Monday, October 23, 2017

पत्रकार उत्पीड़न और उनकी जिम्मेदारी पर विशेष रिपोर्ट -भोला नाथ मिश्रा की कलम से

कल फैजाबाद प्रेस क्लब में  इंडियन यूथ वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में पाँचवें यूथ फेस्टिवल का आयोजन किया गया था।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजनीति में अपनी अलग पहचान और अनोखा अंदाज रखने वाले पूर्व सासंद और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे डाक्टर निर्मल खत्री जी रहे।इस कार्यक्रम के अध्यक्ष सूरज पाण्डेय जी थी जो पूर्वांचल से जुड़े हुए हैं।इस कार्यक्रम में पूर्वांचल से तमाम हमारे प्रिंट इलेक्ट्रिक और सोशल मीडिया से जुड़े साथी भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वालों को सम्मानित भी किया गया।यह मेरा सौभाग्य था कि इस कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर पिछले पाँच वर्षों से अनवरत गाँव देश प्रदेश दुनिया की घटनाओं समस्याओं समाजिक गतिविधियों पर आधारित सुप्रभात सम्पादकीय लिखने के लिए सम्मानित करके प्रसंशा पत्र प्रदान किया गया।हम सम्मानित करने वाली समाज में सक्रिय अग्रणी भूमिका निभाने वाली संस्था के समस्त पदाधिकारियों व सम्मानित सदस्यों का दिल की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं। इस कार्यक्रम में पत्रकारों पर हो रहे निरंतर हमले व हत्याओं का मामला जोरशोर से उठाया गया।अभी हमारे एक सुल्तानपुर के अंकित तिवारी और अखिल भारतीय पत्रकार संघ से जुड़े कुशीनगर के राम आधार द्विवेदी जी पूर्वाचल में हो रही ताबड़तोड़ घटनाओं पर हमारे पास फोन करके चिंता व्यक्त कर चुके हैं।इधर लगता है कि पत्रकारों की जान की आफत आ गयी है।योगीजी का अपराधी मुक्त अभियान भले ही अबतक अपने चरम पर न पहुंच सका हो लेकिन पत्रकार उत्पीड़न जरूर चरम पर पहुंच गया है।पत्रकार जैसे ऐसी मूली गाजर की तरह बन गया कि जो चाहता है वहीं खा जाने की धमकी दे देता है और मौका मिलते ही धमकी को असलियत में बदल देता है।पत्रकार को मारना गोहत्या करने के बराबर होता है क्योंकि उसके पास सिर्फ कलम होतीे है और वह कलम का बहादुर सिपाही होता है।सरकार और समाज का दायित्व बनता है कि कलमकारों पत्रकारों की सुरक्षा करें किंतु पत्रकारों का भी दायित्व बनता है कि वह समाज और सरकार के मध्य दोहरे आइने की भूमिका अदा करें।पत्रकारिता व्यवसाय नहीं बल्कि एक सच्ची समाज सेवा होती है।पत्रकारिता समाज और सरकार की दिशा व दशा बदल देती है।पत्रकारिता समाज व सरकार के बीच का वह कडु़वा सच होता है जिसे कुछ असमाजिक तत्व बर्दाश्त नहीं कर पातें हैं और उस कड़ुवें सच के चलते पत्रकार की कलम नहीं जुबान बंद कर देते हैं।अभी पिछले महीने ही गोण्डा में एक पत्रकार साथी की हत्या गोली मारकर की जा चुकी है।पुलिस  अभी नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार भी नहीं पाई थी कि दोतीन पहले पूर्वाचल के एक और पत्रकार साथी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।राम रहीम की सेना तो घटना को प्रमुखता से प्रकाशित व प्रसारित करने के दोषी पत्रकारों को मारने का फतवा जारी कर चुकी है।कर्नाटक की गौरी की हत्या का मामला इससे पहले सुर्खियों में आ चुका है।इसी तरह हमारे पास देश के कोने कोने से पत्रकार साथी फोन द्वारा पत्रकारों के साथ होने वाले उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त करते रहते हैं।मोदी और योगी जी की सरकार में पत्रकार आजाद होने की जगह जान बचाने का मोहताज होता जा रहा है जो चिंता की बात है।इससे दोनों की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लग गया है और पत्रकार अपने को असुरक्षित महसूस करने लगा है।पत्रकारों की भी भूमिका को लेकर इधर प्रश्न चिन्ह ही नहीं लगने लगें हैं बल्कि उनकी पिटाई भी होने लगी हैं। लोग पत्रकारिता के नाम पर गाँव के प्राइवेट संस्थागत स्कूलों ग्राम प्रधानों कोटेदारों ठेकेदारों को ब्लैकमेल कर उनके आक्रोश का शिकार हो रहे हैं।पत्रकारिता को कंलकित करने वाले इन असमाजिक तत्वों का सफाया पत्रकारिता क्षेत्र से होना जरूरी हो गया है।जो समाज और सरकार के मध्य निष्पक्ष रूप से दोहरे आइने का कार्य कर रहें हैं उनकी सुरक्षा करना दोनों की जिम्मेदारी है जिससे दोनों भाग नहीं सकते हैं।धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार /शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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          भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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