Saturday, October 14, 2017

नगर निकाय चुनावों पर खाश रिपोर्ट भोलानाथ मिश्रा की कलम से

राजनीति ऐसी बला होती है जिसमें दोस्ती और दुश्मनी गिरघिट की तरह रंग बदलती रहती है।राजनीति ही है जिसमें चुनाव फतह करके सत्ता में आने के लिए बाघ और बकरी एक साथ एक घाट पर पानी पीने लगते हैं।इधर नगर निकायों के चुनाव की घोषणा होते चुनावी गतिविधियां तेज हो गयी हैं।सत्ता दल हो चाहे विपक्ष दोनों नगर निकायों के चुनावों को राजनैतिक भविष्य के रूप में देख रहें हैं।नगर निकायों के आगामी चुनाव के लिए आरक्षण सूची जारी होने के साथ ही आरक्षण के अनुरूप जिताऊँ उम्मीदवार की तलाश शुरू हो गयी है।नगर निकायों से विभिन्न पदों खासतौर पर अध्यक्ष पद के लिए भावी उम्मीदवारों ने पार्टी के नेताओं की गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है।नेता भी उम्मीदवारों को उनकी औकात बताने लगा है।भाजपा इस चुनाव को फतह करके यह संदेश देना चाहती है कि उसकी साख अभी बरकरार है जो आगामी लोकसभा चुनाव में फायदा मिल सके।इस मुहिम को लक्ष्य देने की दिशा में मुख्यमंत्री समेत दिग्गज नेताओं की मंत्रणा शुरू हो गयी है।अपने को प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल के रूप में समाजवादी पार्टी अपने आप को मानती है इसलिए वह भी नगर निकायों के चुनाव परिणामों के माध्म से आगामी चुनाव के लिए शुभ संदेश देना चाहती है।इसके लक्ष्य प्रदान की दिशा में कार्य भी शुरू हो गया है और पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व उनके पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मध्य पैदा दूरी भी समाप्त हो गयी है और तीन दिन पहले लोहिया जयंती के अवसर पर एक साथ आकर अपनी मजबूती का संदेश दे चुके हैं। काग्रेंस सपा और सपा काग्रेंस का दामन कुछ इस तरह थामे हैं जैसे लगता है कि दोनों का जन्म जन्म का रिश्ता हो। अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि दोनों दोस्ती यथावत नहीं बल्कि पहले से भी मजबूत होगा। बसपा मौन धारण किये आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कोई रिस्क लेना नहीं चाहती है।नगर निकायों के मतदाता जो पार्टी से जुड़े हैं वह तो मुखरित होकर अपना अपना राग अलापने लगे हैं किन्तु आम मतदाता तमाशबीन बना चुनावी खेल शुरू होने की राह देख रहा है।वैसे पिछले नगर निकायों के हुये चुनाव परिणामों पर अगर नजर डाली जाय अधिकांश चुनावों के परिणाम सत्ता दल के पक्ष में आते हैं और सत्ता में रहने का पार्टी को लाभ मिलता रहा है। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी भी पूरे दमखम के साथ मैदान में डटी है इसलिए पुरानी पार्टियों की आसान नही दिखती और वैसे भी जनता हमेशा विकल्प को ही तलाशती है खैर जो भी हो लेकिन नगर निकायों के मतदाताओं को ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं से अधिक प्रबुद्ध माना जाता है।आगामी होने जा रहे नगर निकायों के चुनाव में  मतदाता भगवान किस पार्टी के सपने को साकार कर लक्ष्य प्रदान करता है यह भविष्य के गर्त म़ें छिपा है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं ।। ऊँ भूर्भुवः स्वः--------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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              भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
  रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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