Thursday, January 4, 2018

कर्जमाफी योजना और बेंको की मनमानी

विधायिका और कार्यपालिका दोनों एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं और जब दोनों में एकरूपता आ जाती है तो लोकतंत्र बलवान होकर लक्ष्य की अग्रसर होने लगता है। विधायिका एवं सरकार की छबि बनाने बिगाड़ने में कार्यपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सरकार की योजनाओं को कार्यपालिका ही मूर्ति रूप प्रदान करती है। हमारी बैकिंग व्यवस्था भी कार्यपालिका का एक महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है जो लोगों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करती है।बैंक हमेशा से जनता के मध्य विश्वसनीय एवं आस्था के प्रतीक बने हुए हैं और इसी आशा विश्वास के बल पर बैकिंग व्यवस्था परवान चढ़कर जनता की गरीबी को दूर करने वाली सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करती है।आजकल सरकार की सारी योजनाएं बैंक के माध्यम से चलाई जा रही हैं और बैकिंग व्यवस्था दिनों दिन अविश्वसनीय होती जा रही है। सरकार की महत्वपूर्ण नोटबंदी योजना बैकिंग व्यवस्था की भेंट चढ़कर सरकार और आमजनता के लिये सिरदर्द व मुसीबत बनती जा रही है ।बैंक से लोगों का विश्वास नोटबंदी के साथ ही संदिग्ध होने लगा है क्योंकि नोटबंदी के दौरान जब गरीब जनता दो हजार रुपये के नोट बदलने के लिए कड़ाके की ठंड में लाइन लगा रही थी उस समय बैंक हरामखोरों की काली कमाई को सफेद बना रहा था।बैंक चिल्ला रहा है कि उसके पुराने नोट जमा हो गये लेकिन अभी चार दिन पहले पच्चीस करोड़ रुपये के पुराने नोट उस समय पकड़ लिये गये जबकि उन्हें बदलने के लिए लोग उन नोटो को लेने आये थे।आखिर कौन बैंक है और कौन गिरोह है जो मोदी सरकार को बदनाम करने में जुटा है और योजना बंद हो जाने के बावजूद अभी भी नोट बदलने का दुस्साहस कर रहा है।बैंक की कार्यशैली योजना को बदनाम करने में मुख्य मानी जाती है। नोटबंदी से जहाँ एक तरफ बैंकों की साख घटी ही थी वहीं प्रदेश सरकार की दूसरी महत्वपूर्ण कर्जमाफी योजना भी बैंकों की भेंट चढ़ती दिख रही है। बैंकों की मनमानी के चलते हजारों बकायेदार किसानों को इस महत्वकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।यह पहली बार हुआ है कि सरकार की घोषणा के बावजूद घोषित धनराशि सीमा के अंदर आने वाले किसानों को पूरा लाभ नहीं मिला है और जिसका एक लाख बकाया था उसका पूरा नहीं माफ किया गया है।लोग समझते थे कि एक लाख के अंदर तक का कृषि कर्ज माफ हो जायेगा लेकिन न जाने कैसी नीति बनाई गई है कि पूरा का पूरा बकाया माफ नहीं हो सका है। बैंकों की मनमानी का एक ताजा नमूना बाराबंकी जिले की तहसील रामसनेहीघाट के विकास खंड बनीकोडर की फैजाबाद जिले की रूदौली विधानसभा से जुड़ी एक दर्जन से भी ज्यादा ग्राम पंचायतें हैं जहाँ पर कर्जमाफी योजना अबतक लागू ही नही हुयी है और कहते हैं कि बैंक कर्ज माफ करने की जगह किसानों को झांसा देकर उनके बकाया खातों का नवीनीकरण कर रहा है।यह सभी ग्राम पंचायतें जिले की सीमा पर पड़ती हैं और सबसे ज्यादा कमजोर मानी जाती हैं क्योंकि यह गोमती कल्याणी नदियों से घिरी हुई हैं।इन ग्राम पंचायतों के लोग अपनी नजदीकी मवई बाजार स्थित आर्यावर्त ग्रामीण बैंक से लम्बे समय से बैकिंग लाभ ले रहे हैं।अबतक मवई रामसनेहीघाट तहसील का परगना और थाना था और कभी कोई दिक्कत नहीं होती थी।इधर जबसे मवई को फैजाबाद में मिला लिया था है तबसे समस्याओं का अम्बार लग गया है। मवई बैंक की जिम्मेदारी बनती थी कि वह बाराबंकी से जुड़े कृषि बकायेदारों की सूची बनाकर जिला कृषि अधिकारी के पास सीधे या फैजाबाद के माध्यम से भेजवाकर लाभ दिलाने का कार्य करता लेकिन उसने ऐसा न करके सरकार के खिलाफ बगावत करने जैसा कृत्य किया है। लेकिन बैंक की लापरवाही मनमानी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में रोड़ा बन गयी है। अबतक कार्यपालिका से जुड़े जिम्मेदार लोग कुम्भकर्णी नीद में सो रहे थे लेकिन जब किसान आंदोलित होकर सड़क पर आ गया तो उनकी नींद खुली है।हमने एक पत्रकार होने के नाते जब इस सम्बंध जिम्मेदार अधिकारियों से बात किया तो पता चला कि आंदोलन के बाद इस दिशा में कार्यवाही शुरू हुयी है और जल्दी ही योजना का लाभ दिया जायेगा। आखिर बैंकों की मनमानी पर रोक लगाने की जगह सरकार उन्हें बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है और अब वह ग्राहक को भगवान उपभोक्ता नहीं बल्कि गरजी मानने लगे है ? सरकार की कर्जमाफी योजना का लाभ सरकार की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश के सभी पात्र किसानों को मिलनी चाहिए उन्होंने कर्ज चाहे जहाँ ले रखा हो।यह नही भूलना चाहिए कि कर्जमाफी की सीमा जिला नहीं बल्कि पूरा प्रदेश है। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ऊँ नमः शिवाय।।।
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        भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार / समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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