Sunday, December 17, 2017

भारत मे लोकतंत्र की मजबूती को वोटर शिप कानून जरूरी -भरत गांधी

आसाम-नकली लोकतंत्र को असली लोकतंत्र में बदलने के लिए वोटरशिप कानूनवोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के नीति निर्देशक श्री भरत गांधी ने गोहपुर असम में  पार्टी की एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा है कि संसद में सैकड़ों संशोधन द्वारा प्रस्तुत वोटरशिप के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार जब तक कानून नहीं बनाती, तब तक यूरोप से आयात किया हुआ नकली लोकतंत्र नकली ही बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वोट का अधिकार तब तक महज एक भ्रम है, जब तक कि वोटर को देश के खजाने में हिस्सा देने के लिए वोटरशिप का कानून नहीं बन जाता और देश के वोटरों की औसत आमदनी की आधी रकम लगभग 5896 रूपये उनके बैंक अकाउंट में हर महिना मिलना शुरू नहीं हो जाता। राजनीतिक सुधारों दर्जनों पुस्तकों के लेखक और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के संस्थापक श्री गांधी ने कहा कि आज के 12 साल पहले सन 2005 में उन्होंने सैकड़ों सांसदों के माध्यम से संसद में यह प्रस्ताव पेश कराया कि मशीनों के इस युग में बेरोजगारी खत्म करना असंभव है और सबके हाथों को काम दे पाना पूरी तरह संभव है। ऐसी स्थिति में देश में जितना पैसा मशीनें पैदा कर रही हैं और सरकारी मशीनरी के कारण पैदा हो रहा है और जितना पैसा प्राकृतिक संसाधनों के कारण पैदा हो रहा है, यह सभी पैसा जोड़कर काम करने के शर्त के बिना वोटरों के खाते तक भेजा जाए। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद है कि उनकी बात को सरकार मान रही है लेकिन बहुत धीरे धीरे।्री भरत गांधी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने उनकी बात मानकर मनरेगा कानून बनाया, मनमोहन सिंह सरकार ने कैश ट्रांसफर स्कीम चालू किया, लोग कई खाता खोलकर पैसे ना ले लें इसके लिए आधार कार्ड की योजना शुरू की और गैस सिलेंडर की सब्सिडी का जो पैसा गैस कंपनियों के पास जाता था, वह लोगों के पास भेजना शुरू किया। श्री गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने जनधन के नाम से लोगों के बैंक में खाते खुलवाए और यूनिवर्सल बेसिक इनकम के नाम पर कुछ पैसा देने की तैयारी कर रही है लेकिन वोटरों का पूरा हक यूनिवर्सल बेसिक इनकम से नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि यह ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है। श्री गांधी ने कहा कि सभी धर्मों, सभी जातियों, सभी प्रदेशों और सभी देशो के पावर्टी लाइन सोसाइटी को मिलकर अपने आर्थिक हितों के लिए संघर्ष करना होगा, तभी भारत से और दूसरे देशों से आर्थिक गुलामी की कुप्रथा समाप्त हो सकेगी।स्वदेशी विदेशी के नाम पर असम में जनता पर असम सरकार और असम पुलिस द्वारा चलाए जा रहे जुल्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग दर्जनों सालों से आसाम में रह रहे हैं उन लोगों को स्वदेशी विदेशी के नाम पर घरों से उजाड़ा जाना ठीक नहीं है। उनके मकानों पर बुलडोजर चलाना ठीक नहीं है। उनके मकान और जगह जमीन कब्जा करना ठीक नहीं है। जंगलों में जो लोग रहने लगे, जंगल उन्हीं के हो गए। इसलिए जब तक दक्षिण एशिया एशियाई वतन की साझी सरकार नहीं बन जाती और जिन लोगों पर संदेह है उनको दक्षिण एशियाई नागरिकता देने की कानूनी गुंजाइश नहीं बनाई जाती, तब तक असम की जनता पर अत्याचार और जुल्म सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ऐसा करेगी, तो सड़कों पर भीख मांगने वालों की संख्या बढ़ेगी और उनमें से कुछ लोग आतंकवाद का रास्ता पकड़ लेंगे, जिससे बड़ी मुश्किल से आसाम उबर रहा है।

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