Friday, December 8, 2017

राजनीति में राजनेताओं की बदजुबानी और उसके राजनीतिक लाभ पर रिपोर्ट-भोला नाथ

🇮🇳सुप्रभात-सम्पादकीय🇮🇳
साथियों,कल हमने रामजन्मभूमि बाबरी मुद्दे पर राजनीति के चलते देश को कमजोर करने और राजनेताओं को राष्ट्रीय स्मिता आस्था से जुड़े अहम मुकदमों में  वकील होने के बावजूद अदालत में बहस करने की अनुमति न देने पर जोर दिया था क्योंकि राजनेता चाहे खेलकूद का मैदान हो चाहे चाहे चाहे शादी बिबाह अदालत या फिर चाहे शोकसभा हो मौका पाते ही अपना भाषण देकर अपनी राजनीति पक्की करने लगता है।सभी राजनेता एक जैसे नहीं होते हैं लेकिन कहावत है कि एक मछली पूरे तालाब के पानी को गंदा कर देती है। कुछ राजनेता तो अपनी राजनीति चमकाने और मुफ्त सुर्खियों में आकर सस्ती लोकप्रियता के लिए समय समय पर राजनैतिक बदजुबानी करके बखेड़ा खड़ा किया करते हैं।राजनीति में बकवास करके लोगों की भावनाओं को भड़काने का अक्सर दौर चला करता है।इन राजनेताओं में सत्ता व विपक्ष दोनों के राजनेता शामिल हैं।
राजनीति में राजनेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए किस बात का बतंगड़ बनाकर उसका राजनैतिक फायदा ले लेगा इसका अंदाज लगा पाना आसान नहीं होता है।राजनीति में बयानबाजी करके अपना उल्लू तो सीधा किया जा सकता है किन्तु उससे उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।राजनीति के चलते ही आज जातिवाद साम्प्रदायवाद प्रांतवाद नक्सलवाद के साथ ही साथ भाई भाई का दुश्मन बनता जा रहा है। बदलते परिवेश में लगता है कि जैसे राजनेताओं को अपनी राजनीति को छोड़ किसी भी स्थिति परिस्थिति या देशहित से कोई मतलब ही नही रह गया है। इधर गुजरात चुनाव के मद्देनजर राजनीति तेज है और राजनेता एक दूसरे की जुबान पकड़कर राजनैतिक लाभ लेने में जुटे हैं। कांग्रेस को गर्त से फर्श और फर्श से सिंहासन तक पुनः पहुंचाने के लिये जहाँ राहुल गाँधी रातदिन एक कर रहें हैं वहीं उनकी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ पढ़ें लिखे राजनेता बदजुबानी करके पार्टी की फजीहत कराने में जैसे लग गये हैं।दो दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शीर्ष अधिवक्ता पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद पक्ष की तरफ जिस तरह की बातें कही उससे पार्टी ने ही नही बल्कि मुस्लिम संगठनों तक ने किनारा कस लिया है।कपिल सिब्बल की अदालत में दी गयी दलील आज गुजरात चुनाव का मुद्दा बन गयी है और भाजपा उसे भुनाने में जुट गयी है।कपिल सिब्बल साहब की जुबान गुजराती चुनाव का मुद्दा बन ही रहा था कि कल एक और वरिष्ठ कांग्रेसी राजनेता मणिशंकर अय्यर ने बदजुबानी करके कांग्रेस के लिये नहीं मुसीबत खड़ी कर दी है हालांकि पार्टी ने इनके भी बयान से अपना पल्लू झांड़ लिया है। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए उनसे माफी मांगने के निर्देश दिये थे और उन्होंने माफी मांग भी लिया है। मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री को नीच और असभ्य कहकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। मणिशंकर अय्यर के माफी मांग लेने के बावजूद यह मामला भी गुजराती चुनाव का एक मुद्दा बन गया है।अपनी बदजुबानी से पार्टी को सांसत में डालने में सिर्फ कांग्रेस के दो राजनेता ही नही बल्कि ऐसे बदजुबान राजनेता अन्य दलों में भी मौजूद हैं जो समय समय चर्चा में आया करते रहते हैं।राजनीति में चुनावी पांसे फेकें जाते है और जब दाँव फेल हो जाते हैं तो उल्टा असर दिखाने लगते हैं।लोकतंत्र में स्वस्थ राजनीति की जाती है किसी की भावनाओं पर कुठाराघात नही किया जाता है।राजनेता राजनीति में अपने प्रतिद्वंद्वी की नीतियों रीतियों की आलोचना करता किन्तु असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करके अपमानित नहीं करता है।राजनेता बनना आसान होता है लेकिन राजनीति का धर्म निभाना आसान नहीं होता है।इस समय नेताओं की बदजुबानी देश को कमजोर करने लगी है और देश विभिन्न समस्याओं से झुलस रहा है।राष्ट्र समाज विरोधी कार्र करने बदजुबानी करने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त राजनेताओं को राजनीति से दूर रखने की आवश्यकता है क्योंकि इनकी वजह से राष्ट्र कमजोर हो रहा है और उसकी स्मिता खतरे में पड़ती जा रही है।बेलगाम बदजुबान राजनेताओं की जुबान पर लगाम लगाना देशहित में जरूरी हो गया है।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः---------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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