Tuesday, October 17, 2017

मंगल का कन्या राशि में संचार जाने किस की खोलेगा किस्मत जाने राशिअनुसार

सूर्य को ग्रहों का राजा तो मंगल को सेनापति की संज्ञा दी गई है हमारे ज्योतिष शास्त्र में,मंगल के सूर्य,चन्द्र,और गुरु मित्र तो शुक्र,शनि समता का भाव लिए हुए साथ हीं बुध शत्रुवत भाव से मंगल का साथ देते हैं।इन ग्रहों की किस भाव में उपस्थिति कैसे प्रभावित कर रही है आपकी राशि को यह कन्या राशिस्थ मंगल के आधार पर विवेचित किया जाएगा।।मंगल शुभ स्थितियों में शुभ तो विषम स्थितियों में रक्त,उच्चरक्तचाप,चर्मरोग,कुष्ठ रोग,हड्डी संबंधी रोग और पित्त ज्वर आदि विकार देते हैं।
आइए जानते हैं मंगल का कन्या राशि में संचार जो कि 13 अक्टूबर 2017 को हो रहा है, सभी बारह राशियों को किस प्रकार से प्रभावित करेगा-
चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ

मेष-मेष राशि एवं लग्न वाले जातकों के लिए अष्टमेश एवं लग्नेश का मंगल गोचर में छठे भाव में उपस्थित रहेगा छठे भाव में उपस्थिति के कारण इस अवधि में शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी कार्य बाधा से मुक्त होंगे ननिहाल पक्ष के यहां मांगलिक कार्य संपन्न हो सकते हैं। नवम भाव पर चौथी दृष्टि के कारण भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा, कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी व्यय भाव पर सातवीं दृष्टि के कारण भूमि मकान आदि में खर्च होगा। बाहरी स्थान से संबंध बनेंगे लग्न पर आठवीं दृष्टि के कारण शरीर स्वस्थ रहेगा 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवं शुक्र के साथ युद्ध के कारण जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है 17 अक्टूबर से 3 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण कामवासना में वृद्धि होगी, नवीन वस्त्र एवं आभूषण की प्राप्ति होगी स्वादिष्ट व्यंजन में रुचि बढ़ेगी सुंदरता बढ़ेगी एवं सौंदर्य के प्रति आकर्षण का भाव जाग्रत होगा। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी सूर्य है इस अवधि में शत्रुओं पर विजय एवं जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट हो सकता है 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है इस अवधि में वाहन एवं मकान आदि का सुख प्राप्त होगा। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा इसको स्वामी मंगल है इस अवधि में मेष राशि वालों को पूर्ण सफलता की प्राप्ति होगी।

इ, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वु, वे, वो

वृष-लग्नेश एवं व्ययेश मंगल की गोचर से पांचवे भाव में उपस्थिति के कारण संतान से कष्ट प्राप्त हो सकता है। परिवार में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा खर्च की अधिकता रहेगी। रक्त एवं जोड़ सम्बन्धी रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। मन में उद्वेग रहेगा, अष्टम भाव पर दृष्टि के कारण मन की एकाग्रता भंग होगी तथा शारीरिक कष्ट हो सकता है आय स्थान पर मंगल की दृष्टि के कारण रोजगार से आय में वृद्धि होगी बड़े भाई से मतभेद हो सकता है व्यय भाव  पर आठवीं दृष्टि के कारण पेट की अधिकता रहेगी नेत्र में विकार का योग है 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवं शुक्र के साथ युति के कारण विद्या में रुकावट एवं संतान से मतभेद का योग है 17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक मंगल की शुक्र के साथ युति के कारण कामवासना एवं भोग विलास में वृद्धि होगी जीवन साथी के साथ कलह पूर्ण वातावरण बनेगा 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा जिसका स्वामी सूर्य है इस अवधि में विद्या में कमी आ सकती है परंतु सन्तान को सफलता की प्राप्ति होगी 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र रहेगा हस्त नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है,फलस्वरूप मित्रों से मतभेद हो सकता है। उद्वेग में वृद्धि होगी मन की चंचलता के कारण कार्य में सफलता की  प्राप्ति नहीं होगी। 19 नवंबर से 29 नवंबर तकमंगल चित्रा नक्षत्र मे रहेगा इस का स्वामी मंगल है इस अवधि में शारीरिक कष्ट का योग है। हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होगी।

