Wednesday, November 22, 2017

देव शास्त्र गुरु हमारे आदर्श -सुधाकर महाराज

किशनगढ़--भेरूसिंह चौहान----मुनि सुधासागर महाराज ने सोमवार को आर.के. कम्यूनिटी सेंटर में धर्माेपदेश देते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव सके किया गया उपकार असभंव को भी संभव बना देता है। देव, शास्त्र, गुरू हमारे आदर्श है और आदर्श दर्पण समान होते है। जो सदैव हमे सच्चाई दिखाते है। स्वयं की आत्मा को जानने की जरूरत है। संसार केवल दिखावा है। दर्पण देखना सत्य नही है लेकिन दर्पण में स्वयं को देखना सत्य है। इसी प्रकार हम मंदिर में भगवान के दर्शन नही करते हम भगवान की प्रतिमा में स्वयं के दर्शन करने जाते है। भगवान के लिए कोई क्रिया नही है। हम जो भी धर्म की क्रिया करते है वह स्वयं के हित के लिए होती है। संसार में सभी व्यक्ति बालक के समान है। मुनिश्री ने अनेक उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म कार्य करने में जो व्यक्ति थकान महसूस करे वह मिट जाता है। पापी व्यक्ति कभी संतुष्ठ नही होता। जीवन में जिस प्रकार सांसारिक कार्य की कोई सीमा नही है उसी प्रकार धर्म कार्य की भी सीमा नही होनी चाहिए। धर्म कार्य को सीमा में बांधना पतन का कारण है। जीवन को सार्थक करना है तो सच्चे देव, शास्त्र व गुरू को पहचाना जरूरी है। श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के प्रचार मंत्री संजय जैन के अनुसार प्रात: श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन दोपहर में सामयिक के पश्चात मुनि निष्कंपसागर महाराज द्वारा जिनसहस्त्रनाम स्त्रोत पाठ, मुनि सुधासागर महाराज द्वारा तत्वार्थ श्लोक वार्तिक एवं पद्मनन्दि पंच विशंतिका, मुनि महासागर महाराज द्वारा तत्वार्थ सूत्र तथा सायं जिज्ञासा समाधान के पश्चात क्षुल्लक धैर्यसागर महाराज द्वारा बच्चों की पाठशाला में जीवन को सार्थक करने का धार्मिक ज्ञान दिया जा रहा है। सायं जिज्ञासा समाधान व आरती के पश्चात क्षुल्लक गंभीरसागर महाराज के प्रवचन हो रहे है। इस अवसर पर अनेक श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।

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