Monday, December 18, 2017

कन्नौज के खेतों में खतरे में है आलू की फसल

कन्नौज ब्यूरो पवन कुशवाहा के साथ आलोक प्रजापति 
  
कन्नौज। बदलते मौसम से आलू के नुकसान की आशंका बढ़ी है। बूंदाबांदी हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। पौधों में झुलसा रोग का खतरा बढ़ने लगा है। मौसम का मिजाज बदला तो सबसे ज्यादा आलू किसानों को झटका लगेगा। पिछले वर्ष झुलसा रोग से काफी फसल बर्बाद होने से कृषि वैज्ञानिक व किसान सोच में पड़ गए हैं। इसलिए उद्यान विभाग ने रोग से बचाव के लिए कदम उठाए हैं। इस बार जिले के 95 फीसद किसान आलू की गड़ाई कर चुके हैं। कुछ जगह आलू खोदाई शुरू है जबकि ज्यादातर में एक सप्ताह बाद शुरू हो जाएगी। अब भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आलू अनुसंधान क्षेत्रीय केंद्र मोदीपुरम मेरठ की पहल पर उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने झुलसा रोग से बचाव के तरीके निकाले हैं। समय रहते किसान फसल को झुलसा से खुद बचा सकेंगे। कृषि वैज्ञानिक उद्यान विभाग की मदद से कार्यशाला के जरिए तौर-तरीके बताएंगे।
कम तापमान पर लगता रोग
नम मौसम में झुलसा रोग की शुरुआत होती है। घना कोहरा व बूंदाबांदी के बीच यह तेजी से फैलता है। रोग वायरस की तरह एक-एक कर पौधों को चपेट में लेता है। इसके प्रकोप से पत्तियां झुलस जाती हैं। पत्तियों में काले रंग के धब्बे बन जाते हैं। पौधों में फफूंदी दिखती है। इससे धीरे-धीरे पौधे नष्ट हो जाते हैं। 10 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर इसका असर तेजी से होता है। महज दो से चार दिन में फसल नष्ट कर देता है।

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