का, की, कु, घ, ड, छ, के, को, हा

मिथुन- षष्ठेश एवं आयेश मंगल की गोचर चतुर्थ भाव में उपस्थिति के कारण माता पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। भूमि से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। शत्रुओं में वृद्धि हो सकती है।दाम्पत्य जीवन में कटुता आ सकती है।उदर विकार से शारीरिक कष्ट  हो सकता है 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवं शुक्र के साथ युति के कारण इस अवधि में माता को कष्ट हो सकता है भूमि से संबंधित विवाद बढ़ सकता है 17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण भोग विलास में बढ़ती प्रवृत्ति के कारण शारीरिक कष्ट एवं जीवन साथी के साथ मतभेद पैदा हो सकता है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर  मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा इस का स्वामी सूर्य है फलस्वरूप माता पिता को इस अवधि में शारीरिक कष्ट हो सकता है 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है इस अवधि में धन की वृद्धि हो सकती है परंतु कुटुंब में कलहपूर्ण वातावरण रहेगा क्रोध की अधिकता के कारण मन अशांत रहेगा। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी मंगल है इस अवधि में माता को कष्ट एवं भूमि के कारण शत्रुओं में वृद्धि होगी उदर जनित रोग से कष्ट होगा। हनुमान जी की आराधना लाभकारी सिद्ध होगी।

ही,  ही, हे, हो, डा डी, डू, डे, डो

कर्क- पंचमेश एवं दशमेश मंगल की गोचर से तृतीय भाव में उपस्थिति के कारण पराक्रम के प्रभाव से कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी। राजकीय कार्य में सफलता प्राप्त होगी। ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। छठवें भाव पर चौथी दृष्टि के कारण शत्रु प्रभावहीन होंगे, तथा संधि करने के लिए विवश होंगे। भाग्य भाव पर सातवीं दृष्टि के कारण साहसिक कार्य में सफलता प्राप्त होगी तथा समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। दशम भाव पर आठवीं दृष्टि के कारण राजदरबार में सम्मान की प्राप्ति होगी। विभागीय परीक्षाएं एवं प्रतियोगिता में सफलता की प्राप्ति होगी 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवं शुक के साथ युति के फलस्वरूप परिवार के साथ मधुर सम्बन्ध रहेंगे वाहन सुख की प्राप्ति होगी। 17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण भोग विलास एवं सौंदर्य से संबंधित वस्तुओं की प्राप्ति होगी, सुख समृद्धि में वृद्धि होगी। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा इस का स्वामी सूर्य है परिणामस्वरूप इस अवधि में विभिन्न आयाम से धन की प्राप्ति होगी। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी चंद्रमा है इस अवधि में मन प्रसन्न रहेगा एवं शरीर स्वस्थ रहेगा। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा इस का स्वामी मंगल है, इस अवधि में हर क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी।

 

मा, मी,मू,मे,मो,टा,टी,टू,टे

सिंह- चतुर्थेश एवं नवमेश मंगल की गोचर से द्वितीय भाव में उपस्थिति के कारण संचित धन में वृद्धि होगी। वाणी दोष के कारण कुटुंब में कलह होगा इसलिए इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखने से लाभ मिलेगा। रक्त से संबंधित रोग से शरीर अस्वस्थ रहेगा। पंचम भाव पर चौथी दृष्टि के कारण संतान एवं विद्या का सुख प्राप्त होगा। अष्टम भाव पर सातवीं दृष्टि से शारीरिक कष्ट एवं आध्यात्म में कमी आ सकती है। नवम भाव पर आठवीं दृष्टि के कारण भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा कार्य में सफलता प्राप्त होगी। वाणी की कठोरता के कारण कार्य क्षेत्र में विवाद भी हो सकता है। 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ मंगल की युति के कारण संचित धन में वृद्धि होगी परंतु क्रोध की अधिकता रहेगी। कुटुंब में विवाद रहेगा। 17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक शुक्र की युति के कारण कार्य क्षेत्र में पूर्ण सफलता प्राप्त होगी आलस्य की अधिकता रहेगी आलस्य से बचें कार्यक्षेत्र प्रभावित हो सकता है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा स्वामी जिसका सूर्य है परिणामस्वरूप आर्थिक वृद्धि का योग है पदोन्नति भी संभव है परंतु क्रोध पर नियंत्रण रखना अति आवश्यक है क्रोध की अधिकता के कारण समस्त सफल योग असफल बन सकते हैं। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर मंगल हस्त नक्षत्रमें रहेगा तक रहेगा इसका स्वामी चंद्रमा है इसमें खर्च की अधिकता के कारण मन चिंतित रहेगा। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र मे रहेगा, जिसका स्वामी मंगल है इस अवधि में पारिवारिक कलह एवं चोट से शारीरिक कष्ट हो सकता है।

