Thursday, November 9, 2017

जाने कब और कैसे राहू देता है राजपद

ज्योतिष विद्या, नौ ग्रहों, 12 राशियों, 27 नक्षत्रों का समावेश है। सभी की अपनी महत्ता और अपने कार्य हैं। ग्रहों की बात की जाए तो वैसे तो सभी ग्रह अपने आप में महत्वपूर्ण हैं लेकिन कुछ ग्रह ऐसे हैं, जिन्हें सार्वभौमिक तौर पर नकारात्मक मान लिया गया है।*

*गलत भाव या स्थिति-*

*राहु, केतु, मंगल और शनि, ये कुछ ऐसे ग्रह हैं जिनका नाम सुनते ही लोग कांपने लगते हैं। सभी के लिए तो नहीं लेकिन वाकई जिन लोगों की कुंडली में ये ग्रह गलत भाव या स्थिति में बैठे हैं तो उन्हें भारी नुकसान भुगतना पड़ता है।*

*आकस्मिक परिणाम-*

*विशेषकर राहु को एक ऐसा ग्रह माना जाता है जो आकस्मिक परिणाम प्रदान करता है। शुभ हो या अशुभ, वह अपनी दशा में ऐसी स्थितियां पैदा करता है जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।*

*योग-*

*शायद यही वजह है कि सामान्य जन राहु का नाम सुनते ही चिंताग्रस्त हो जाते हैं। अब इस पर अगर राहु की वजह से कुंडली में कोई योग बन जाए तो सोचिए क्या होगा॥*

*मंगल-*

*मंगल को क्षत्रीय ग्रह कहा जाता है जो रक्त का प्रतिनिधित्व करता है वहीं राहु बुद्धि को भ्रमित करने वाला ग्रह है॥*

*जातक की कुंडली-*

*जातक की कुंडली में राहु के योग का होना शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के होते हैं लेकिन सामान्य व्यक्ति केवल अशुभ योगों के विषय में ही जानता है॥*

*ड्रैगन हेड-*

*अंग्रेजी में राहु को ड्रैगन हेड भी कहा जाता है, पौराणिक कथाओं में इसे सर्प के सिर वाले ग्रह की आकृति के तौर पर दिखाया जाता है। राहु अगर केतु के साथ मिलकर योग बनाता है तो इसे कालसर्प योग कहा जाता है।*

*शुभ और अशुभ-*

*चलिए हम आपको कुछ ऐसे ही अन्य शुभ और अशुभ योगों के बारे में बताते हैं जो राहु की वजह से से बनते हैं।*

*अष्टलक्ष्मी योग-*

*वैदिक ज्योतिष में राहु को नैसर्गिक पापी ग्रह माना जाता है। इसकी अपनी कोई राशि नहीं होती, ये जिस भी राशि के साथ मिलता है उस राशि के स्वामी के अनुसार फल प्रदान करता है।*

*शुभ योग-*

*किसी जातक की कुंडली में अगर राहु छठे भाव में स्थित होता है और उस कुंडली के केन्द्र में गुरु विराजमान होता है तो यहां अष्टलक्ष्मी नामक शुभ योग बनता है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है वह व्यक्ति कभी धन के अभाव में नहीं रहता॥*

*शुभ फल-*

*इस योग के अनुरूप, राहु अपना नकारात्मक फल त्यागकर शुभ फल देने लगता है और व्यक्ति को अत्याधिक आस्थावान और ईश्वर के प्रति समर्पित बनाता है। इन्हें जीवन में यश और सम्मान हासिल होता है।*

*लग्नकारक योग-*

*राहु द्वारा निर्मित शुभ योगों में लग्नकारक योग का नाम भी शामिल है। यह योग मेष, वृष और कर्क लग्न की कुंडलियों में बनता है, जब राहु द्वितीय, नौवें या दसवें भाव में होता है।*

*दुर्घटना का सामना-*

*जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है, उस व्यक्ति को राहु के नकारात्मक प्रभाव को नहीं झेलना पड़ता। ऐसे जातकों को राहु शुभ फल देता है, उन्हें दुर्घटना का सामना ना के बराबर करना पड़ता है। इन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है और वैयक्तिक जीवन भी सुखमय होता है।*

*परिभाषा योग-*

*जिन जातकों की कुंडली में परिभाषा योग उपस्थित होता है, उन्हें भी राहु की नकारात्मक आकस्मिकता का सामना नहीं करना पड़ता। जिस व्यक्ति की कुंडली के छठे, तृतीय या एकादश भाव के अलावा लग्न में मौजूद राहु पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही होती है तो उसे ताउम्र आर्थिक लाभ मिलता रहता है॥*

*कुंडली-*

*जिस भी जातक की कुंडली में ये योग मिलता है उनके मुश्किल से मुश्किल काम भी आसानी से बनते चले जाते हैं।*

*कपट योग-*

*राहु और शनि नामक दो पापी ग्रह किसी व्यक्ति की कुंडली के ग्यारहवें और छठे भाव में विराजमान होकर कपट योग का निर्माण करते हैं। ऐसा व्यक्ति कभी भी किसी का विश्वसनीय नहीं बन सकता, वह अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति रखता है।*

*पछतावा-*

*जो भी व्यक्ति कपट योग वाले जातक के संपर्क में आता है, उसे पछतावा करने के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगता। इस योग वाले जातक कभी सम्मान के हकदार नहीं बन पाते॥*

*पिशाच योग-*

*राहु द्वारा निर्मित जितने भी योग हैं उनमें यह योग सबसे निचले दर्जे का माना जाता है। जिस भी व्यक्ति की कुंडली में प्रेत बाधा मौजूद होती है। इन लोगों की मानसिक स्थिति कमजोर रहती है। इस वजह से ये लोग कभी-कभी अपना ही नुकसान कर बैठते हैं॥*

*गुरु चांडाल योग-*

*किसी भी जातक की कुंडली में बृहस्पति और राहु की युति से गुरु चांडाल योग का निर्माण होता है। ज्योतिष की भाषा में इसे अशुभ योग करार दिया गया है।*

*पैसे की तंगी-*

*जिस भी व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है उसे राहु के नकारात्मक प्रभाव को भोगना पड़ता है। कुकर्मों के प्रति झुकाव, पैसे की तंगी और ईश्वर से दूरी, इस योग के प्रमुख लक्षण हैं।*

*नकारात्मक परिणाम-*

*उपरोक्त योग शुभ भी हैं और अशुभ भी, इसलिए ये कहना कि राहु सिर्फ नकारात्मक परिणाम ही देता है, पूर्ण सत्य नहीं है।*
ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461
Abhayskpandey@gmail. com

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