Saturday, January 6, 2018

अंग्रेजो के बनवाये विजय स्तम्भ पर भड़की जातीय हिंसा पर भोलानाथ मिश्रा का लेख

हमारे देश की राजनीति और हमारे नेता अपने देश को ही क्षतिग्रस्त करने जैसी है। राजनीति चमकाने के लिए कुछ लोगों को अगर गधे को बाप बनाना पड़े तो कोई फर्क नहीं पड़ता है।इस समय हमारे नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश व समाज विरोधी भाषा का इस्तेमाल करने जातीय व साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने और दुश्मनों का गुणगान गाने से गुरेज नहीं करते हैं।कुछ लोग उनका सम्मान करने से शर्म नहीं कर रहे हैं जो कभी इस देश के दुश्मन रहें हैं। जिसने हमारे देश को गुलाम किया हो और साम्राज्य को समाप्त कर दिया हो ऐसे लोगों का अपने देश में ही सम्मान करता है तो उसे देशप्रेमी नहीं कहा जा सकता है।इसी तरह अतीत को याद करके वर्तमान को अतीत से जोड़ना उचित नहीं कहा जायेगा। तीन चार दिन पहले अतीत की घटना को ताजा करने के नाम भड़की जातीय हिंसा को किसी भी तरह से सही नही कहा जा सकता है।महाराष्ट्र के भीमा कोरा गाँव में दो सौ साल पहले अंग्रेजों और मराठियों के मध्य लड़ाई हुयी थी जिसमें मराठियों की हार हो गयी थी और उनका साम्राज्य समाप्त हो गया था। इस लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय अंग्रेजों से जंग हार गये थे।अंग्रेजों ने इस शानदार ऐतिहासिक विजय की यादगार में एक विजय स्तंभ बनवाया था। इस लड़ाई में कुछ मराठी दलित भी शामिल थे जो राजनीति के तहत दुश्मनों के बनवाये स्तम्भ पर हर साल उसकी यादगार में समारोह करते हैं। आश्चर्य तो इस बात का है कि अंग्रेजों के विजय स्तंभ पर होने वाले लाखों दलितों की भीड़ वाले समारोह में हमारे मंत्री सांसद विधायक भी शामिल होते हैं।यह समारोह हर साल मराठियों को अतीत में हुयी पराजय की याद दिलाकर आक्रोशित कर देता है इसलिए वह इस आयोजन का विरोध करते हैं।दूसरी तरफ महार दलित इसे ब्राह्मणों मराठियों पर दलितों की विजय मानकर हर साल जले पर नमक छिड़कते हैं। मराठियों की हार का जश्न उनके ही राज्य में उनकी आँखों के सामने मनाना बर्दाश्त नहीं करते हैं।इस बार भड़की जातीय हिंसा को इस कदर राजनीतिक हवा दी गयी कि पूरा महाराष्ट्र ही धूं धूं करके जलने लगा और बेगुनाहों की जान चली गयी।आपसी समुदाय के संघर्ष आपसी सीमा में ही निपटना चाहिए उसे राज्य स्तरीय स्वरूप देनी मात्र राजनीतिक रोटियां सेंकने जैसा है।इस घटना को लेकर बसपा कांग्रेस आदि की राजनीति शुरू हो गई है सभी इसे हवा देकर अपनी राजनीति पक्की करने में जुट गये हैं जबकि महाराष्ट्र सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिये हैं और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज किया है।भले ही हमारे पुरखों ने गलती की हो किन्तु हमने तो नही की है अगर यह सोच दोनों समुदायों में पैदा हो जाय तो समस्या का स्थाई समाधान हो सकता है। लेकिन समस्या समाधान होने के बाद राजनीति नही हो सकती है। यह हमारी भारत सरकार का दायित्व बनता है कि अंग्रेजों के बनवाये भारत विरोधी विजय व अन्य स्तंभों को अस्तित्व विहीन कर दे क्योंकि वह हमारी गुलामी के प्रतीक हैं। धन्यवाद।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निंग / नमस्कार / शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुवः स्वः-------/ ऊँ नमः शिवाय।।।
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         भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी
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