Monday, December 11, 2017

जाने कुंडली मे बारह भावों की महादशा-अभय पांडेय संग

कुण्डली के प्रत्येक भाव की महादशा भिन्न भिन्न फल प्रदान करने वाली होती है. बारह भावों में स्थित शुभ और अशुभ प्रभाव जातक के जीवन को पूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं. प्रत्येक भाव अनुसार महादशा के प्रभावों का वर्णन इस प्रकार से जातक को प्रभावित कर सकता है.

(1) भाव मालिक  लग्नेश की दशा
शारीरिक सुख, स्वास्थ्य, धन, बल की वृद्धि करने वाली होती है. यदि लग्नेश अष्टमस्थ हो तो शारीरिक पीडा़ हो सकती है. यदि लग्नेश में शनि की अन्तर्दशा से धन की हानि एवं कुंटुंब से विरोध हो सकता है.

(2) भाव मालिक मालिक द्वितीयेश की दशा

शारीरिक कष्ट एवं पीडा़ मिल सकती हैं पर यह धन संपदा में वृद्धि करने वाली भी होती है. द्वितीयेश पाप ग्रह से युक्त हो तो मानहानि, धनहानि, स्वजनों से विरोध को भी सहना पड़ सकता है. द्वितीयेश की महादशा में शनि, मंगल, सूर्य, राहु जैसे ग्रहों की अन्तर्दशा में धन की हानि हो सकती है. पाप ग्रह द्वितीयेश होकर द्वितीयेश होने पर अपनी दशा में धन के साथ समस्या भी  देता है.

यदि द्वितीय भाव में शुभ ग्रह हों तथा धनेश भी शुभ ग्रह से युक्त हो तो द्वितीयेश की दशा में जातक अच्छी उन्नती प्राप्त करता है.

3 हाउस मालिक  तृतीयेश की महादशा
तृतीयेश शुभ ग्रहों से युक्त हो अथवा शुभ ग्रह के साथ स्थित हो तो तृतीयेश की दशा एवं अन्तर्दशा में अत्साह, साहस एवं पराक्रम की वृद्धि होती है. भाई बहनों का प्रेम प्राप्त होता है.

तृतीयेश यदि पाप ग्रहों से युक्त हो तो पाप ग्रह की अन्तर्दशा में भाई बंधुओं से मतभेद उत्पन्न हो सकता है. पापी तृतीयेश होने पर अशुभ प्रभाव अधिक देखने को मिलते हैं. यह शत्रुओं की वृद्धि करती है धन नाश, कामकाज में  असफलताएं भी  मिलती  है.

4 हाउस मालिक चतुर्थेश की महादशा

चतुर्थेश यदि पाप ग्रहों से युक्त हो तो पाप ग्रहों की अन्तर्दशा आने पर भू-संपदा की हानि, मानसिक कलेश, वाद विवाद एवं माता के सुख में कमी आती है.
चतुर्थेश यदि शुभ ग्रहों से युक्त हो तो इसकी दशा में भूमि, भवन का सुख प्राप्त होता है, वाहन का सुख एवं माता का सुख मिलता है.

5 भाव मालिक  पंचमेश की महादशा

पंचमेश में  शुभ ग्रह हों तो इसकी दशा में धन का लाभ होता हे संतान का सुख एवं उससे सम्मान की प्राप्ति होती है. राजसम्मान तथा लोगों से स्नेह प्राप्त होता है. पंचमेश की दशा धन धान्य, विद्या सुबुद्धि प्रदान करती है. व्यक्ति के मान सम्मान में वृद्धि होती है. परंतु पंचमेश माता के लिए मारकेश होने से माता को कष्ट, पीडा़ भी प्राप्त हो सकती है.
पंचमेश की महादशा में पाप ग्रह की अन्तर्दशा होने पर भय, दुख, संतान पर कष्ट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
6 हाउस मालिक  षष्ठेश की महादशा

षष्ठेश की महादशा में रोग, शत्रु का भय लग सकता हे. संतान को कष्ट हो सकता है. षष्ठेश की दशा में पाप ग्रहों की अन्तर्दशा नौकर में कष्ट हेल्थ सम्बन्धी समस्याएँ  कारावास, मुकदमा  भी झेलना पड़ सकता है
अगर षष्ठेश शुभ ग्रहों की द्रष्टि में हो तो समस्याएँ कम हो जायेंगी .

