Monday, December 11, 2017

तलाक कोई शब्जी नही जिसे जब चाहो ले लो

अदालताें में तलाक के मामले लगातार अा रहे हैं। दंपती छोटी-छोटी बात पर तलाक लेने के अदालत पहुंच जाते हैं। इससे जज भी परेशान हैं और ऐसे दंपतियों को समझाने की कोशिश भी करते हैं। ऐसा ही उदाहरण यहां भी देखने को मिला। यहां आयोजित राष्‍ट्रीय लोक अदालत में तलाक लेने पहुंची महिला से जज ने कहा कि तलाक कोई सब्‍जी नहीं जो जब चाहो ले लो।
जिला कोर्ट कांप्लेक्स में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक विवादों के चलते टूटने की कगार पर पहुंचे घरों को बचाने की अदालत की भी अधिकतर कोशिशें रंग नहीं लाईं। जिला कोर्ट कांप्लेक्स के कार्ट रूम नंबर दो में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीपी सिंह की अदालत में अन्य मामलों के साथ-साथ कुछ पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की भी सुनवाई हुई।एक मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पति से तलाक चाह रही महिला को बहुत समझाने की कोशिश की, कि एक बार वह अपने पति के साथ विवाद को निपटाकर अपने पति के साथ रहना शुरू करे। धीरे-धीरे सारे विवाद खत्म हो जाएंगे और दोनों में फिर से मधुर संबंध बन सकते हैं।अदालत ने कहा कि उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेने की बात कही, उसके नाम पर पति की आधी जमीन कराने की बात कही। इसके बावजूद महिला नहीं मानी और उसने रोते हुए अदालत को अपना दुख सुनाते हुए कहा कि वह यह कोशिश तीन बार कर चुकी है, पर उसका पति नहीं सुधरा। अब तलाक के सिवाय कोई चारा नहीं। इस पर जज ने महिला से कहा कि तलाक कोई सब्जी नहीं कि बाजार से गए और खरीद ली।यह भी पढ़ें: दुबई से आई फ्लाइट की सीट के नीचे से मिला 14 किलो सोना, किसका है पता नहींउन्होंने कहा कि कानून में तलाक के लिए कुछ शर्तें हैं। अदालतों की ओर से यह कोशिश की जाती है कि किसी का घर न टूटे, पर अगर कोई विकल्प ही नहीं बचा हो तो फिर कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही तलाक

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