Saturday, November 11, 2017

संत का कोई स्वरूप नही जिसके पास बैठने से आनन्द और ज्ञान मिले वही सन्त-विजय कौशल जी महाराज

गोंडा जिलाध्यक्ष आल मीडिया जर्नलिस्ट बेलफेयर एसोसिएशन गोंडा /पवन कुमार द्विवेदी                संत का कोई स्वरूप नही होता ,जिसके पास बैठने से मन को आनंद मिले वही है संत _ विजय कौशल जी महराज।                 गोंडा जनपद के इटियाथोक विकास खंड के बेनदुली ग्राम पंचायत मे हो रही हनुमान कथा मे बिजय कौशल महराज ने कहा कि यदि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए रोने की आवश्यकता है क्योंकि ईश्वर की नींद कोई नही तोड़ सकता है लेकिन भक्त के रोने से ईश्वर की नींद तोड़ सकती है ।वही संत की परिभाषा भी बताया कि संत कोई भी हो सकता उसका कोई स्वरूप नही होता है जिसके पास बैठने से मन आनंदित हो जाए वही संत है ,संत कोई छोटा या बड़ा कोई भी हो सकता है ।वही हनुमान कथा मे बताया कि हनुमानजी लंका को जलाकर मा जानकी के पास आए ,तब जानकी माॅ ने पूछा कि कैसा शोर हो रहा है तो हनुमान जी ने बताया कि माॅ ये आपके बेटे का कमाल है अभी तो शुरूवात है शीघ्र ही सभी दुष्टो का विनाश होगा ,हनुमान जी लंका से लौटते है और जानकी माॅ के द्वारा दिया गया चूड़ा मनि देकर कहा कि राम जी से कहा कि जनक जी पुत्री का हाल बताया कि जिसे   सुनकर राम जी को उत्साहित किया ,तो इस पर राम जी कहा कि जानकी यदि इतनी ज्यादा दुखी है तो उन्हे अपने प्राणो को त्याग देना चाहिए ,इस पर हनुमान जी कहा कि उनके शरीर मे प्राण है ही नही है वो तो आप के चरणो मे है ।हमे ईश्वर का आशीर्वाद तभी मिलता जब हम उन्हे द्रवित कर पाते है ।वही काम हनुमानजी जानकी माॅ की ऐसी कथा सुनाई कि श्री राम जी के आंखो से भी अश्रु की धारा बहने लगी ।कथा का महिम तभी है कि जब भक्ति प्रसन्न हो और ईश्वर को रूला दे वही कथा है ।कौशल जी महराज जी ने उपासना के बारे मे बताया पूजा प्राथमिक ,माला जपना दितीय ,सुमिरन तृतीय व अनितम भजन है ।जब काम करते हुए शरीर काम करते हुए अन्तर्मन से ईश्वर का ध्यान रहे वही भजन है ।हर धडकन मे तेरी ही खुश्बू है ।जिधर देखूँ तो ही है ।प्यार तेरा छूटे तो मुझसे रूठे न ,फूलो की गलियो मे हर जगह तू ही है ।वो साथी रे तेरे बिना क्या जीना ।इस तरह भक्त प्रेमी की दशा होती है ।शरीर से गलतियां होगी उसे शरीर को भोगना ही पडे़गा वही मन राम मे लगा है तो उसका फल अलग से मिलेगा जैसे लंका के राक्षसो ने ऐसा कोई पाप नही है जो न किया हो उनहे मुक्ति इस लिए मिला कि अन्तिम समय मे उन्होने ने राम का चिन्तन किया ।आगे लंका की कथा कहते हुए कहते है कि युद्ध से पहले से सभा बुलायी गयी ,सभा मे बिभीषण ने कहा कि ये तात कि जानकी को वापस करके राम जी से संधि कर लो नही तो पूरे राक्षस कुल का नाश हो जाएगा इस पर रावण ने विभीषण को लात मारते हुए विभीषण को सभा से भगा दिया और कहा कि जाओ राम जी से साथ चले जाओ ।विभीषण के बारे मे बताया कि बिषयी था जिसकी धर्म मे रूचि थी और अधर्म मे भी अरूचि नही थी ,वह समझौता वादी है सभी के साथ समझौता करता है ।हम कथाए भी सुनते है और मधुशाला मे भी जाते है ।एक तरफ गलत तरीके से पैसा कमाते है वही दूसरी तरफ धर्म मे भी अपनी कमाई का हिस्सा लगाते है ।दुनिया मे व्यभिचार क्यो बढ रहा है कि लोग बुराई की हाॅ मे हाॅ मिलाते है इसी की वजह से पाप और अधर्म बढ रहा है । कौशल जी महराज जी ने सुन्दर कांड की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार ईश्वर की शरणे आ जाना इस कांड की महिमा है जैसे कि विभीषण अंत मे श्री राम जी के शरण मे आ गए ।यह कथा बेनदुली ग्राम पंचायत के सरवानंद  बालिका विद्यालय के प्रांगण मे पिछले पाँच नवम्बर से चल रही है जो बारह नवंबर तक चलेगी । यह कथा जैसे जैसे अपने समाप्ति की ओर बढ रही है भीड़ बढती जा रही है ।इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे ।इस कथा का आयोजन स्वंय प्रकाश शुक्ल ने आयोजित की है ।

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