Sunday, October 8, 2017

कौन खत्म कर रहा है गांव समाज का आपसी भाईचारा

सरकार की तमाम विकासोन्मुखी योजनाओं के बावजूद गाँवों की गरीबी दूर नही हो पा रही है।सरकार लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने के लिये चाहे जितनी कोशिश करें लेकिन गरीबों की संख्या घटने की जगह बढ़ती जा रही है।गरीबी उन लोगों में ज्यादा है तो सिर्फ हराम की ढूंढते रहते हैं और कोई अपना कार्य नहीं करते हैं।ऐसे लोग सुबह से शाम दूसरों की कमियां निकाला कर उन्हें ब्लैकमेल कर अपनी रोजी चलाते रहे।गाँव के लोग अपने दुख से उतना दुखी नहीं होते बल्कि वह  दूसरे के सुख से दुखी रहता है।ऐसे लोग अपना कार्य नहीं करते हैं बल्कि अपना समय सारा अपने विरोधी को मिटाने में खर्च करते हैं।वह खुद गलत होते हैं लेकिन अपने को बड़ा पाक़ साफ मानकर दूसरे को दोषी बनाने में जुट जाते हैं।गरीबों को फंसाना और बचाना ऐसे लोगों का पेशा होता है ऐसे लोग किसी के भी खास नहीं होते बल्कि जो उनके पास पहुंच जाता है उनका खास हो जाता है।जब तक धोखाधड़ी का धंधा चलता रहता है तब तक उस गरीब से हमदर्दी दिखाते रहते हैं।जिनका दामन खुद गंदा होता है वहीं अपने को पाक़ साफ साबित करने के लिए दूसरों पर आरोप लगाकर खुद दूध के धोये बन जाते हैं।ऐसे लोग होते जिनसे भले लोगों का जीना हराम कर देते हैं।ऐसे ही लोग पेशेवर होते हैं जो गाँव का अमनचैन छीनकर वैमनस्य पैदा कर देते हैं।ऐसे लोग पल पल गिरगिट की तरह अपने रंग बदलते रहते हैं और कभी नेता बन जाते तो कभी सत्ता दल के समर्थक कभी विपक्ष पत्रकार डाक्टर बनकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।ऐसे असमाजिक तत्वों के कारण समाज में वैमनस्यता फैलती है और आपसी भाईचारा प्रभावित होता है।साथ ही गाँव के विकास कार्य बाधित हो जाते हैं।
ऐसे पेशेवर लोग किसी के भीे नहीं होते हैं और मौका पाने पर अपने परिवार पट्टीदार को भी नहीं छोड़ते हैं।जो लोग इनके चक्कर में फंस जाते हैं उन्हें कंगाल बना दिया जाता है और अधिकारियों को देने के नाम पर उनकी चमड़ी उधेड़ ली जाती है।ऐसे बहुरूपिये हर गाँव में मिलते हैं जो आपस में लड़ाकर आपसी भाईचारा खत्म करवा देते हैं।जो इनके कृत्यों का विरोध करता है वह उसका दुश्मन बन जाता है और उसकी तरह तरह से शिकायत करके उसका जीना दूभर कर दिया जाता है।ऐसे ही लोग होते जिनकी वजह आज समाज छिन्न भिन्न हो रहा है तथा आपसी भाईचारा खत्म हो जाता है।जबतक गांव का कोई मुखबिरी नही करता है तब तक चोरी डकैती राहजनी या अपराधिक गतिविधियां नहीं होती है।ऐसे ही लोग होते हैं जो समय समय पर मुंहनोचवा मुड़ कटवा चोटी कटवा की अफवाहों को गति देकर अपना उल्लू सीधा कर समाज में भय व दहशत फैलाते रहते हैं।लोग ऐसे खुराफाती लोगों से डरते हैं इसलिए वह उनके कृत्यों का विरोध भी नहीं कर पाते हैं।समाज में छिपे बैठे इन लोगों से दुश्मनी करने का मतलब अपनी नींद हराम करना होता है।ऐसे लोगों को चिन्हित कर इन पर लगाम लगाकर लगाने की जरूरत है ताकि गाँव का सौंदर्य बना रहे और विकास कार्य बाधित न हो।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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             भोलानाथ मिश्र
   वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
  रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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