 

टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

कन्या-तृतीयेश एवं अष्टमेश मंगल की गोचर से लग्न में उपस्थिति के कारण ज्वर एवं रक्त से संबंधित रोग से हो सकता है  चोट का भी भय है। अकारण मन में चिंता बनी रहेगी। मित्र एवं छोटे भाई भाई बहन के लिए समय उत्तम है। जीवनसाथी को भी उष्णता एवं ज्वर से कष्ट हो सकता है। चौथे भाव पर चौथी दृष्टि के कारण माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है भूमि में निवेश करने से हानि होगी। सप्तम भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण दांपत्य सुख में कमी आएगी अष्टम भाव पर आठवीं दृष्टि के कारण अध्यात्म से लाभ मिलेगा। अतः इस अवधि में हनुमान जी की आराधना अत्यंत श्रेयस्कर होगी। 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ युति के कारण शारीरिक कष्ट एवं दांपत्य सुख में कमी रहेगी। 17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक शुक्र सूर्य की युति के कारण मन में सौंदर्य के प्रति आकर्षण का भाव बढ़ेगा जिसके कारण दांपत्य जीवन में कलह हो सकता है। गुप्तेन्द्रिय रोग से कष्ट की प्राप्ति हो सकती है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है इस अवधि में क्रोध  के कारण विवाद उत्पन्न होने का योग बन रहा है विवाद से बचें। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा, इसका स्वामी चंद्रमा है इस अवधि मेंआय में वृद्धि हो सकती है। 19 नवंबर से 29 नवंबर तकमंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा जिसका स्वामी स्वयं मंगल है इसमें मानसिक चिन्ता बढ़ेगी। शरीर अस्वस्थ रहेगा जीवनसाथी को शारीरिक कष्ट का योग भी बन रहा है,सावधान रहें।

रा, री, रु, रे, रो, ता, ती, तू, ते

तुला- द्वितीयेश  एवं सप्तमेश मंगल की गोचर से बारहवें भाव में उपस्थिति के कारण व्यय की अधिकता के कारण धन की हानि होगी । शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होगी पेट के निचले हिस्से में फोड़ा आदि से कष्ट हो सकता है। ताप  से संबंधित रोग ज्वरादि से कष्ट रहेगा। तीसरे भाव पर चौथी दृष्टि के कारण मित्र एवं भाई बंधुओं से विरोध हो सकता है छठे भाव पर सातवीं दृष्टि के कारण पथरी  आदि  रोग से कष्ट हो सकता है सप्तम भाव पर आठवीं दृष्टि से जीवनसाथी का शरीर स्वस्थ रहेगा परंतु दांपत्य जीवन के सुख में कमी रहेगी। 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ युति के कारण नेत्र विकार से कष्ट हो सकता है ।17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण आमोद- प्रमोद में खर्च की अधिकता होगी जो मन की अशांति का कारण बनेगा। शारीरिक कष्ट भी प्राप्त होने का योग बन रहा है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल सूर्य की उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा परिणामस्वरूप बाहरी यात्रा में खर्च होगा नेत्र विकार से कष्ट की प्राप्ति हो सकती है ।28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी चंद्रमा है इस अवधि में राजकीय कार्य में सफलता मिल सकती है, कार्य क्षेत्र से संबंधित चिंता रहेगी। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा जिसका स्वामी स्वयं मंगल ही है इस अवधि में कुटुंब से विरोध एवं धन की हानि हो सकती है ।

 

तो,ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

वृश्चिक-लग्नेश एवं षष्ठेश मंगल की गोचर से ग्यारहवें भाव में उपस्थिति के कारण आशा से अधिक धन की प्राप्ति होगी शत्रु पराजित होंगे। शरीर स्वस्थ रहेगा संतान एवं विद्या का पूर्ण सुख प्राप्त होगा। परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। चौथी दृष्टि से द्वितीय भाव को मंगल देख रहा है परिणामस्वरूप संचित धन में वृद्धि का योग है तथा विभिन्न आयाम से धन की प्राप्ति हो सकती है। सातवें दृष्टि से पंचम भाव पर मंगल की दृष्टि के कारण विद्या एवं संतान का सुख प्राप्त होगा विद्या के प्रभाव से आय में वृद्धि हो सकती है। आठवीं दृष्टि से छठवें भाव को मंगल देख रहा है फलस्वरूप शत्रु को हानि होगी ।13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ युति के कारण बाहरी स्थान से लाभ मिलेगा, हर क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होगी।17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक मंगल एवं शुक्र की युति के कारण बाहरी स्थान से आय में वृद्धि तथा लंबी यात्रा का योग है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा इस का स्वामी सूर्य है इस अवधि में कार्य क्षेत्र में पूर्ण सफलता की प्राप्ति होगी। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त में रहेगा  इसका स्वामी चंद्रमा है, इस अवधि में भाग्य का पूर्ण सुख प्राप्त होगा, आशा के अनुकूल आय में वृद्धि होगी। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा जिसका  स्वामी स्वयं मंगल है इस अवधि में शरीर स्वस्थ रहेगा एवं धन एवं संतान सुख में वृद्धि होगी।

