Saturday, December 30, 2017

जन विरोधी बनती कल्याणकारी योजनाए

सरकार का धर्म बनता है कि वह जन कल्याणकारी योजनाओं को चलाकर जनकल्याण करे।कल्याणकारी योजनाएं जनविरोधी न बनने पाये इसके लिए जरूरी होता है कि उन्हें लागू करने से पहले ही ठीक तरह से उनकी सभी नजरिये से जांच पड़ताल करने के बाद ही उन्हें धरातल पर लाया जाय। है। जल्दबाज़ी में लागू की जाने वाली योजनाएं कभी जनकल्याणी न रहकर दुखदायी होने लगती हैं। इधर हमारी सरकार भ्रष्टाचार मिटाकर जन कल्याणकारी होने का दावा जरूर कर रही है लेकिन उसकी अधिकांश भ्रष्टाचार विरोधी योजनाएं जनता के लिये दुखदायी साबित हो रही है। सरकार द्वारा अब तक भ्रष्टाचार मिटाने के लिये प्रत्यक्ष अनुदान मुक्त वातावरण बनाने के नाम पर तमाम योजनाएं शुरू की गयी हैं लेकिन उनमें से तमाम योजनाएं ऐसी हैं जो जनहित में नहीं साबित हो रही हैं और उनका दुष्प्रभाव राजनैतिक दृष्टि से आमलोगों पर पड़ रहा है क्योंकि इनमें तमाम योजनाएं ऐसी होती हैं जो जनमानस से जुड़ी होती हैं। सरकार ने पहली बार किसीे जनमानस से जुड़ी एवं प्रासंगिक बने मिट्टी तेल यानी किरोसिन व्यवस्था का दायरा बढ़ाने की जगह घटाया और मूल्य बढ़ाया जाने लगा है जिसका प्रभाव आमजनमानस पर पड़ रहा है। इस समय कोटेदार के यहाँ खासोआम को दरवाजे पर चिराग जलाने के लिए नही पा रहा है। इसी तरह सरकार ने गरीबीं रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों को नियन्त्रित मूल्य पर हर माह कोटे की दूकान से मिलने वाली शकर को वितरण योजना से बाहर कर दिया गया है। आमजनता की नींद भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से हराम हो रही है और इसका सीधा प्रभाव बहुसंख्यक आबादी पर पड़ा है। सरकार की नोटबंदी भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की जगह जनता और सरकार दोनों के लिए दुखदायी बन रही है।जिन हरामखोरों की हरामखोरी को समाप्त करने के लिए नोटबंदी लागू की गयी थी वह हरामखोर एक साल बीत जाने के बाद अपनी हरामखोरी से बाज नही आ रहें हैं। सरकार पुनः नोटबंदी करके दो हजार रुपये के नोटो में बदलाव कर सकती हैं और इसके बदलाव करने की सिफारिश भी एसटी ने सरकार से कर दी है।अगर सरकार प्रस्ताव को मानती है तो दो हजार के नोट भी जल्दी ही बंद हो सकते हैं। सरकार की नोटबंदी हरामखोरों पर भले ही रोक न लगा पायी हो लेकिन आमजनता आजतक बैंकों की मनमानी से दुखी है। जीएसटी में सरकार का बार बार बदलाव इस बात का प्रतीक है कि उसमें खामियां थी। जिस उज्जवला गैस योजना का लाभ सरकार को पिछले विधानसभा चुनावों में मिला है लेकिन जबसे गैस सिलन्डरों के दाम बढ़ने लगे हैं तबसे लाभार्थियों का मोह इस योजना से भंग होने लगा है। अधिकांश लाभार्थियों ने एजेंसी से एक बार ले जाने के बाद दूबारा गैस ही नही भराया है और दूबारा गैस एजेंसी का मुंह तक देखने नही गये हैं। जो हिम्मत करके दो चार बार गये भी थे वह भी अब घर बैठकर चूल्हें में खाना बनाने लगे हैं।योजना को लागू करने के बाद एलपीजी गैस सिलेंडरों के दामों में हुयी भारी वृद्धि ने योजना को गरीबों से दूर करती जा रही है। गैस अनुदान बैंक खातों में नियमित नही जा पा रहा और इसमें में भी खेल और घालमेल दोनों होने लगा है। सरकार को होश तो आता है लेकिन झटका अहसास होने के बाद होता है। इधर सरकार ने किरोसिन के मूल्यों में हो रही लगातार वृद्धि और कटौती को फिलहाल रोक दिया है। साथ ही हर महीने गैस.सिलन्डर के दाम बढ़ाने की योजना को भी बंद कर दिया है। ऐसा निर्णय संभवतः राजनैतिक हानि लाभ को ध्यान में रखकर किया गया है। भविष्य को भाँपकर सरकार ने पिछले महीने ही हर महीने गैस मूल्यवृद्धि करने की योजना को वापस ले लिया है। हर माह एलपीजी गैस के मूल्यों में वृद्धि करने का निर्णय जून सोलह में लिया गया था जिसे सत्तरह महीने बाद वापस लिया गया है।भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर गरीब को मिटाना उचित नहीं है क्योंकि उसी के बल इतना प्रबल बहुमत मिला है। कभी कभी जनता को सुख देने की योजना ही उसी जनता के लिए सिरदर्द बन जाती हैं और दुख पहुंचाने लगती है। सरकार की बैंक के जरिये अनुदान देने की योजना जनता के लिए दुखदाई बनती जा रही है और अनुदान बैंक खातों में नही पहुंच पा रहा है।लोग जाते हैं और नकद पूरे दाम देकर बिना रसीद लिये ही गैस सिलन्डर उठा लाते हैं । पहले छूट काटकर एजेंसी पर पैसे लिये जाते थे और लेकिन अब पूरा मूल्य चुकाना पड़ता है। पहले भी वितरक अपने लोगों के नाम गैस की किताब बनवाये थे आज भी बनवाये हुये हैं। सरकार हरामखोरों की हरामखोरी तो रोक नहीं पा रही है लेकिन हरामखोरों से बचाने के नाम पर जनता की दुश्मन जरूर बनती जा रही है जो उचित नहीं है।सभी जानते हैं कि इस देश के अपराधी हर कानून बनने से पहले ही उसका काट ढूंढ लेते हैं। इसीलिए योजनाओं का खामियाजा अपराधियों को नही बल्कि जिसके हित में बनती हैं उन्हें भुगतना पड़ता है। भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर गाँव गरीब जनता को बहुत परेशान करना घातक सिद्ध हो सकता है।गैस के मूल्यों होने वाली मासिक वृद्धि पर रोक लगाना स्वागत योग्य कदम है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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