Saturday, December 2, 2017

यूपी में बिजली मूल्यों में इजाफा अच्छे दिनों के इंतिजार में जनता-भोला नाथ मिश्रा

देश प्रदेश की जनता ने अच्छे दिन आने की लालसा से मोदी योगी जी को वोट देकर प्रचंड बहुमत से जिताकर सरकार बनवाया था।सरकार बनने के बाद से ही लोग अच्छे दिन आने की राह देख रहें हैं।अच्छे दिन आने की उम्मीद नोटबंदी से बंधी थी इसलिए गाँव गरीब सभी ने दो हजार रुपये बदलने के लिए भले ही महीनों दौड़ भाग लगाई लेकिन उफ् नही किया और तमाम दिक्कतों के बावजूद मोदी जी बुराई सुनना पसंद नही किया। बाद में पता चला कि जिस उम्मीद से लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में भी मोदी का साथ दिया उस उम्मीद पर पानी फिर गया और कोई हरामखोर रूपये बदलने के लिए बैंक की लाइन में नहीं खड़ा हुआ। मोदी जी की नोटबंदी  में राजनेताओं एवं हरामखोरों को बैंक से कैसे एक मुश्त भारी रकम मिल गयी इस पर सरकार ने कोई गौर नहीं किया लेकिन बैंक को बेलगाम करके मनमानी कटौती करने और ग्राहक को भगवान की जगह गरजी बेवकूफ मनाने की छूट लगता है कि जरूर दे दी गयी है।आज बैंकों की मनमानी गाँव गरीबों के लिए मुसीबत बनती जा रही है।बैंकों में इस समय ग्राहक को भगवान मानकर सम्मान नहीं बल्कि उन्हें अपमानित किया जा रहा है।बैंकों की उल्टा रीति तबसे शुरू हुयी जबसे सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बैंक के माध्यम से दिया जाने लगा है। सरकार ने प्रचार प्रसार करके  बैंक में खाते खुलवा दिये गये लेकिन उसमें अच्छे दिन अभी नही आये हैं।नोटबंदी के दौरान जिनके खातों पर अच्छे दिन आये भी थे उनकी जाँच शुरू हो गई है।
मोदी योगी जी के आने के बाद लगा कि सत्ता के साथ व्यवस्था और कार्य व्यवहार भी बदल जायेगा और बेइमानों की खटिया खड़ी हो जायेगी। लेकिन मोदी योगीजी के प्रयास के बावजूद सबकुछ पहले जैसा ही है और बिना रिश्वत दिये कोई कार्य नही होता है।व्यवस्था से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी तो मोदी योगी जी के साथ चल रहे हैं लेकिन अधिकांश मोदी योगीजी की खटिया खड़ी करने और.टांग घसीटने में लगे हैं। गाँव के लोगों को मिलने वाले मिट्टी तेल में लगातार कटौती की जा रही है और सस्ते दामों वाली शकर का वितरण बंद ही कर दिया है। भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर अनुदान बैंक खाते में भेजने की योजना का लाभ भले ही न मिल पा रहा हो किन्तु गाँव गरीब को एडवांस पूजीं इकठ्ठा करने में दिक्कत उठाने पर विवशकर दिया गया है।तमाम लोग ऐसे हैं जिनके खातों में छूट राशि लगातार नहीँ पहुंच पा रही है।रसोई गैस के दामों में बेतहाशा वृद्धि करने से जिन गरीबों को मुफ्त में गैस सिलन्डर चूल्हा दिया गया था उनकी बुतात उसे बदलने की नही रह गयी और उनमें तमाम ऐसे भी हैं जो ले जाने के साथ दूबारा लौटकर एजेंसी पर नहीं आये हैं।गैस के दाम बढ़ाकर लगता है कि अच्छे दिन लाने के प्रयास किये जा रहा हैं। जीएसटी का सबसे ज्यादा असर छोटे लघु कुटीर उद्योगों पर पड़ा है क्योंकि बड़े धंधे वाले पहले से ही आयकर और व्यापार कर अदा कर रहे थे।अब चाहे वह लाख दो लाख या दो हजार रुपये का धंधा हो सभी को रजिस्ट्रेशन कराना एवं खरीद बिक्री का ब्यौरा प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे सरकार का खजाना भले ही भर रहा हो किन्तु तमाम छोटे  जीविकोपार्जन के धंधे जरूर बंद हो गये हैं। सरकार गाँव गरीबों की चमड़ी उधेड़ कर भले ही सरकारी खजाना भर रही हो लेकिन आम लोगों की नींद अच्छे दिनों के चक्कर में हराम जरूर हो रही है।अबतक सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया था जिससे लगता कि सरकार गाँव गरीब विरोधी है लेकिन बिजली विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं की बिजली की दरों में डेढ़ सौ गुना की वृद्धि करने के प्रस्ताव से लगने लगा है कि सरकार गाँव विरोधी हो गयी है।अब तक सरकारें गाँव गरीबों की सुविधाओं में कटौती करके गाँव वालों पर अतिरिक्त बोझ नही डालती थी बल्कि लगातार गाँव गरीब को तरह तरह की सहुलियत देती थी। यह पहला अवसर है जबकि शहरों नहीं गाँव में रहने वाली जनता पर डेढ़ सौ गुना बिजली का बोझ डालने का प्रस्ताव किया गया है। विद्युत विभाग की इस घोषणा के बाद गाँव गरीबों में तूफान आ गया है और हर ग्रामीण बिजली उपभोक्ता तिलमिला उठा है।उसे लगने लगा कि अब अच्छे दिनों के चक्कर में बुरे दिन आ गये हैं।सभी जानते हैं कि गाँव में रहने वाले के घर में अगर कोई सरकारी नौकरी नही करता है तो उसे ढंग से पेट भरना और बच्चों को पढ़ा पाना मुश्किल हो जाता है। बिजली विभाग के प्रस्तावित डेढ़ सौ गुना मूल्य वृद्धि के बाद गाँव की बहुसंख्यक आबादी प्रभावित होगी और तमाम लोग अपना कनेक्शन कटवाने के लिये मजबूर हो  जायेंगे। गाँव गरीबों की बिजली के मूल्य में डेढ़ सौ गुना की वृद्धि करना सरकार के गाँव विरोधी साबित करने जैसा लगता है। बिजली मूल्य वृद्धि के प्रस्ताव की जानकारी होने के बाद विपक्षी दलों की बन आयी और वह मतदाताओं पर अच्छे दिन आने तंज कसने लगे हैं। विपक्षियों के ताने और तंज को सुनकर योगी मोदी के नाम पर जान छिड़कने वाली गाँव की जनता अपने को ठगा सा महसूस करने लगी है।सरकार को चाहिए कि अगर वह भला न कर सके तो गाँव और ग्रामीणों का अनभला भी न करे क्योंकि कहा गया है कि भिक्षा दो या न दो लेकिन भिक्षा मांगने वाली तोंबीं नहीं फोड़नी चाहिए। गाँव अभी भी दीनहीन और दया का पात्र है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः ऊँ नमः शिवाय।।।
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         भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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