 

ये, यो, भा, भी, भू, ध, फ, ढ, भे

धनु-पंचमेश एवं व्ययेश मंगल की गोचर से दशम भाव में उपस्थिति के कारण कार्य क्षेत्र की सफलता में बाधा उत्पन्न हो सकती है धनु राशि वाले जातक के पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है, विद्या के प्रभाव से मान सम्मान की प्राप्ति होगी, बाहरी स्थानों से भी धन लाभ का योग बन रहा है। चौथी दृष्टि  लग्न पर होने के कारण मन में अशांति रहेगी, अकारण तनाव बना रहेगा। रक्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है ।चतुर्थ भाव पर सातवीं दृष्टि के कारण भूमि में वृद्धि  हो सकती है परंतु माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। पंचम भाव पर आठवीं दृष्टि के कारण संतान के लिए उत्तम योग की प्राप्ति हो सकती है। 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ युति के कारण राजकीय कार्य में सफलता की प्राप्ति हो सकती है, परंतु क्रोध की अधिकता के कारण बना हुआ कार्य भी बिगड़ सकता है धनु राशि वालों को क्रोध पर नियंत्रण अनिवार्य है।17 अक्टूबर से 3 नवंबर तक मंगल एवं शुक्र की युति से इस अवधि में स्त्री मित्र के कारण कार्य क्षेत्र में एवं अपयश की प्राप्ति हो सकती है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल सूर्य की उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विचरण करेगा इस अवधि में कार्य क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति हो सकती है परंतु क्रोध की अधिकता कार्यक्षेत्र में व्यवधान की स्थिति बनाएगी अतः क्रोध पर नियंत्रण रखें। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक हस्त नक्षत्र में मंगल रहेगा हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है इस अवधि में धनु राशि वालों को रक्त संबंधित रोग से कष्ट एवं मन की अशांति प्राप्त हो सकती है। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा उसका स्वामी स्वयं मंगल है इस अवधि में कार्य में सफलता प्राप्ति होगी और कार्य की सफलता में सहायक सिद्ध होंगे।

भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

मकर- चतुर्थेश एवं आयेश मंगल की गोचर से नवम भाव में उपस्थिति के कारण धार्मिक कार्य में अरुचि की स्थिति बन सकती है कार्यक्षेत्र में बाधा उत्पन्न होगी । भाई बंधु एवं मित्र जनों से मतभेद हो सकता है,आयेश की भाग्य भाव में उपस्थिति के कारण आय के लिए यह समय उत्तम है परंतु व्यय की अधिकता रहेगी जिसके कारण धन की कमी महसूस होगी। बारहवें भाव पर चौथी दृष्टि के कारण भूमि आदि में धन का निवेश करने पर खर्च की अधिकता होगी साथ ही यात्रा में भी धन खर्च हो सकता है। तीसरे भाव पर सातवीं दृष्टि के कारण पराक्रम में हानि एवं मित्रों से विरोध हो सकता है। अतः मित्र से मित्रवत व्यवहार में अपने भाव पर नियंत्रण रखें। चतुर्थ भाव पर आठवीं दृष्टि के कारण माता का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा भूमि मकान आदि में खर्च हो सकता है ।13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवं शुक्र के साथ युति के कारण इस अवधि में कार्यक्षेत्र में सफलता की प्राप्ति नहीं होगी। 17 अक्टूबर से 3 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण आय में वृद्धि का योग है। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी सूर्य है इस अवधि में कार्य क्षेत्र में सफलता की कमी महसूस होगी कठिन परिश्रम के बावजूद पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं हो सकती है। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी चंद्रमा है इस अवधि में व्यवसाय से लाभ की प्राप्ति होगी,परन्तु मानसिक चिंता बढ़ सकती है। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी मंगल है इस अवधि में मित्र एवं बंधुओं से विरोध हो सकता है परंतु आय में वृद्धि होगी।

