Thursday, January 11, 2018

अजमेर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा कांग्रेस ने दिखाया दम

अजमेर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवारों ने आज अपना अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने के दौरान भीड़ का आंकलन करें तो भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप लांबा और भाजपा समर्थकों ने मिलकर पूरा पटेल मैदान भर दिया । पटेल मैदान की भीड़ का तुलनात्मक अध्ययन यदि कांग्रेस की आम सभा (जो की राजा साइकिल चौराहे पर रखी गई थी )से किया जाए तो लाम्बा ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहे हैं ।नामांकन दाखिल करने के वक्त कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ रघु शर्मा के साथ पूर्व सांसद राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी सहित अजमेर जिले के लगभग सभी नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे ।गौरतलब बात यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्रीअशोक गहलोत और डॉ. सीपी जोशी सीधा आमसभा स्थल पर ही पहुंच पाए ।
व नामांकन दाखिल करने पायलट के साथ कलेक्ट्रेट नहीं गए। आम नज़र से देखने में तो यह बड़ा सामान्य लगता है...कि भाई बड़े लोग हैं टाइम नहीं मिला होगा सीधे पहुंच गए होंगे !! परंतु आम वोटर की मैथमेटिक्स से परे राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो, आज ही मांडलगढ़ सीट   जो कि डॉ सीपी जोशी की प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई क्योंकि उस सीट पर जोशी ने बड़ी जिद करके विवेक धाकड़ को लोकसभा उपचुनाव का टिकट दिलवाया है । आज उसी सीट से तकरीबन 15000 लोगों को साथ लेकर कांग्रेस के बाघी उम्मीदवार गोपाल मालवीय ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है । मालवीय भीलवाड़ा जिले के गुर्जर नेता धीरज गुर्जर के भक्तों में से एक है और माँण्डल गढ़ लोकसभा की तकरीबन 10 पंचायतें धीरज गुर्जर के विधानसभा क्षेत्र में हैं। बात सीधी और सपाट है की राजनीतिक दृष्टि से धीरज गुर्जर एक तरह से सीपी जोशी को नुकसान पहुंचा रहे हैं । लेकिन क्यों तो इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता की सचिन पायलट का तेज़ दिमाग एक तरफ तो खुद मौजूद रहकर अपनी सीट बचाने में बूट बंदूक बांधकर लगा हुआ है ।
वहीं दूसरी ओर सीएम  पद के संभावित दावेदार  डॉ सीपी जोशी की प्रतिष्ठा का दाव जिस सीट पर लगा है वहीं से धीरज गुर्जर समर्थक को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ा होने से रोक नहीं पा रहा है। यहां  एक बहुत प्रमुख बात जो कि इस चुनाव के विश्लेषण करने के दौरान जानने योग्य है वह यह है कि राजस्थान की तीनों सीटों पर मांडलगढ़ अलवर और अजमेर के चुनाव में जिनकी भी अस्मिता दाव पर लगी हुई है वे सभी आने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं।डॉक्टर सीपी जोशी मांडलगढ़ पर, भंवर जितेंद्र सिंह अलवर पर और सचिन पायलट अजमेर की सीट पर अपनी अपनी किस्मत का दाव खेल रहे हैं।तीनों सीटों के नतीजे काफी हद तक आने वाले समय में इन तीनों राजनेताओं का भविष्य निर्धारण करेंगे।
बात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की करें तो उनके राजनीतिक करियर मे यह सब जीवन में एक बार ही घटित  होती हुई खगोलीय घटना जैसा दिखाई पड़ रहा है।जहां वह इन सभी से ज्यादा अनुभवी होते हुए भी अपनी अस्मिता किसी भी सीट को लेकर दांव पर नहीं लगा रहे हैं।गहलोत के खाते में गुजरात चुनाव में कांग्रेस के बढ़ते हुए ग्राफ   और उनकी राजस्थान में लोकप्रियता के सिवा कुछ भी नहीं है।
बहरहाल अजमेर में आज की भीड़ को देखकर तो यही लग रहा है कि आने वाले चुनाव में भाजपा का पलड़ा भारी रहेगा
। फिर सत्ता की ताकत को अगर उसमें से माइनस भी कर दिया जाए तब भी भाजपा का आंतरिक संगठन और बूथ लेवल का मैनेजमेंट कांग्रेस की मात्रा में काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। जो की चुनावी गणित के हिसाब से किसी भी पार्टी की जीत का इंश्योरेंस कार्ड होता है । इसी पायदान पर कांग्रेस में अभी तक बूथ लेवल मैनेजमेंट जैसा कुछ भी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। उस पर कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और मुख्यमंत्री पद के दावेदारों का आपसी संघर्ष।कांग्रेस समर्थक जाट नेताओं का रुख भी अब तक साफ नही दिखाई दे रहा है। यदि लाम्बा को भाजपा की आंतरिक जाट राजनीति का संघर्ष नुकसान भी पहुंचाता है तो कांग्रेस के जाट नेताओं की उदासीनता समीकरण को बैलेंस कर लांबा को और मजबूत बनाएगी ।

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