Thursday, November 2, 2017

जाने ग्रहण दोष की विशेषता ज्योतिर्विद अभय पांडेय के साथ

ग्रहण दोष
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दस्तों नमस्कार, मै ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय आप के लिए  एक जानकारी लेकर आया हूँ।
आज मैं चर्चा करूँगा ग्रहण दोष के बारे में, दोस्तों जब भी कुंडली में किसी भी भाव  में सूर्य या फिर चन्द्रमा के साथ राहु या केतु बैठ जाये तो वहां पर ग्रहण दोष बन जाता है,
इसके अलावा सूर्य या चन्द्रमा के घर में राहु, केतु बैठ जाएँ तो भी ग्रहण दोष लग जाता है।
ग्रहण दोष जिस घर पर लग जाता है उस भाव से सम्बंधित परिणामों पर यह अशुभ परिणाम ही डालता है, सूर्य के साथ होने पर यह नौकरी, व्यवसाय, साहस पराक्रम, और पिता से सम्बंधित अशुभ फल देता है।
चन्द्रमा के साथ होने पर अधिकतर मानसिक स्वास्थ्य की समस्या अधिक देता है, क्योंकि चन्द्रमा मन का कारक है, चिड़चिड़ापन, मन का ख़राब या अशांत रहना, मानसिक तनाव आदि, माता का स्वास्थ्य भी प्रभावित करता है।
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दोस्तों ग्रहण दोष अलग अलग भाव में अलग फल देता है मतलब जिस भाव में लग जाये उसी भाव से सम्बंधित अशुभ फल देने लगता है। उदहारण के लिए यदि द्वितीय भाव में लग जाये तो धन संबंधी समस्याएँ अधिक देगा।क्योंकि यह धन भाव कहलाता है।

ग्रहण दोष के कारण निम्न समस्याएं होती हैं।
व्यक्ति जीवन भर आर्थिक तंगी से जूझता रहता है। एक परेशानी ख़त्म नहीं होती कि दूसरी शुरू। नौकरी या व्यवसाय ठीक से नहीं चल पाता, व्यक्ति बार-बार बदलाव करता रहता है। पैसों की बचत नहीं हो पाती। बने बनाये कार्य 99% पर आकर बिगड़ जाते हैं। तरक्की या प्रमोशन नहीं हो पाता। जीवन में अचानक परेशानिया उत्पन्न होती हैं। विघ्न- बाधाएं आती रहती है। बीमारी ठीक नहीं हो पाती। मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन व आत्महत्या का विचार या कोशिश।
तो दोस्तों इतनी सारी प्रोब्लेम्स हो जाया करती हैं, इसीलिए इसे अशुभ दोषों में गिना जाता है।
दोस्तों लेकिन डरने या फिर घबराने की जरुरत नहीं।
जहाँ इसके इतने सारे दोष हैं, वहीँ इसके कुछ उपाय करने से इसकी अशुभता में कमी भी आती है।
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आप सब की भारी मांग पर मैं उपाय भी लिख रहा हूँ, तो नोट कर लीजिये उपाय।
यदि सूर्य से सम्बंधित ग्रहण है तो क्या करें।
1- सूर्य को अर्घ दें। 2- गुरु की और पिता की सेवा करें।3- आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। 4- नमक का सेवन कम करें, सुबह सूर्योदय के समय खड़े होकर गायत्री मंत्र जपें।

अब चन्द्रमा से सम्बंधित ग्रहण दोष में ये करें।
1- शिव पूजन व जलाभिषेख।2- महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। 3- सफ़ेद कपड़ों का दान व कन्याओं को सोमवार को खीर दें।4- राहु केतु के लिए शिव-हनुमत आराधना करनी चाहिए। 5- शुक्लपक्ष अष्टमी से द्वादशी तक चांदनी की रौशनी में 15 से 20 मिनट बैठ कर चन्द्रमा का मंत्र जप करें।----
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ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461

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