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा 

कुम्भ-तृतीयेश एवं दशमेश मंगल की गोचर से अष्टम भाव में उपस्थिति के कारण संचित धन में हानि हो सकती है रक्त एवं ताप जनित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। गुदा रोग बवासीर अधिक से अधिक कष्ट मिल सकता है। चोट आदि आघात का योग बन रहा है कुटुंब में कलहपूर्ण वातावरण बन सकता है। ग्यारहवें भाव पर मंगल की चौथी दृष्टि के कारण आय के मार्ग में अवरोध उत्पन्न होगा। धन भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण आकस्मिक धन हानि हो सकती है शेयर बाजार या अन्य क्षेत्र में निवेश के पहले पूर्ण सोच समझ ले। तीसरे भाव पर पूर्ण दृष्टि के कारण भाई बहन का सुख प्राप्त होगा पराक्रम का अच्छा सुख मिलेगा। 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ युति के कारण इस अवधि में आकस्मिक धन हानि हो सकती है आकस्मिक घटना के कारण शारीरिक कष्ट की प्राप्ति हो सकती है। 17 अक्टूबर से 3 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण अनैतिक संबंध बन सकते हैं जिसके कारण समाज में अपयश की प्राप्ति हो सकती है सावधान रहें। 13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल सूर्य की उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा इस अवधि में आकस्मिक घटना घटती है पूर्ण सावधानी की आवश्यकता है सूर्य की उपासना करें लाभ होगा। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक शत्रुओं के कारण धन की हानि एवं मानसिक चिंता का योग बन रहा है। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र में रहेगा इसका स्वामी स्वयं मंगल है इस अवधि में कुंभ राशि वालों को कार्य क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति एवं आय में वृद्धि की प्राप्ति होगी।

दी दू, थ, झ, ञ दे, दो, चा, ची

मीन- द्वितीयेश एवं नवमेश मंगल की गोचर से सातवें भाव में उपस्थिति के कारण व्यवसाय में तथा भाग्य में वृद्धि होगी। साहसिक कार्य से समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। अध्यात्म के प्रति लगाव बढ़ सकता है एवं हड्डी से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट हो सकता है। जीवनसाथी को भी शारीरिक कष्ट का योग बन रहा है। दांपत्य जीवन में कमी महसूस होगी दशम भाव पर मंगल की चौथी दृष्टि के कारण प्रशासनिक कार्य में सफलता की प्राप्ति होगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें क्रोध पर नियंत्रण न रखना कार्य क्षेत्र में सफलता का कारण बन सकता है। लग्न पर मंगल की पूर्ण दृष्टि के कारण चोट आदि से शरीर को कष्ट की प्राप्ति हो सकती है। धन भाव पर मंगल की आठवीं दृष्टि के कारण व्यवसाय से लाभ हो सकता है क्रोध की अधिकता के कारण परिवार से विरोध का सामना करना पड़ सकता है। नेत्र विकार से कष्ट का योग बन रहा है। 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक सूर्य एवम शुक्र के साथ युति के कारण जीवनसाथी को जननेंद्रिय संबंधित रोग से कष्ट की प्राप्ति हो सकती है 17 अक्टूबर से 2 नवंबर तक शुक्र के साथ युति के कारण स्त्री मित्र के कारण दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है।13 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मंगल सूर्य की उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विचरण करेगा इस अवधि में पित्त से संबंधित रोग से शारीरिक कष्ट की प्राप्ति हो सकती है। 28 अक्टूबर से 19 नवंबर तक मंगल हस्त नक्षत्र में रहेगा जिसका स्वामी चंद्रमा है संतान के लिए यह अवधि उत्तम है। संतान से संबंधित समस्या के कारण मन की अशांति भी प्राप्त हो सकती है। 19 नवंबर से 29 नवंबर तक मंगल चित्रा नक्षत्र मे रहेगा इसका स्वामी मंगल है इस अवधि में तीक्ष्ण भोजन से बचें, शरीर के कष्ट की प्राप्ति का कारण तीक्ष्ण भोजन बन सकता है रक्त एवं ताप से शारीरिक कष्टकी प्राप्ति हो सकती है इस अवधि में भाग्य का सुख प्राप्त होगा एवं संचित धन में वृद्धि का भी योग बन रहा है।

ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461

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