्मिक प्रवृति का विश्लेषण भी सफल विवाह के लिए आवश्यक होता है। 

* कुण्डलियों में नवम भाव बृहस्पति गृह :-

यदि कन्या धर्मपरायण है और वर विपरित प्रवृति का है तो भी बैमनस्य उत्पन्न हो सकता है। अत दोनों की कुण्डलियों में नवम भाव बृहस्पति गृह की स्थिति और बल का अवलोकन करना बी अति आवश्यक है। 

विवाह के उपरांत संतान की कामना भी स्वभाविक है। बृहस्पति गृह संतान का कारक ग्रह है। यदि वर का यह पक्ष दुर्बल है तो कन्या का दुर्बल होना चाहिए। पति पत्नि के आपसी रिश्तों की मजबूरी के कारण शुक्र तथा व्ययेश ग्रह है। इस पक्ष की ग्रहण विश्लेषण की आवश्यकता आज के युग में आति महत्वपूर्ण है। 

* शुक्र यौन अंगों और वीर्य का कारक :-

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्र ग्रह की अनुकूलता से व्यक्ति भौतिक सुख पाता है। इसके अलावा शुक्र यौन अंगों और वीर्य का कारक भी माना जाता है। विवाह तय करने के पहले कुंडली मिलान के समय ही इन योगायोगों पर अवश्य ही दॄष्टिपात कर लेना चाहिए। यदि शुक्र के साथ लग्नेश, चतुर्थेश, नवमेश, दशमेश अथवा पंचमेश की युति हो तो दांपत्य सुख यानि यौन सुख में वॄद्धि होती है।

* दांपत्य सुख का संबंध पति पत्नि दोनों से होता है :-

षष्ठेश, अष्टमेश उआ द्वादशेश के साथ संबंध होने पर दांपत्य सुख में न्यूनता आती है। काम प्रकृति की विभिन्नता के कारण असफल यौन संबंध जीवन में विषमता का कारण बन सकते हैं। 

इन सभी तत्वों का तात्पर्य यह है कि कुण्डली मिलान या गुण मिलान से अधिक महत्वपूर्ण है वर एवं कन्या के ग्रहों की प्रवृति का विश्लेषण करना। दांपत्य सुख का संबंध पति पत्नि दोनों से होता है। एक कुंडली में दंपत्य सुख हो और दूसरे की में नहीं तो उस अवस्था में भी दांपत्य सुख नही मिल पाता। 

* बेमेल विवाह और जन्मकुंडली :-

परिचय

हमारे समाज में बेमेल विवाह एक मामूली सी बात है | इसमें पति और पत्नी में भारी अंतर होता है | अधिकतर मामलों में पति की उम्र विवाह के समय पत्नी से दुगनी होती है | महिलाएं इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं | 

जैसा कि देखने में आता है कि पति पत्नी में काफी अंतर दिखाई देता है | सामान्य न लगने वाला यह संजोग बेमेल विवाह कहलाता है | हाल भी में उत्तर प्रदेश के कटिहार से एक ईमेल के जरिये एक नवविवाहिता ने अपने बारे में पूछा कि ऐसे क्यों हुआ | 

क्यों उसकी शादी उससे कम पढ़े लिखे युवक से कर दी गई | उस महिला ने बताया कि स्नातकोत्तर की डिग्री होते हुए भी एक ड्राइवर से उसकी शादी हो गई जो कि मैट्रिक भी पास नहीं है | 

शिक्षा की दृष्टि से देखें या करियर की दृष्टि से | उम्र के लिहाज से या शरीर के किसी नुख्स के नजरिये से, हर कोई बेमेल विवाह से दुखी हो सकता है | विशेषकर तब जबकि व्यक्ति विशेष को इस बात का पहले से पता न हो कि उसके साथ क्या होने जा रहा है | 

* कुंडली के अनुसार बेमेल विवाह :-

यदि आपकी कुंडली में सप्तमेश लग्न से असाधारण रूप से बलवान है तो आपमें और आपके जीवनसाथी में काफी अंतर होगा | 

यदि पुरुष की कुंडली में शुक्र नीच का हो और सप्तमेश शुक्र का शत्रु हो जैसे कि सूर्य, मंगल या चन्द्र तो विवाह

अनमेल होगा | ऐसे योग में आपकी पत्नी में और आपमें बहुत अधिक अंतर होगा | 

यदि किसी भी प्रकार से मंगल की दृष्टि शुक्र और सप्तम स्थान दोनों पर पड़ती हो तो विवाह अनमेल होगा | पति या पत्नी में से कोई एक अपंग होगा | 

शुक्र या गुरु को मंगल और शनि देख रहे हों और सप्तम स्थान पर कोई शुभ ग्रह न हो तो विवाह अनमेल होगा | इस योग में विवाह के बाद दोनों में से कोई एक मोटापे की और अग्रसर हो जाता है 

गुरु लग्न में वृषभ, मिथुन, कन्या राशी में हो और उस पर शनि की दृष्टि हो तो व्यक्ति का शरीर विवाह के बाद बहुत बेडोल हो जाता है इसके विपरीत यदि शुक्र स्वराशी में या अच्छी स्थिति में हो तो पति पत्नी में जमीन आसमान का फर्क नज़र आता है | 

शनि लग्न में हो और गुरु सप्तम में हो तो पति पत्नी की उम्र में काफी अंतर होता है | 

राहू केतु लग्न और सप्तम में हों और लग्न या सप्तम भाव पर शनि की दृष्टि हो तो देखने में पति पत्नी की सुन्दरता में भारी अंतर होता है यानि एक बेहद खूबसूरत और दूसरा इसके विपरीत | 

* क्या कारण हैं :-

लग्न आपका अपना शरीर है और सातवाँ घर आपके पति या पत्नी का परिचायक है | यदि खूबसूरती का प्रश्न हो तो सब जानते हैं कि राहू और शनि खूबसूरती में दोष उत्पन्न करते हैं | 

गुरु मोटापा बढाता है | शुक्र के कमजोर होने से शरीर में खूबसूरती और आकर्षण का अभाव रहता है | मंगल शरीर के किसी अंग में कमी ला सकता है और राहू सच को छिपा कर आपको वो दिखाता है जो आप देखना चाहते हैं | 

इसी कारण ऐसा होता है और यदि आपको ये वहम हो जाए कि आपके साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है या हो सकता है तो आपके विचार और प्रश्न आमंत्रित हैं | 

यदि मैं माध्यम बनकर आपके बेमेल विवाह में बाधक बन सकूं तो हो सकता है कि यह भी परमपिता परमात्मा की ही इच्छा हो |

ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461

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