Sunday, December 10, 2017

गायत्री यज्ञ हवन और पुराण-भोला नाथ

🇮🇳सुप्रभात-सम्पादकीय🇮🇳
मनुष्य जीवन में यज्ञ और हवन का बहुत महत्व बताया गया है।यज्ञ हवन से देवी देवताओं की पूजा अर्चना ही नही बल्कि हवन यज्ञ से प्रदूषित वातावरण को भी शुद्ध किया जाता।यज्ञ हवन भी एक चिकित्सा पद्धति मानी गयी और हवन यज्ञ के माध्यम से विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है।यज्ञोपैथी का पुराना वैदिक इतिहास है और जब चिकित्सा की अन्य पद्धतियां मौजूद नहीं थी तो.यज्ञ हवन आदि से ही वातावरण को बीमारी रहित बनाया जाता था।फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च की। जिसमें उन्हें पता चला की हवन मुख्यतः आम की लकड़ी को जलाकर की जाती है। जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है जो खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है तथा वातावरण को शुद्ध करती है। इस रिसर्च के बाद ही वैज्ञानिकों को इस गैस और इसे बनाने का तरीका पता चला।
गुड़ को जलाने पर भी ये गैस उत्पन्न होती है।टौटीक नामक वैज्ञानिक ने हवन पर की गयी अपनी रिसर्च में ये पाया की यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाये अथवा हवन के धुएं से शरीर का सम्पर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फ़ैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है। हवन की महत्ता को देखते हुए राष्ट्रीय वनस्पति अनुसन्धान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों ने भी इस पर एक रिसर्च किया है कि क्या वाकई हवन से वातावरण शुद्ध होता है और जीवाणु नाश होते है अथवा नही होते हैं ? उन्होंने ग्रंथों  में वर्णिंत हवन सामग्री जुटाई और जलाने पर पाया कि ये विषाणु नाश करती है। फिर उन्होंने विभिन्न प्रकार के धुएं पर भी शोध किया और देखा कि सिर्फ आम की लकड़ी मात्र एक किलो जलाने से हवा में मौजूद विषाणु बहुत कम नहीं हो गये किन्तु उसमें जैसे ही उसके ऊपर आधा किलो हवन सामग्री डाल कर जलायी गयी तो एक घंटे के भीतर ही कक्ष में मौजूद बैक्टीरिया का स्तर ९४ % कम हो गया। यही नहीं  उन्होंने आगे भी कक्ष की हवा में मौजुद जीवाणुओ का परीक्षण किया और पाया कि कक्ष के दरवाज़े खोले जाने और सारा धुआं निकल जाने के २४ घंटे बाद भी जीवाणुओं का स्तर सामान्य से ९६ प्रतिशत कम था। बार-बार परीक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि इस एक बार के धुएं का असर एक माह तक रहा और उस कक्ष की वायु में विषाणु स्तर 30 दिन बाद भी सामान्य से बहुत कम था। यह रिपोर्ट एथ्नोफार्माकोलोजी के शोध पत्र (resarch journal of Ethnopharmacology 2007) में  दिसंबर २००७ में प्रकाशित हो चुकी है। रिपोर्ट में लिखा गया कि हवन के द्वारा न सिर्फ मनुष्य बल्कि वनस्पतियों एवं फसलों को नुकसान पहुचाने वाले बैक्टीरिया का भी नाश होता है। जिससे फसलों में रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो सकता है। हवन करने से न सिर्फ भगवान ही खुश होते हैं बल्कि घर की शुद्धि भी हो जाती है । भारतीय संस्कृति के निर्माताओ ने यज्ञ को पिता और गायत्री को माता माना है।गायत्री को साक्षात ईश्वर माना गया है क्योंकि भगवान कहते कि गायत्री मंत्र के रूप हम ही हैं। गायत्री मंत्र को मंत्रों का राजा माना गया है और जितनी उर्जा इसके उच्चारण से निकलती है उतनी अन्य किसी मंत्र से नही निकलती है। विश्वामित्र जी गायत्री मंत्र के साधक आराधक थे और इसी के पूजा के बल नाराज होकर दूसरी सृष्टि की रचना शुरू कर दी थी।गायत्री मंत्र को जनजन तक पहुंचा कर युग निर्माण की कल्पना को साकार रूप प्रदान करने वाल युगशिल्पी युगनिर्माता युगदृष्टा परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा को गायत्री मंत्र और यज्ञ हवन का परिवर्तन अधिष्ठाता माना जाता है।उन्होंने सभी को सुखी निरोगी काया और जीवन जीने की कला सिखाने के लिए हवन यज्ञ अभियान चलाया था जो आज परवान चढ़ रहा है। गायत्री मंत्र और यज्ञ हवन की ही ताकत थी कि स्काईलैब को समुद्र में गिराकर जनमानस को बचाया गया था।हवन यज्ञ का ही परिणाम है कि ओजोन परतों के छेद कम होने लगे हैं।यज्ञ हवन के साथ सबको सद्बुद्धि देकर मानवता और ईश्वरीय राह पर चलने की प्रेरणा देने के लिए प्रज्ञा पुराण कथा की शुरुआत अरसा पहले हुयी जिसे आज उनके परिजन गति और लक्ष्य प्रदान करने की दिशा में अग्रसर हैं। इसी कड़ी मे दुनिया भर में यज्ञ हवन एवं प्रज्ञा पुराण कथाओं के सफल आयोजन अबतक हो चुके हैं।इसी श्रंखला में आगामी 11दिसम्बर से 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा पटेल पंचायती इंटर कॉलेज पाइका मैदान भिटरिया रामसनेहीघाट बाराबंकी में किया गया है। इस चार दिवसीय आयोजन में नित्य यज्ञ एवं विभिन्न संस्कार प्रतिदिन प्रातः काल संपन्न होंगे तथा सायं कालीन बेला में युग ऋषि वेद मूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित प्रज्ञा पुराण कथा गायत्री परिवार की वरिष्ठ वक्ता पंडित श्याम बिहारी दुबे की प्रखर वाणी द्वारा हम लोगों को श्रवण करने का सौभाग्य मिलेगा।
हमारा आपका यह सौभाग्य है कि यज्ञ पिता गायत्री माता के रुप में हमारे नगर क्षेत्र में पधारने जा रहे हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार /शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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