Wednesday, January 17, 2018

जाने कब और क्यों होता है गुप्त नवरात्रि उपासना का मास

ज्योतिर्विद अभय पाण्डेय
हमारी संस्कृति प्राचीन काल से हीं धर्म प्रधान रहीं है।हमें धर्म सुसंस्कार धारण करने की ओर प्रेरित करता है जिससे हम हर स्थितियों में सम्यक दृष्टि और धारणा प्राप्त कर जीवन की गति को गतिमान कर शक्ति रूपी परम सत्ता को प्राप्त करते हैं।इस वर्तमान कलिकाल में तो उस परम तत्व को प्राप्त करने का सबसे सुलभ मार्ग है उसका भजन।उस परम तत्व को भजने की अनेक विधियाँ है,जिनमे जप,तप,होम आदि सम्मिलित है।उपासक मन्त्र,तन्त्र माध्यम से उस परम तत्व को प्राप्त करते हैं।कलिकाल में उपासना के सन्दर्भ में कहा गया है कि-“कलौ चंड विनायकौ”,अर्थात कलियुग में गणेश जी और माता दुर्गा की आराधना से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है,क्यूंकि गणेश जी समस्त विघ्न को दूर करते है माता हमें शक्ति प्रदान करती हैं।जिससे मानव उत्साह पूर्वक अपने लक्ष्य की प्राप्ति मानव को शक्ति की आवश्यकता हमेशा पड़ती है,और शक्ति प्रदात्री माता की उपासना मुख्यतः चैत्र शुक्ल और आश्विन शुक्ल मास की प्रतिपदा और नवमी तिथि तक प्राप्त हुई।इन मासों के मध्य करीब छः माह का अन्तर प्राप्त हुआ।शक्ति के उपासक भक्तों की बढ़ती तीव्र ईच्छा को ध्यान में रखते हुये दो गुप्त नवरात्रि की व्यवस्था प्राप्त हुई,जिसका वर्णन देवी भागवत में आता है,और उसके लिए आषाढ़ मास और माघ मास का शुक्ल पक्ष निर्धारित हुआ।जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा होती है,उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।इस गुप्त नवरात्रि में साधक माता काली,तारा देवी,त्रिपुर सुंदरी,त्रिपुर भैरवी,भुवनेश्वरी,माता छिन्नमस्तका,माता ध्रूमावती,माँ बगलामुखी,मातंगीऔर कमला देवी की पूजा कर दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली शक्ति प्रदायिनी गुप्त नवरात्रि का शुभारम्भ दिनाँक 18 जनवरी को हो रहा है,जो 26 जनवरी 2018 तक पूर्ण होगा।शक्ति प्रदात्री माता सभी साधकों को शक्ति प्रदान कर उनके लक्ष्य को प्राप्त करने का आशीर्वाद प्रदान करें।

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