7 हाउस मालिक  सप्तमेश की महादशा

सप्तमेश की दशा में शोक, शारीरिक कष्ट मिल सकता है. सप्तमेश पाप ग्रह हो तो इसकी दशा में स्त्री को कष्ट प्राप्त हो सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव एवं अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है. सप्तमेश में पाप ग्रह की अन्तर्दशा होने पर जातक को स्त्री सुख से वंचित रहना पड़ सकता है.

किंतु शुभ ग्रहों से युक्त होने पर यह दांपत्य सुख प्रदान करने में सहायक होता है तथा सांसारिक सुख प्रदान करने में सक्षम होता है.पार्टनरशिप ओर व्यापार में तरक्की होगी

8 हाउस मालिक अष्टमेश की महादशा

अष्टमेश की दशा में पाप ग्रह की अन्तर्दशा शत्रु से भय, धन का नुकसान  करा सकती है. इसकी पाप ग्रहों की दशा स्त्री, मित्रों, भाई बंधुओं के सुख में कमी आती है. अष्टमेश शुभ ग्रहों की द्रष्टि में हो तो  इसकि अच्छी दशा दिर्घायु प्रदान करने में भी सहायक होती है.

9 हाउस मालिक नवमेश की महादशा

नवमेश की दशा में धार्मिक प्रवृत्ति देखी जा सकती है. जातक दान., पुण्य, तीर्थ यात्राओं करने की इच्छा रखने वाला होता है. शुभ ग्रहों से युक्त होने पर बुद्धि, प्रतिष्ठा में उन्नती देने वाला होता है.
नवमेश की दशा में पाप ग्रह का अन्तर्दशा होने पर पिता को कष्ट हो सकता है, धार्मिकता का पतन हो सकता है तथा धन का नाश एवं भाग्य साथ नहीँ देता तरक्की रुक जाती है

10 भाव मालिक दशमेश की महादशा

दशमेश की दशा में धन और मान सम्मान की प्राप्ति होती है. राज सम्मान की प्राप्ति हो सकती है.
दशमेश पाप या नीच ग्रहों से युक्त होने पर प्रियजनों से मतभेद  देता है, अपमान, कार्य में रूकावट देता है, अवनती और पदच्युति प्रदान करता है. यदि कोई ग्रह दशम में उच्च या शुभ का हो तो उक्त ग्रह की दशा में भाग्योदय, मान सम्मान की प्राप्ति होती है.

11 हाउस मालिक एकादशेश की महादशा
एकादशेश भाव लाभ का स्थान कहलाता है अत: इसकी दशा में लाभ प्राप्ति की संभावना देखी जा सकती है. जातक व्यापार एवं व्यवसाय से अच्छा लाभ पाता है. उसे सम्मान एवं यश की प्राप्ति होती है.

यदि लाभेश पाप ग्रहों से युक्त हो तो इसकी दशा रोग प्रदान कर सकती है. इसमें पाप ग्रहों की अन्तर्दशा  हानि, दुख प्रदान कर सकती है तथा व्यर्थ के खर्चों को बढा़ सकती है.

द्वादशेश की महादशा
द्वादशेश भाव व्यय भाव कहलाता है. व्ययेश की दशा में आर्थिक कष्ट, रोग, चिंता प्रदान करने वाला हो सकता है. द्वादशेश की दशा में शनि, सूर्य अथवा मंगल की अन्तर्दशा स्त्री एवं संतान से मतभेद प्रदान कर सकती है.

द्वादशेश की महादशा में राहु की अन्तर्दशा व्यापार में हानि ,स्वास्थ सम्बंधी समस्या रोग का भय जेल कोर्ट केस आदि  प्रदान कर सकती है.
पर इसपर शुभ ग्रहों की द्रष्टि राहत भी प्रदान करती है

विशेष
समस्याकारी दशा होने पर दशा मालिक सम्बन्धी चीजों का दान उनके पाठ करना  मंत्र जाप लाभ देंगे साथ में सभी से अपना व्यवहार अच्छा रखे कोई भी काम सोच विचार कर बडो की सहमति से करें समस्या कम होगी
कोई भी रत्न कुण्डली विश्लेषण करवा कर ही पहने  !

No comments:

Post a Comment