Tuesday, January 23, 2018

स्वच्छ भारत अभियान पर सम्पादकीय

स्वच्छता जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है और आदमी कौन कहे कुत्ता भी जहाँ बैठता है वहाँ पर अपनी पूंछ से सफाई कर लेता है।घर हो दूकान या चाहे शरीर हो सभी सफाई होने के बाद खिल उठते हैं और सफाई से बनाया गया खाना भी दिव्य भोजन बन जाता है।साफ सफाई न होने से अस्पतालों में मरीजों को इंफेक्शन हो जाता है और गाँवों में सफाई न होने से तरह तरह की बीमारियां फैल जाती हैं और लोगों की असमय मौत तक हो जाती है।आबादी बढ़ने से गाँव हो चाहे शहर हो उनकी भौगोलिक स्थिति में भी बदलाव हुआ है और पहले की अपेक्षा इस समय गाँवों मुहल्लों में गंदगी बढ़ी है। बसपा सरकार ने स्वच्छता अभियान के नाम पर गाँवों की स्वच्छता के नाम पर सरकारी कर्मचारियों की तरह सफाई कर्मियों की भर्ती की गई थी। इन सफाई कर्मियों में तमाम ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट तक के लोग बेरोजगारी के चलते भर्ती हो गये थे।इन सफाई कर्मियों में सभी जाति धर्म सम्प्रदाय के लोग थे और अधिकांश सफाई करने वाले शूटबूट वाले थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का स्वच्छता अभियान सफाई कर्मियों की मनमानी की भेंट चढ़ गया है और गाँव गली मुहल्ले को कौन कहे सभी स्कूलों की सफाई तक करने सभी सफाईकर्मी नहीं हो पाती हैं। जिन सरकारी स्कूलों में सफाई कर्मी नही जाते हैं वहाँ के शिक्षकों को रोजाना खुद झाड़ू लगाना और शौचालय साफ करना पड़ता है। प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान की गाड़ी गाँवों में आकर रूक सी गयी है।अस्सी फीसदी ऐसे गाँव हैं जहाँ कभी भी सफाई कर्मी स्वच्छता अभियान को गति प्रदान करने नहीं जाते हैं। यह सही है सभी सफाई कर्मी एक जैसे नहीं हैं और तमाम ऐसे भी है जो तैनाती स्थल पर निवास बनाकर नित्य सफाई करते भी हैं।यह बात अलग है कि कुछ सफाई कर्मी खुद न जाकर अपनी जगह किराये का आदमी लगा देते हैं लेकिन सफाई होती है।सफाई कर्मियों की बड़ी संख्या सफाई स्वच्छता की जगह अधिकारियों के पास वैकल्पिक व्यवस्था के रुप में लगी खिदमत कर रही है। जिन्हें गाँव गलियों की बजबजाती नालियों को साफ करना चाहिए वह दफ्तरों और आवासों की शोभा बढ़ा रहे हैं।अगर गाँवों में तैनात सफाई कर्मी अपना निवास स्थान बनाकर नित्य सफाई करने लगें तो स्वच्छ भारत स्वस्थ्य भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।गाँवों स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई स्वच्छता से अभियान को लक्ष्य प्रदान किया जा सकता है।
         भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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