Tuesday, December 5, 2017

शहीद पत्रकार को न्याय नही मिलने पर पत्रकार हुए आंदोलित

विष्णु पाण्डेय

कानपुर की तहसील बिल्हौर के अंतरगत बिगत दिनों एक अखवार के पत्रकार नवीन गुप्ता की कुछ लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।जिसमें हत्यारों को पुलिस अभी तक पकड़ नही पाई है। पत्रकार नवीन  हत्या के बाद से ही कानपुर के पत्रकार आंदोलित है। और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक हत्यारे पकडे नही जाते।हालांकि यह आंदोलन धीरे धीरे अन्य जनपदों में भी देखने को मिल रहा है,जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं।कानपुर मे छोटे बडे बैनर की बात करें तो सभी को मिलाकर यहाँ लगभग पांच हजार के आसपास पत्रकार है,अच्छी बात यह है कि इस आंदोलन में वह सब एक जुट हैं।आए दिन पत्रकारो पर हो रहे हमले यह देश के लिए अच्छे संकेत नहीं है।कहने को तो पत्रकार संविधान का चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन उसके ऊपर जिस तरह जान लेवा हमले हो रहे है यहाँ तक कि मौत के घाट उतार दिया जाता हैं ऐसे मे उसकी सुरक्षा के लिए एक कानून तक नहीं?जबकि सरकार अपने मंत्री,अपने नेता,नेता बिरोधी,नेताओं के परिवार,नेताओं के जानबरो तक को सुरक्षा उपलब्ध कराती हैं यहाँ तक कि अपने लिए हर तरह का कानून जब चाहे पास कर लेती हैं।लेकिन पत्रकार के लिए न कोई सुरक्षा है और न कोई कानून?पत्रकार ने अगर समाज को सच्चाई का आइना दिखाया तो सरकार से दुश्मनी?अगर सरकार की गलत नीतियों को समाज मे अच्छा दिखाया तो समाज से दुश्मनी,अगर एक नेता की अच्छाई दिखाई तो बिरोधी नेताओं से दुश्मनी?अगर बढ़ती बारदातो को सही दिखाया तो प्रसाशन से दुश्मनी?यदि भृष्टाचार पर लिखा अथवा दिखाया तो मांफियाओं से दुश्मनी?कहने को तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ,लेकिन सुरक्षा के नाक्ष पर जीरो?पत्रकार जब घर से निकलता है तो भरोसा नहीं है कि वह वापस आएगा या नहीं?यदि इसी तरह की घटना किसी नेता के साथ हुई होती,और वह मारा गया होता तो अब तक कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ चुकी होतीं?लेकिन यहाँ एक पत्रकार की हत्या हुई है इससे सरकार को क्या लेना देना।सरकार व सरकारी नुमाइदें यह भलीभांति जानते है कि पत्रकार कभी भी कानून का उल्लंघन नही कर सकता,इससे कानून व्यवस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।अगर यही हत्या किसी संगठन के कार्यकर्ता की होती तो सरकार के मंत्री नेता चुनाव प्रचार भूल चुके होते?मित्रों अब समय आ गया है कि इस आंदोलन को तब तक जारी रखना है जब तक पत्रकारो के लिए कोई ठोस कानून न बन जाय।और आगे इस तरह की घटनाएं न घटित हो,इस आंदोलन की आग को इतना जलाओ कि ज्वालामुखी बन जाय,अपनी कलम को इतनी धार दो कि वह फौलादी हथियार बन जाय,अपनी कलम को सच्चाई के मार्ग पर ले जाओ,समाज की जो हकीकत है उसी को लिखो,उसी को दिखाओ,ग्रामसेवक,लेखपाल, से लेकर मुख्य सचिव तक,होमगार्ड, से लेकर डीजीपी तक,ग्राम प्रधान,सभासद, से लेकर मुख्यमंत्री तक,ग्रामीण, से लेकर महानगर तक,हम प्रण करें कि जो हम देखेंगे वही लिखेंगे।क्योंकि सरकारी तंत्र हो,या समाज, नेता हो या माफिया,अथवा सरकारी विभाग,ऐसी कोई जगह नहीं है जहां अच्छाई,और बुराई न हो,और वह सब हमारी आपकी नजऱों के सामने है।ऐसी कोई वस्तु नही जो हमें दिखाई न दे रही हो,यही समय है उजागर कर दो पूरे के पूरे काले कारनामे,खोल दो वह सारे क्राइम जो बर्षों से फाइलों मे दफन है।जिस दिन इतना सभी ने कर दिया यकीन मानिए हत्याकांड तत्काल खुलेगा, हत्याओं पर अंकुश लगेगा, और सरकार कानून बनाने के लिए बाध्य होगी।

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