Thursday, November 23, 2017

रामजन्मभूमि बाबरी विवाद और शिया समुदाय के प्रस्तावित समझौते पर विषेस-भोला नाथ मिश्रा की कलम से

अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का दशकों पुराना मामला शिया समुदाय के एक नये समझौता  मसौदे केे बाद एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है।इस मसौदे को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बाबर शिया मुसलमान था और उसकी बाबरी मस्जिद पर शिया वक्फ का पूरा मालिकाना हक है।यह बात अलग है कि इस अन्तर्राष्ट्रीय मामले में सुन्नी वक्फबोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी भी अपना दावा कर रहे हैं।जबकि  इस विवाद से जुड़े मुकदमे में तीसरा पक्ष भी इसमे महत्वपूर्ण है। यह भी काबिले गौर है कि इस मुकदमे के वादी प्रतिवादी दोनों अलग अलग मजहब के होने के बावजूद दोनों में दांत की कांटी रोटी और एक दूसरे के दुख सुख में साथ हंसने रोने वाली दोस्ती थी।वह पक्ष विपक्ष अदालत के अंदर बनते थे और बाहर आते ही गुरू शिष्य की भूमिका अदा करते थे। इतना ही नहीं भगवान की पूजा आरती वस्त्र आदि से जुड़े तमाम कार्य अयोध्या जी के रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग ही करते हैं।अयोध्या के रहने वाले तमाम मुस्लिम परिवारों की रोजी रोटी भगवान राम और रामजन्मभूमि से चलती है।यहीं कारण है कि मुकदमे बाजी के बावजूद वहाँ पर कौमी एकता भाईचारा आज भी बना हुआ है और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग शुरू से ही इस मुद्दे को को राजनैतिक बनाकर रोजी रोटी छीनने का विरोध कर रहे हैं। बाबरी जन्मभूमि का विवाद कुछ लोगों के कमाने खाने का धंधा बन गया है और लोग इसके नाम पर दूकान चला कर साम्प्रदायिक उन्माद पैदा कर रहे हैं।यह लोग इस विवाद को सुलझाना नही  बल्कि उलझाए रखना चाहते हैं क्योंकि वह जानते हैं कि विवाद खत्म होते ही उनकी रोजी रोटी चली जायेगी। उच्च न्यायालय इस महत्वपूर्ण बहुचर्चित विवाद की स्थलीय जांच करवा कर अपना फैसला सुना चुका है।इस समय मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है लेकिन अदालत भी इस संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुनाने में संकोच कर आपसी सहमति पर विवाद का समझौता करने की सलाह दे रही है। बाबर मुस्लिम समुदाय का औलिया पीर पैगम्बर या फरिश्ता नही बल्कि एक कट्टरपंथी आततायी लुटेरा था जो हमारे देश को लूटकर इतिहास भूगोल बदलने यहाँ आया था।
इस्लाम लूटपाट करने और विवादित स्थल पर बनी मस्जिद में नमाज अदा करने की इजाजत नहीं देता है।यहीं कारण है कि पूरा मुस्लिम समाज उसे और उसकी बाबरी मस्जिद विध्वंस बहुत महत्व नहीं देता है और वह भी इस विवाद का स्थाई हल चाहता है।शिया समुदाय की तरफ से दो दिन पहले इस विवाद पर नया समझौता मसौदा इस दिशा में एक स्वागत योग्य पहल है। विवाद का निपटारा कुछ इस तरह से होना जरूरी है कि भविष्य में पुनः कोई इसकी पुनरावृत्ति न कर सके।शिया समुदाय का लखनऊ में नाम बदलकर मस्जिद बनवाने की पेशकश इस विवाद के स्थाई निदान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।जब बाबरी के असली हकदार चाहते हैं तो दूसरे समुदाय के लोगों का विरोध कोई महत्व नहीं रखता है। बाबरी मस्जिद और रामजन्मभूमि एक साथ एक  शहर में रहने से विवाद को जड़ से समाप्त नहीं किया जा सकता है।देश की कौमी एकता अखंडता को बनाये रखना सरकार का दायित्व होता है और वोट क लियेे धार्मिक उन्माद पैदा करना संघीय संगीन अपराध की श्रेणी में आता है।जिस विवाद से देश कमजोर हो रहा हो उसका निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर राजनीति से दूर हटकर होना राष्ट्रहित में होगा।धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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