Sunday, December 31, 2017

देश मे मोबाईल फोन सेवाएं और कम्पनियों की मनमानी पर भोलानाथ मिश्रा की रिपोर्ट

देश की आमजनता ऐसी होती है जो उपभोक्ता बनकर सबकी हवश को पूरा करती है। सरकार हमेशा जनता को ही चरित्रवान बनने की सलाह देती है जो उसका खून चूसकर बेवकूफ बनाने वाले हैं उनका कोई बाल बाँका नहीं करता है। देश की जनता ही मुख्य उपभोक्ता होती है क्योंकि उसे जनजीवन से जुड़ी सारी सामग्री अथवा सुविधाएं खरीदनी पड़ती है। सामग्री का उत्पादन करने या सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला सारी हरामखोरी उपभोक्ताओं से करके मालामाल होने की कोशिश करता है। यह मोबाइल फोन का जमाना चल रहा है और देश की करीब नब्बे फीसदी जनता और निन्यानबे प्रतिशत परिवार इस समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल फोन सुविधा उपलब्ध कराने में लगी विभिन्न उद्योगपतियों की कम्पनियां और मोबाइल बनाने के कारखाने वाले उपभोक्ताओं का येनकेन प्रकारेण दोहन करने में जुटीं हैं। ऐसे मोबाइल बनाये जा रहें हैं जो दो तीन साल भी ठीक से नही चल पाते हैं और उन्हें बदलना पड़ता है। हमारे दुश्मन देश चीन के मोबाइल देश में आम उपभोक्ताओं तक पहुंच चुके हैं। कहते हैं कि कुछ कम्पनियों ने अपने मोबाइल सेट में ऐसी चिप्स लगा रखी है जिससे आपकी गतिविधियों को देखा जा सकता है। मोबाइल बनाने वाले जानबूझकर कर ऐसे मोबाइल बना रहे हैं जो टिकाऊ नहीं होते हैं।ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि उनके नये मोबाइल की मांग उत्पादन और बिक्री पर असर न पड़े।इस समय मोबाइल फोन का मतलब दुनिया को इंटरनेट के जरिये दुनिया से जुड़ना होता है। इंटरनेट सुविधा पाने के लिए लोगों को विभिन्न सेवा प्रदाता कम्पनियों से जुड़ना पड़ता है।उपभोक्ताओं को अपनी अपनी कम्पनियों की तरफ बुलाने की होड़ लगी है और तरह की स्कीम चलाकर नेट सेवा उपलब्ध कराया जा रहा है।विशेष सुविधाएं उपलब्ध करान के नाम पर तरह तरह की योजनाएं चलाई जाती रही हैं। आज वह समय आ गया है कि जो गरीब अनपढ गंवार भिखमंगा है वह भी नेट जरूर चलाता है। इस देश की कम्पनियों की नेट सेवा नीति उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने जैसी है।चाहे जियो हो चाहे एअरटेल या बीएसएनएल हो चाहे कोई अन्य हो सब उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी कर रहें हैं और उपभोक्ताओं को अबाध गति से न तो टूजी और न ही फोरजी नेटसेवा ही मिल पा रही है।कम्पनियां उपभोक्ताओं का उपभोग देखकर उन्हें जानबूझकर योजना बदलकर अधिक धन खर्च करने पर मजबूर किया जा रहा है। त्यौहारों पर सारी सुविधाओं को घोषित समयावधि के बीच में ही निष्क्रिय कर दिया जाता है ताकि उपभोक्ताओं की जेब लूटी जा सके।जब कम्पनियां उपभोक्ता को दिन महीने के आधार पर सेवाएं प्रदान करती हैं तो उन्हें वह सुविधा अंतिम दिन तक एक जैसी प्रदान करनी चाहिए।नेटवर्क आता जाता रहता है और उपभोक्ता नेटवर्क के आने जाने में उलझा रहता है। जब बीच में नेटवर्क गायब हो जाता है तो यहीं दिल कहता है कि मोबाइल तोड़ दें।जल्दी फोन नही मिलता है और बिना बात किये ही पैसा काट लिया जाता है।कभी कभी फोन पर साफ आवाज नही आती है और बार बार फोन करना पड़ता है।इतना ही नहीं कम्पनियां अक्सर मनमानी कटौती करती रहती हैं।धन कमाने के चक्कर में ही मोबाइल फोन सेवाओं का पिछले दिनों दुरपयोग हुआ है और सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ा है। इधर हर कम्पनी को अपने हर उपभोक्ताओं का आधार नम्बर जोड़ने के आदेश दिये गये हैं जिसका अनुपालन कम्पनियां करवा रही हैं। मोबाइल कम्पनियों का धर्म बनता है कि अपनी सेवाओं को धन कमाने के लिए मजाक न बनाये और जो उपभोक्ताओं से वायदा करें उसे ईमानदारी से पूरा करें। उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठाना उचित नहीं है क्योंकि ग्राहक को भगवान भी कहा जाता है और भगवान का दोहन करके धन कमाना ईश्वर के साथ धोखाधड़ी करने जैसा ही।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः----------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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         भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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