Tuesday, November 7, 2017

यहां प्रदूषण से जीना हुआ मुहाल

पत्रकार के सी शर्मा,*

*सिंगरौली/सोनभद्र*

सोनभद्र और सिंगरौली के उर्जान्चल की रिहायशी बस्तीयो से महज  चंद कदमो की दूरी पर स्थित है कोयला खदाने ,तापीय परियोजनाये सैकड़ो स्टोन क्रेशरों,सहित अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों, राख बन्धो -द्वारा उर्जाचल की फिजाओं में 24 सो घण्टे प्रदूषण रूपी जहर घोल लाखो जन जीवन और प्रकिति के साथ  हो रहा है खिलवाड़ ।
परियोजना प्रबंधन शासन की ओर से निर्धारित मानकों और एन जी टी के दिशा निर्देशों का  पालन नहीं कर रहा है।

जिसकी सजा उर्जान्चल वासियो और विस्थापित बस्तियों सहित आसपास के लोगों और राहगीरों को भुगतनी पड़ रही है। इन उद्योगों से  रहवासी इलाके  महज चंद कदमो   की दूरी पर स्थित है
।इस प्रकरण को लेकर वर्षो से लोग एनजीटी में मुकदमा लड़ रहे है ।वहा से समय समय पर आदेश और निर्देश भी जारी होते रहते है । स्थानीय स्तर पर बराबर जन आंदोलन भी होते रहते है ।समाचार पत्रों में भी क्षपता रहता है ।टीवी चैनलों में भी चलता रहता है ।अभी हालही में एनडी टीवी पर भी यहा के प्रदूषण के हालात को पूरे देश को दिखाया गया था ।फिर भी शासन,प्रशासन,परियोजना प्रवंधन के सेहत पर कोई फर्क पड़ता नही दिख रहा है ।
प्रदूषण के मामले में यह क्षेत्र देश में टाप थ्री में आकर दूसरे नम्बर पर खड़ा होगया है ।
  स्थानीय नागरिकों के द्वारा लगातार बार बार  शासन,प्रशासन,एनजीटी स्तर पर शिकायत की जाती रहती है और हरतरफ इसके विरोध में यहा आवाज उठती रहती  है ।  इसके बाद भी जिम्मेदारों की नजर कानून की धज्जिया उड़ा रहे इन परियोजनाओ के प्रबन्धन पर नहीं पड़ती है ।
परियोजनाओं के  संचालन के लिए निर्धारित मानक है ।पर यहा शायद ही किसी सुरक्षा मानक का उपयेाग किया जा रहा हो। कोयला उत्तखनन से लेकर उसके परिवहन तथा उसके जलने के बाद उससे उतपन्न धुंवा और राख से पैदा हो रहा प्रदूषण और इससे उडऩे वाली कोयला व राख की धूल धुंध के रूप में आसपास के वातावरण में जहर बनकर 24 सो घण्टे छायी रहती  है।
इन उद्योगों व खदानों में काम करने वाले मजदूर और आसपास रहने वाले लोगों में श्वास संबंधी रोग सहित नजाने कितनी अज्ञात विमारिया लगातार पनपति रहती है । लोग असमय काल कवलित हो रहे है ।
यहा के बातावरण में हमेशा छाया रहता है हजहरीला धूल का गुबार।
उक्त के कारण आसपास के क्षेत्र में हमेशा धुंध छाई रहती है। यह जहरीला प्रदूषण लोगों को लगातार बीमारी के रूप में डस रहा है।
इसके अलावा तापीय परियोजनाओं की जहर उगलती चिमनिया लोगो को रातो दिन जहरीला धुवा परोस रही है ।इन चिमनियों से भी उड़ाई जाती है रात के अंधेरे में कोयले की राख जो लोगो के लिए जान लेवा सावित हो रही है ।
कोल  परिवहन से डस्ट राहगीरों और वाहन चालकों के आंख में भी चुभती है।इसके चलते बढ़ रही है दुर्घटना ।सड़क दुर्घटना के चलते यहा की सड़कों को किलर रोड का नाम दे दिया गया है ।
हा यह बात अलग है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय व आसपास के कुछ लोगों को इससे रोजगार भी मिला हुआ है। इस कारण  लोग प्रभावी तरीके से इसका विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं।परन्तु इस क्षेत्र की स्थिति अत्यंत चिंतनीय है।

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