Wednesday, December 6, 2017

डीजे की धांय धांय से बढ़ती दिल के रोगियों की धड़कन-भोला नाथ मिश्रा

वैवाहिक कार्यक्रम खुशियों उमंगों की परिकल्पनाओं का उत्सव एवं मांगलिक सुअवसर होता है जो संकल्पों संस्कारों और  नाच गाना बजाना के परिपूर्ण होता है। इसे मनुष्य जीवन का स्वर्णिम सौभाग्यशाली मांगलिक मौका होता है जिसमें जिसकी शादी होती है वह ही खुश नहीं रहता बल्कि घर परिवार नातेदार रिश्तेदार दोस्त अहबाब सब पर बिबाह का खुमार छा जाता है और सभी मस्ती में झूमने लगते हैं। शादी बिबाह में नाच बाजा गाजा की रिवाज आज से नहीं बल्कि आदिकाल से है।बारात, बारात होती है चाहे भगवान भोलेनाथ की हो चाहे भगवान रामचन्द्र जी या फिर चाहे गरीब अमीर आम आदमी की हो।एक समय था जबकि बारात में नाचने वाली नृतकियां बाराती महफिलों की शान हुआ करती थी और जो लोग नाचने वाली लाने से असमर्थ होते थे वह लोग लौडे का नाच बाज बारात में ले जाते थे। लाउडस्पीकर बजता था और उसमें मौसमी मदमस्त गानों के रिकार्ड बजते थे।समय के साथ साथ बारात और बारातियों और बाराती नाच बाजे में भी बदलाव हो रहा है।अधिकांश खानदानी नाचने गाने वाली कुशमेश बिरादरी की महिलाओं ने नाचना गाना महफिलें सजाकर नथ उतराना बंद करके अब शादी ब्याह करने लगी हैं। अब इन खानदानी नृत्यांगनाओं की जगह एक समय में साल में एक दो पति के साथ गाँव गाँव घर घर नाच गाकर जीविका चलाने वाली बृजवासी बिरादरी की महिलाओं ने ले लिया है। खानदानी नृत्यांगनाओं के नाच गानों में अश्लीलता भोड़ापन और भोड़ी हरकतें नही होती थी और वह गजल ठुमरी के साथ क्लासिक फिल्मी गानें गाती थी लेकिन बृजवासी नृत्यांगनाएं किसी चींज से परहेज नहीं करती हैं और पैसा कमाने के लिए किसी भी तरह की अश्लीलता करने से भी गुरेज़ नहीं करती हैं। अबतक बृजवासी नृत्यांगनाएं भी साजबाज के साथ जाती थी और बारातों में महफिल लगाती थी किन्तु जबसे एक समान जानलेवा दिलों की धड़कनें बढ़ाने वाला बाजा डीजे आ गया है तबसे इन डुप्लीकेट नृत्यांगनाओं ने साजबाज और गाना बजाना सब छोड़कर डीजे पर एक्टिंग करना शुरू कर दिया है। डीजे का प्रचलन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है और अब लगता है कि बिना डीजे के बिबाह ही नही हो सकता है। डीजे सड़कों पर इस समय दहाड़ते और झनझानते हुये नींद हराम किये रहते हैं। इसकी आवाज रात कम से कम दो तीन किलोमीटर की परिधि में गूंजती है। इस समय सहालग के चलते यह डीजे रातों में नींद हराम किये हुये हैं।सबसे बड़ी दिक्कत दिल के मरीजों को होती है और डीजे की धमकदार आवाज से दिल की धड़कने और ब्लैड प्रेशर बढ़ने लगता है।एक तरफ तो दिल के मरीजों के लिए यह डीजे अभिशाप साबित हो रहें हैं वहीँ डीजे के आगे बारात के अन्य सभी सभी नाच गाने बाजे सब गौड़ होकर लुप्त हो रहे हैं। डीजे की धमकदार आवाज समाज के लिए घातक सिद्ध होने लगी है इसके बावजूद इस समय जल्दी कोई शादी बिबाह बिना डीजे के नही हो रहे हैं।डीजे बाजा जैसे बिबाह का एक आवश्यक अंग हो गया है और हम खुद इसे बढ़ावा दे रहे हैं। एक परिवार या एक व्यक्ति की क्षणिक खुशी के लिए समाज के जनजीवन को खतरे में डालना उचित नहीं है। सरकार को डीजे के बढ़ते प्रचलन पर जनहित में रोक लगानी चाहिए क्योंकि इससे समाज में दिल के रोगियों की संख्या वृद्धि हो रही है और जान का खतरा हो रहा है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

No comments:

Post a Comment