Sunday, January 21, 2018

राजनीति में अपने विरोधियों को सबक सिखाने की परंपरा-भोला नाथ मिश्रा का लेख

राजनीति में अपने विरोधियों को सबक सिखाने की पुरानी परम्परा रही हैं और जो सत्ता में आता है वह सत्ताच्युत होने वाले के कार्यकाल में हुये विकास व अन्य कार्यों की जांच कराने का कार्य करता है।इधर राजनीति भ्रष्टाचार की पर्याय बन गई है और बहुत कम लोग हैं जो राजनैतिक भ्रष्टाचार से दूर हैं। सत्तर के दशक से आयीे राजनैतिक गिरावट के फलस्वरूप राजनैतिक भ्रष्टाचार कुछ ज्यादा होने लगा है।अबतक तमाम राजनैतिक भ्रष्टाचार सामने आ चुके हैं और तमाम राजनेता इसकी चपेट में आ चुके हैं।उत्तर प्रदेश की राजनीति में तो इधर भ्रष्टाचार की बाढ़ सी आ गयी थी जिसके चलते सरकारी योजनाओं में घपला होना एक आमबात हो गयी थी। बसपा के जमाने में तो भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन गया था और अधिकारियों तक को जन्मदिन के लिये चंदा देना पड़ता था।सपा सरकार में गायत्री प्रसाद प्रजापति जैसे लोगों ने भ्रष्टाचार की सीमा पार कर दी थी जिसका खामियाजा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव को भुगतना पड़ा। भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिकता से ऊबकर ही पिछले चुनाव में देश व प्रदेश में जनता ने भाजपा की सरकार बनाई थी।सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ देश प्रदेश स्तर पर अभियान चला रही है और पिछली सरकारों को नंगा करके जनता के बीच उन्हें बेनकाब करने में लगी है। प्रदेश की योगीजी की सरकार ने एक साल बाद करवट बदली है और अखिलेश यादव के जमाने में महामहिम राज्यपाल द्वारा जाँच कराने के निर्देश का अनुपालन शुरू कर दिया है।महामहिम राज्यपाल नाईक ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश को पत्र भेजकर प्रदेश में कराये गये चार प्रमुख कार्यों की सीएजी जाँच कराने के निर्देश दिए थे लेकिन सरकार ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की थी। सरकार के औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से नोयडा, ग्रेटर नोयडा, जेडा यमुना एक्सप्रेस- वे और यूपीसीडा के कार्यों की जाँच कराने का फैसला योगी सरकार इससे पहले अगस्त में ही ले चुकी है लेकिन उस फैसले को अब वापस ले लिया गया है।सरकार के नये फैसले के बाद राजनैतिक क्षेत्रों में खलबली मच गयी है क्योंकि नये फैसले में वर्ष 2005-6 से 2017 तक के कार्यों की सीएजी जाँच के निर्देश दे दिये गये हैं। इस दौरान सपा के मुलायम सिंह यादव बसपा की मायावती जी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहें हैं। मतलब प्रदेश के मुख्य विरोधी दल इसकी चपेट मे आ सकते हैं।इससे पहले सरकार ने 2017-18 के कार्यकाल के कार्यों की जाँच कराने के निर्देश दिये थे किन्तु अब उसमें बदलाव करके कार्यकाल विस्तारित कर सीएजी जाँच कराने का सरकारी फरमान सरकार के प्रमुख सचिव आलोक सिन्हा ने जारी कर दिया है।जिन चार अथारिटियों के लम्बे कार्यकाल की जाँच कराने का निर्णय लिया गया है इन्हीं में बड़े बजट वाले तमाम विकास कार्यों को करवाया है।वह दौर ऐसा था जिसमें घर का रखवाला ही खुद चोर बनकर आँख मूँदकर लूटने में जुटा था।वह घपलों और भ्रष्टाचार का जमाना था जब हर कार्य में कमीशन देना पड़ता था।नोयडा ग्रेटर नोएडा यमुना एक्सप्रेस-वे जैसे महत्वपूर्ण बड़े टेंडर वाले कार्यों में घाँवमाँऊ होना स्वाभाविक है और शायद इसीलिए सरकार ने विरोधियों की नकेल कसने के लिए पिछले तीन सरकारों के कार्यकाल के उक्त महत्वपूर्ण खर्चीले कार्यों की जाँच कराने का फैसला लिया गया है।सरकार का यह फैसला प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा करके राजनैतिक परिदृश्य को बदल सकता है।
       भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

No comments:

Post a Comment