Tuesday, January 16, 2018

मनुष्य के जीवन मे खास है दान का महत्व

मनुष्य जीवन में दान का बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है और दान ही मनुष्य की अपनी पहचान होती है। बिना दान के जीवन पशुवत जीवन माना गया है और कहा भी गया है कि-" दानम् न शीलम् गुणों न धर्मः ते मृत्युलोके भूभार भूत्वा मनुष्य रुपेण मृगाष्चरिन्ते"। ईश्वर ने मनुष्य शरीर ही दान करने के लिये विशेष तौर पर बनाया है क्योंकि वह खुद महादानी है और दान देना उसका स्वाभाव है। ईश्वर लेता नही देता होता है और जो लेता नहीं बल्कि देता ही है तो  वहीं उसका सच्चा भक्त अनुरागी उसकी असली संतान होता है। दान जीवन में अनेकों प्रकार के होते हैं और सभी दान मनुष्य को मानव से देवमानव बनाने में सहायक होते हैं।कल मकर संक्रंति के अवसर पर अन्नदान के रुप में खिचड़ी तिल गुड़ के दान की शुरुआत हो चुकी है।इसी तरह दानों की एक बहुत लम्बी फेहरिस्त है जो आसानी अपनी दिनचर्या के साथ दिया जा सकता है। अन्न दान के अलावा कन्यादान भूदान शिक्षादान समयदान धनदान तिलदान वस्त्रदान रक्तदान फलदान देहदान आदि तमाम तरह के दान देने का अवसर जीवन में करने के अवसर जीवन में मिलते हैं। दान के सहारे ही न जाने कितने मृत्यु शैय्या पर मरीजों को नया जीवनदान मिल जाता है। ध्यान रखने की जरूरत है कि दान हमेशा सुपात्र को दिया जाता है और हमेशा दान नेक शुभ कार्यों के लिए दिया जाता है। आजकल कुछ लोग चंदारुपी दान मांगकर आतंकवाद को बढ़ावा और अपना उल्लू सीधा कर रहें हैं। समयदान हमेशा ईश्वरीय ज्ञान और ईश्वरीय कार्य के प्रति होना चाहिए और समयदान के नाम पर बुरे कार्य बुरी शोहबत और बुरी नजर वाले कार्य नहीं होने चाहिए। समय का जीवन में बहुत महत्व होता है और कहा भी गया है कि-"समय चक्रवर्ती महाराजा से मरघट का चौकीदार या टैक्स कलेक्टर बना बना देता है। समय चलायमान है जो हमेशा अपनी गति से चला करता है और किसी का इंतजार नही करता है।जीवन के जब किसी मोड़ पर स्टेशन पर ठहराता है तो चतुर सुजान समय के साथ सवार हो जाते हैं। दान देने से कभी किसी भी तरह की हानि नहीं होती है बल्कि उसमें स्वतः वृद्धि हो जाती है।हमारा इतिहास साक्षी है कि हमारी इस धरती पर अबतक न जाने कितने दानी महादानी पैदा हो चुके हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जीवन में सुपात्र को दैनिक दिनचर्या में दान देने का अपना स्वाभाव बना कर जीवन धन्य कर लेते है क्योंकि वह जानते हैं कि-"पंक्षी पानी के पिये घटै न सरिता नीर, दान दिहे धन न घटै जो सहाय रघुबीर"। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।
          भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

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