Thursday, January 11, 2018

पीतल के बर्तनों का वजूद खत्म होने की कगार पर व्यापारियों में आक्रोश

मिर्जापुर सदियों से नगर के कसरहट्टी इलाके में निर्मित होने वाले पीतल बर्तन उद्योग को हटाने के आदेश से पूरे इलाके में भारी बेचैनी देखी जा रही है । इस कुटीर उद्योग छाए संकट को लेकर जहां व्यापारी लामबंद होते देखे जा रहे हैं वही कारोबार में लगे मजदूर आजीविका संकट के चलते बेचैन हैं । इसी के साथ इस कुटीर उद्योग से जुड़े अन्य व्यापार जगत के व्यवसाईयों ने सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है ।बुधवार को नगर के बाबा घाट स्थित हनुमानजी मन्दिर पर भारी संख्या में बर्तन व्यापारी तथा इससे जुड़े अन्य वर्ग के लोगों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता बर्तन व्यापार संघ के अध्यक्ष रामबाबू ने की । बैठक में व्यापारी नेता ओमप्रकाश ने बताया कि कसरहट्टी इलाके में घर घर बर्तन बनाने का कारोबार होता है । इस कारोबार में हजारों व्यापारी लगे हैं तो पचास हजार मजदूर काम करते हैं । बिना कोई सुविधा दिए कसरहट्टी इलाके से बर्तन उद्योग हटा कर अन्यत्र ले जाने का सरकार ने फरमान जारी किया है । जो न्याय संगत नहीं है । व्यापारी नेता विजय उमर ने कहा कि तकरीबन 5 सौ साल से इस क्षेत्र में बर्तन निर्माण का काम हो रहा है । यहां के बर्तनों की धूम दूर दूर तक है । जो आदेश आया है वह न्यायसंगत नही है । व्यापारी नेता देवेंद्र कसेरा ने कहा कि समाज के विकास में व्यापार जगत की अहम भूमिका होती है । सरकारको इसे संरक्षण देना चाहिए । जबकि रुपेश कुमार ने कहा कि इस व्यापार से न तो वायु प्रदूषण और न ही ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है । सीमित संख्या में बेलन मशीने वैसे भी प्लास्टिक एवं फाइबर बर्तनों के दौर में बंद होती जा रही हैं । जबकि दूसरे उद्योगों में ज्यादा प्रदूषण हो रहा है । केशव अग्रवाल ने मांग की कि पहले सरकार बर्तन औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर व्यापारियों को आवंटन करे, उंसके बाद कसरहट्टी से कारोबार हटाने की बात करे । बैठक में कामद नाथ, बबलू मिश्र, ओमप्रकाश, सन्तोष कुमार, विष्णु दयाल, अमर नाथ, कृष्ण कुमार, देवेन्द्र गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए ।इसी बीच गांव-गरीब नेटवर्क ने रिहायशी इलाके से बर्तन उद्योग को हटाए जाने की दी गयी नोटिस पर गम्भीरता से लिया है तथा कहा है कि आनन फानन में नोटिस देकर व्यापार जंगत को संकट में डालने से न सिर्फ सरकार की बल्कि पूरे समाज की अर्थ व्यवस्था पर असर पड़ेगा । खासकर गांव-गांव से आने वाले गरीब मजदूरों के समक्ष आजीविका संकट खड़ा हो जाएगा । प्रदूषण नियन्त्रण के लिए व्यापारियों के साथ बैठक कर वैकल्पिक हल ढूढ़ना चाहिए क्योंकि जो कार्रवाई की जा रही है वह भयावह स्थिति की ओर जाएगा । नेटवर्क के अध्यक्ष सलिल पांडेय ने कहा कि बेरोजगारी की स्थिति में अपराध बढ़ते हैं । अतः शासन को इस कुटीर उद्योग को संरक्षण देना चाहिए ।
पत्रकार आकाश मिश्रा

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