Tuesday, November 7, 2017

एनटीपीसी हादसा जिम्मेदार कौन

कल कारखाने देश की प्रगति के सूचक होते हैं तथा इनसे देश प्रदेश की बेरोजगारी दूर होती है।कल कारखाने मजदूरों और तकनीकी सहायकों के माध्यम से चीफ इंजीनियर चलाते हैं। इन कल कारखानों में काम करने वाले कर्मचारी मजदूर इसकी रीढ़ होते हैं और इनकी सुरक्षा करना कल कारखाना चलाने वालों की जिम्मेदारी होती है।गाँव से गरीब मजदूरी करने अपना घर बाल बच्चे छोड़कर कारखाने में काम करने आता है जान देने नही आता है।उसकी जान उसके बाल बच्चों के लिए बहुत कीमती होती है। इसीलिये कल कारखानों का लायसेंस देते समय सरकार सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान देती है।कारखाने में जो स्थान या काम जानघातक होता है वहाँ पर विशेष व्यवस्था की जाती है और कम से कम लोगों को वहाँ पर रहने की अनुमति दी जाती है।कारखानों में ब्वायलर एक जरूरी अंग होता है जो बहुत गैस या स्ट्रीम व्यकुम बनाता है। कारखानों में इस ब्वायलर की मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाता है क्योंकि इसके फटने या लीकेज का मतलब मौत का खूनी नंगा तांडव होता है। अभी चार दिन पहले रायबरेली स्थित एनपीटीसी कारखाने में ब्यायलर फटने से दिल दहला देने वाली घटना हुयी है जिसमें अबतक तमाम लोगों की मौत हो चुकी है और तमाम लोग विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी मौत से संघर्ष कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मारीशस से लौटने के तुरंत बाद सीधे घटना में जिंदगी मौत से संघर्ष कर रहे मजदूरों को देखने मेडिकल कालेज जाकर घायलों को आश्वासन और घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिये हैं।राहुल गांधी भी घटना के बाद वहाँ पर पहुंच चुके हैं। एनपीटीसी में ब्यायलर फटना छोटी बात नही है और यह गंभीर मामला है। एफआईआर दर्ज कराने से जिनका घर उजड़ गया है और मांग सूनी हो गयी है उनको क्या मिलेगा ? कारखाने के जिम्मेदार इंजीनियरिंग विभाग के लोग इस हादसे के लिए जिम्मेदार हैं।ब्यायलर कमजोर था तो यह जिम्मेदारी कारखाने के जिम्मेदार लोगों की है।अगर ठीक था तो उसमें इतनी स्टीम कैस बन गयी जिससे वह फट गया ? यह देखना भी कारखाने के इंजीनियरिंग विभाग की जिम्मेदारी है ? ब्यायलर ऐसे सुरक्षित स्थान पर होना चाहिए जहाँ पर उसके इर्द गिर्द मजदूर या अन्य लोग काम न करते हो। सवाल यह उठता है कि इस हादसे की चपेट में सैकड़ों लोग कैसे वहाँ पर कैसे मौजूद थे?यह तो सही है कि घटना के लिये एनपीटीसी प्रशासन  जिम्मेदार है और वह अपनी जिम्मेदारी से मुकर नहीं सकता है।इस हादसे में हुयी हानि के लिए वह जिम्मेदार है और वह जिन गरीब मजदूरों कर्मचारियों की जान चली गयी है या अपंग हो गये हैं उनके परिवार का पालन पोषण करना उसका धर्म बनता है।एनपीटीसी का हादसा कल कारखानों के लिये खतरे की घंटी बजने के बराबर है।इस घटना से अन्य कल कारखानों को सीख लेने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई दूसरा एनपीटीसी ब्यायलर हादसा न हो।एनपीटीसी हादसे को लेकर राजनीति भी शुरू हो गयी है और सभी मुख्य दलों के नेता हादसे के शिकार लोगों के पास हमदर्दी बटोरने और मुफ्त में मीडिया में आने के लिये पहुंचने लगें हैं।ब्यायलर फटना लोहे या स्टील की खराब क्वालिटी से हुआ या क्षमता के अनुरूप मजबूती न होने से इसका पता लगाकर इसके जिम्मेदार लोगों पर सीधे हत्या का मुकदमा होना चाहिए।हम अपने पाठकों की तरफ से इस हादसे में मारे गये लोगों की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना करते हैं और सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह इस हादसे में मारे गये लोगों के परिवार को कम से कम पचास लाख रूपया और एक व्यक्ति को परिवार में नौकरी दी जाय।धन्यवाद।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
  वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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