Saturday, December 16, 2017

उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध और मकोका

इधर पूरे देश में संगठित अपराधों एवं अपराधियों का बोलबाला है।चाहे महाराष्ट्र हो चाहे पश्चिम बंगाल हो चाहे बिहार हो आदि राज्य हो हर प्रदेश में संगठित अपराधियों का साम्राज्य स्थापित है।संगठित अपराधों में साम्प्रदायिक हिंसा ठेकेदारी समाजिक अपराध आदि सभी आते हैं।इन संगठित अधिकांश अपराधियों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त रहता है जिसकी वजह से यह भयमुक्त होकर अपराध करते हैं।इन संगठित अपराधियों में विभिन्न दलों संगठनों व समुदाय के लोग शामिल होते हैं।इधर पिछले दो तीन दशकों से प्रदेश में संगठित संरक्षण प्राप्त अपराधियों का बोलबाला है और मौजूदा कानून चाहकर भी इनका बाँल तक बाँका नही कर पाता है।इन संगठित अपराधिक लोगों में वह लोग भी शामिल हैं जो आंतकवादियों को बढ़ावा देते हैं और आंतकवादी बनाकर उनका इस्तेमाल देश के विरुद्ध करते हैं।प्रदेश के दो चार जिले इधर आतंकियों के नाम पर बदनाम हो चुके हैं क्योंकि इन जिलों के सैकड़ों आतंकी अब तक देश दुनिया में होने वाली आतंकी घटनाओं में रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं।उत्तर प्रदेश इस समय पूरी तरह से संगठित अपराधियों की गिरफ्त में आ गया है तथा हर क्षेत्र में दखंलदाजी कर कानून धत्ता बता रहा है।महाराष्ट्र सरकार इन संगठित अपराधियों के नाक में नकेल डालने के लिए काफी पहले ही मकोका कानून बनाकर लागू कर चुकी है।दो हजार सात के आसपास प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री बसपा प्रमुख इस तरह का कानून प्रदेश में बनाने का प्रस्ताव पास कर चुकी हैं किन्तु उस समय राजनैतिक परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं थी और यूपीए की सरकार केन्द्र में सत्तारूढ़ थी।प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश को भयमुक्त और अपराधमुक्त बनाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए मकोका की तर्ज़ पर यूपीकोका कानून बनाने का ऐतिहासिक फैसला परसों की कैबिनेट की बैठक में लिया गया है।बैठक के बाद इसकी जानकारी देते हुए सरकार के प्रवक्ताओं ने बताया कि इस कानून के तहत बाहुबल से विभिन्न कार्यों का ठेका हथियाने, अपहरण के बाद फिरौती मांगने, अवैध खनन करने या कराने,अवैध शराब बनाने, वन उपज का गैर कानूनी ढंग से दोहन करने, नकली दवाओं को बनाने, वनजीवों की तस्करी करने,सरकारी व गैर सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने, रंगदारी या गुंडा टैक्स आदि वसूलने वाले आते हैं। इनके विरुद्ध इस प्रस्तावित यूपीकोका का इस्तेमाल किया जायेगा।इसके लिये अपराध नियंत्रण प्राधिकरण का गठन किया जायेगा तथा इसका इस्तेमाल कमिश्नर और डीआईजी की संस्तुति के बाद ही किया जायेगा। कानून को दुरपयोग होने से बचाने और मनमानी पर नियंत्रण लगाने के लिए एक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अपीलीय प्राधिकरण का गठन भी किया जायेगा।योगी सरकार का यह फैसला भयमुक्त समाज की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है क्योंकि इससे पहले दिल्ली व महाराष्ट्र में मकोका आतंकवाद से निपटने में काफी सहायता मिल चुकी है।इस देश की राजनीति में हर महत्वपूर्ण कानूनों का समय समय पर दुरपयोग होता रहा है लेकिन दुरपयोग के डर से समाज के संगठित अपराधियों को अपराध करने और आतंकवाद को बढ़ावा देना भी उचित नहीं है।आज संगठित अपराध समाज और देश की एकता अखंडता के लिये खतरा पैदा हो गया है।कुछ राज्य ऐसे हैं कि जहाँ पर संगठित संगठन खुलेआम साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं और सरकार मौनधारण धारण किये हुए हैं।देश अधिकांश प्रांत इस समय संगठित अपराधियों के चंगुल में फंसे लोकतंत्र की हत्या करने पर आमादा हैं और वहाँ की सरकारें और कुछ राजनैतिक दल उन्हें संरक्षण दे रहे हैं।इन सभी संगठित अपराधियों से निपटने के लिये प्रत्येक राज्य में मकोका या यूपीकोका जैसे कानून की जरूरत है लेकिन कानून को राजनैतिक दुरपयोग से बचाना होगा।धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः -------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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