Thursday, October 26, 2017

बसपा प्रमुख बहन जी की धर्म परिवर्तन की धमकी पर भोला नाथ मिश्रा की कलम से विशेष लेख

लोकतंत्र में हर राजनैतिक दल को राजनीति करके अपनी मजबूती लाने का हक है।देश का कोई भी व्यक्ति नियमानुसार राजनैतिक दल का गठन करके नियमानुसार चुनाव आयोग से राजनैतिक दल की मान्यता प्राप्त कर सकता है।जनता और पार्टी के चुने राजनेता की अपनी औकात और उसके अपने अधिकार होते हैं।अभिव्यक्त की आजादी हर देशवासी को है लेकिन जनप्रतिनिधि को विशेष होती है क्योंकि उसकी आवाज ग्राम पंचायत से लेकर ससंद तक गूंजती है। राजनीति में किसी भी दल के नेता अपनी बात कहने का हक है उसे उसके इस अधिकार से वंचित करना उसके अधिकारों पर हमला है।राजनीति में विरोधियों से मुकाबला किया जाता है और अपनी बातों तर्कों से जनता को समझाकर उसकी सहानुभूति ली जाती है।आजादी के बाद आजतक किसी भी दल ने विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में कभी देश छोड़ने या धर्म छोड़ने की धमकी नहीं दी है।यह पहला अवसर है जबकि बसपा प्रमुख बहन मायावती जी ने सत्तादल की गतिविधियों एवं आचरण से खिन्न होकर धर्म परिवर्तन करने की धमकी दी गयी है।बहन जी के इस बयान से राजनैतिक गलियारों में हलचलें तेज हो गयी है और चारों तरफ से इसकी नींद शुरु हो गई है।धर्म परिवर्तन का दौर आजादी के बाद से ही चल रहा है और कुछ लोग राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए धर्म परिवर्तन कर चुके हैं।अब उन्हीं लोगों के पदचिन्हों पर बहन जी बढ़ रही हैं और सामूहिक धर्म परिवर्तन की योजना बना रही हैं।इतना ही नहीं मूर्ति पूजा व हिन्दू देवी देवताओं का अपमान कर चुकी हैं और समाज के एक बड़े वर्ग को मनुवादी बताकर उसे अपमानित कर रही हैं।दूसरी तरफ उन्हीं मनुवादियों को गोदी में बिठाकर सत्ता का सुख भी भोग चुकी हैं।बहन जी के शासनकाल और उनकी कार्यशैली की लोग याद करते हैं और मिशाल पेश करते हैं।बहन जी की पार्टी का सर्वनाश पिछले लोकसभा चुनावों में हो चुका है और बहन जी राज्यसभा सदस्य बनकर लोकसभा पहुंची थी।सासंद में उन्होंने सत्ता दल बोलने न देने का आरोप लगाते हुए अपनी सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया था।उनका गुस्सा अभी भी शांति नहीं हुआ है और अब हिंदूवादी भाजपा सरकार को धर्म परिवर्तन करने की धमकी दे रही हैं। बहन जी की धमकी इस समय चर्चा का विषय बनी हुयी है और सर्वत्र इसकी निंदा हो रही है।राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए धर्म परिवर्तन की धमकी देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।बहन जी के साथ हिन्दुओं की एक बड़ी जमात हमेशा रही है और आज भी है।दलितों का एक भोलाभाला वर्ग बहन जी के दलित होने के कारण  नाते उनके साथ है किन्तु वह अपने आप को हिन्दू मानता है।वह बहन जी को छोड़ सकता है लेकिन धर्म परिवर्तन नही कर सकता है।बहन जी का लगाव व नजदीकी बौद्ध धर्म गुरूओं से शुरू से रहा है और समय समय पर वह उनका सम्मान भी कर चुकी हैं।दलितों को बरगलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराने का अभियान देश के विभिन्न हिस्सों में चलाया जा रहा है और इसमें ईसाई मशीनरिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म का विस्तार भी दलितों के माध्यम किया जा रहा है।बहन जी की धमकी उनकी राजनीति का हिस्सा भले ही न हो किन्तु उनके राजनैतिक जीवन का लक्ष्य माना जा रहा है। धन्यवाद।। सुप्रभात/ वंदेमातरम् / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः----/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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          भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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