Wednesday, December 6, 2017

नवीन गुप्ता के हत्यारो को पकड़ने में नाकाम पुलिस फटाफट ढूढ लेती है मंत्री जी कि भैंस

पत्रकार नवीन गुप्ता के हत्यारों को खोजने में नाकाम पुलिस मंत्री की भैंस को 24 घण्टे में खोज लेती है परन्तु हत्यारो को खोजने में नाकाम रहती है। क्या पुलिस में केवल जानवर खोजने की क्षमता ही बची है। कहा गए मुखबिर और कहा गया पुलिस का खुफिया सूचना तंत्र। हाईटेक पुलिसिंग कही जाने वाली कानपुर पुलिस अभी तक हत्या की बजह भी जानने में कामयाब नही हो सकी। क्या इससे ज्यादा किसी और जगह भी लोकतंत्र को खतरा है। कही इसमे *पत्रकार की हत्या करने के साथ साथ पत्रकारिता को दमन* करने की कोई सरकारी योजना तो नही है। कहा गए वो सभी पत्रकार हित के लिये बड़े बड़े दम्भ भरने वाले पत्रकारों के संगठन, क्या उनकी आवाज़ को सुनने वाला कोई नही है। उनका रुतवा भी केवल पत्रकारो तक ही सीमित रह गया है। अरे! आज नवीन के साथ तो कल कोई और नही हमारे आपके परिवार से ही कोई भाड़े के हत्यारों की गोली का निशाना बनेगा। क्योकि हम तो केवल नेता नगरी करेंगे और हमारी आपसी फुटन का लाभ रोजाना किसी न किसी पत्रकार को अपनी जान गवां कर भृस्टाचारियों की झोली का निवाला बनेगा, क्योकि हम तो केवल पत्रकारो के नेता है, काम क्या करे, और एक जुट कैसे हो, ईगो जो साथ नही आने दे रहा है।सभी संगठन के नेताओ से हाथ जोड़कर अश्रु पूर्ण विनती के साथ निवेदन है कि पत्रकार की हत्या हुई है, इसमे अपना ईगो त्याग कर एक दिशा में एक साथ बैठ कर रणनीति के साथ काम करे और प्रशासन को हिला कर रख दे। आप सब मे वो क्षमता है कि आप सभी नवीन गुप्ता के हत्यारों को न्याय दिला सकते हो।
एक पत्रकार

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