Wednesday, January 17, 2018

राजनीति में बढ़ती बदले की भावना और लोकतांत्रिक उम्मीदों पर भोला नाथ मिश्रा का लेख

राजनीति यदि इसी कटुता भाव से चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब कि लोकतांत्रिक प्रणाली की अपेक्षाएं समाप्त हो जायेगी।आज की राजनीति में जो हमें वोट सपोट देता है वह हमारा होता है और जो हमारे विरोधी के साथ होता है वह दुश्मन की तरह होता है। चुनाव जीतने के बाद इसका कभी कभी हिसाब भी चुकता किया जाता है और तरह तरह का नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है।।लोकतंत्र में चुनाव में विजयी होने के बाद राजनैतिक दुश्मनी भुला दी जाती है और सबको साथ लेकर चलने की व्यवस्था है। सरकार बनने के बाद वह सिर्फ अपनी पार्टी की ही.नही बल्कि सबकी हो जाती है। किसी के साथ भेदभाव उत्पीड़न नहीं करती है बल्कि सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। राजनीति में जबसे पक्ष विपक्ष लोकतांत्रिक अपेक्षाओं की पटरी से उतर गया है तबसे राजनैतिक दुश्मनी चुनाव से शुरू होकर अगले चुनाव तक पहुंच जाती हैं।जबसे ग्राम पंचायतों का विकेन्द्रीकरण करके योजनाओं का संचालन जिला विकास खंड और ग्राम पंचायतों के माध्यम से शुरू किया गया है तबसे सरकारी योजनाओं का लाभ आमलोगों को नहीं मिल पाता है और बदले की राजनीतिक आड़े आ जाती है। विभिन्न योजनाओं में पात्रों का चयन दो हजार ग्यारह के सर्वे के अनुसार पात्रता के आधार पर किया जाता है।इस सर्वे में तमाम गाँव ऐसे भी हैं जिनमें कोई नाम ही सूची में दर्ज हैं।तमाम अन्य तरह की त्रुटियां हैं जिसकी वजह से यह सर्वे सूची भी विवादित हो गयी है। सरकार के इतने प्रयास के बावजूद सभी पात्रों को आवास पेंशन भूमि आवंटन एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।राजनीति राजनीति होती है चाहे देश प्रदेश जिला ब्लाक हो चाहे ग्राम पंचायत स्तर की हो।गाँव स्तर पर भी योजनाओं का फायदा वोट की राजनीति के आधार पर दिया जाता है। कोई भी योजना हो लेकिन उसका लाभ सबसे पहले प्रधान के समर्थक को ही दिया जाता है। यह क्रम आज की राजनीति में ग्राम पंचायत चुनाव से लेकर उच्च पंचायत के चुनाव में चलता रहता है और विपक्षी के साथ सरकार भी बदले की भावना से व्यवहार करती है।लोकतंत्र में बदले की भावना का समावेश लोकतांत्रिक प्रणाली के उज्जवल भविष्य के लिए शुभ नहीं माना जा सकता है।धन्यवाद।।भूलचूक गलती माफ
           भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी

No comments:

Post a Comment