Sunday, October 22, 2017

मुगल काल में बदले देश के इतिहास और भूगोल -भोला नाथ मिश्रा

राजनीति के खेल निराले होते हैं इसमें कौन सा ताश का पत्ता कब फेंका जायेगा इसे कोई नहीं जान सकता है।अगर मुगल शासकों और अंग्रेजों ने हमारा इतिहास भूगोल बदल दिया तो हमारे राजनेताओं ने हमारी संस्कृति ही बदल दी है।आज राजनीति के लिए सत्ता देश की एकता अखंडता से अधिक प्यारी हो गयी है और सत्ता के गलियारे तक पहुंचने के लिए वह किसी भी हद को पार करने में संकोच नहीं करते हैं।आजादी के बाद से हमारे राजनेता वोट लेकर सत्ता तक पहुंचने के लिए सारे हथकंडे अपना चुके हैं जिससे तमाम तरह की समाजिक विकृतियां आ गयी है और घर परिवार समाज के साथ हमारी राष्ट्रीय कौमी एकता अखंडता सब खतरे में पड़ गयी है। राजनेता एक छोटा सा विवादित बयान देकर शिगूफा छेड़ देता है और उसका खामियाजा हमारे समाज को भुगतना पड़ता है।यह सही है कि हमारी संस्कृति को जितना नुकसान मुगलों के समय में हुआ है उतना किसी काल में नहीं हुआ है।मुगलकाल में किये गये तमाम काम आज विवाद के कारण बने हुए हैं।इधर राजनीति धर्म के सहारे चल रही है और धार्मिक भावनाओं को भड़का कर राजनैतिक रोटियां सेंकने का कार्य तेजी से हो रहा है।अभी मुकदमें के दौरान अदालती आदेश से रामजन्मभूमि और बाबरी मामले की असलियत जानने के लिए की गयी खुदाई से एक बात तो जगजाहिर हो गयी है कि विवादित स्थल की बुनियाद किस धर्म से जुड़ी है और इसी आधार पर अदालत अपना फैसला भी सुना चुकी है जिसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।यह मामला धीरे पुराना होता जा रहा है।अगले चुनाव के लिए किसी नये राजनैतिक शिंगूफे की जरुरत है इसलिए सभी मुख्य दल नये शिंगूफे की तलाश में जुट गये हैं।इधर एक नया विवाद भाजपा के बहुचर्चित विधायक सोम संगीत के ताजमहल को लेकर दिये गये बयान से शुरू हो गया है जिसको भुनाकर राजनैतिक लाभ लेने के लिए ताजमहल से दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले तक पहुंचने लगे हैं। मुख्यमंत्री सभी ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा विकास को लेकर अपनी सफाई भी दे चुके हैं और पार्टी ने भी उनके बयान से पल्लू झाड़ लिया है लेकिन भाजपा कई नेता सोम संगीत के पक्ष में आ गये हैं। सोम ने अगर ताजमहल को कब्रिस्तान बताया तो दूसरे उनके साथी उसे शिवालय आदि बताने लगे हैं।इतना ही नहीं अपनी बात के पक्ष में ठोस आधार भी दिये जा रहें हैं।ताजमहल की बुनियाद किस धर्म से जुड़ी है इसका पर्दाफाश तो तभी होगी जब इसकी भी अदालती जांच कराई जाय।लेकिन इससे कोई फायदा मिलने वाला नहीं है बल्कि बैठे बिठाये धर्म के राजनैतिक सौदागरों को एक और मौका देने के बराबर है। ताजमहल का मामला चल ही रहा था इसी बीच दीपावली की पूर्व सँध्या अयोध्या में त्रेतायुग जैसे दृश्य की पुनरावृत्ति करने तथा उस पर होने के खर्च को लेकर राजनैतिक दल टीका टिप्पणी करने लगे हैं और मुख्यमंत्री सफाई भी दे चुके हैं कि खर्च सरकार ने नहीं बल्कि संत समाज ने किया है और सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ है।इस सबके बावजूद दीपावली के अवसर भगवान की अगवानी एवं राजतिलक समारोह के भव्य आयोजन ऐतिहासिक और अयोध्या के सर्वांगीण विकास की घोषणा से राजनैतिक भूचाल तो आ ही गया है।समाजवादी कुनबा वर्षों बाद एक बार भी एक साथ खड़ा हो गया है और कांग्रेस भी ताबड़तोड़ राजनैतिक हमले करने में जुट गयी है।आगामी लोकसभा व गुजरात के संभावित विधान सभा और नगर निकायों के चुनावों के मद्देनजर राजनैतिक दलों की चहलकदमी तेज होतीछ जा रही है।आगरे का ताजमहल किस धार्मिक स्थल को तोड़कर बनाया गया है यह बाद की बात है वह सबसे पहले आजादी के साथ मिली हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। यह सही है कि धार्मिक कट्टरता के नाम पर मुगलों ने सभी मुख्य आस्था के केन्द्रों के स्वरूप में बदलाव करके हमारे इतिहास भूगोल को बदल दिया है।मुगलकाल के पहले भारत अखंड था और कंधार तक इसका विस्तार था और अयोध्या के महाराजा चक्रवर्ती सम्राट होते थे। धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार /शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः--------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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